Vikas Shah musafir

Vikas Shah musafir

@Musafir2

Vikas shah shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Vikas shah's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
  • Nazm
सुना है ये ग़रीबी हर सफ़र को रोक सकती है
दिसम्बर जा रहा है रोक ले जो रोक सकती है
Vikas Shah musafir
तुम मेरी पहली उल्फ़त हो जानाँ
तुम को मेरा होकर ही रहना है
Vikas Shah musafir
कोई इक ही वो रिश्ता अब निभाता है
जो रिश्ता दोनों ने मिल कर बनाया था
Vikas Shah musafir
आपसे मिल कर मुझे अच्छा लगा पर
आप से थोड़ा अभी शर्मा रहा हूँ
Vikas Shah musafir
एक ज़िद्दी लड़का हासिल आपगा को कर रहा और
घूरता भी जा रहा है उस फ़लक को ग़ौर से अब
Vikas Shah musafir
सुन रहा हूँ फिर से मैं ता'रीफ़ें अपनी लोगों से
लगता है फिर से किसी को काम पड़ने वाला है

मुझ सेे मिलना भी गवारा नइँ हो पाता था तेरा
तू गले भी लग गई उस के वो इतना प्यारा है
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Vikas Shah musafir
बस ना कर दो मुझे चुप हो के चला जाऊँगा
मैं मुसाफ़िर हूँ तलैयुल से चला जाऊँगा

एक के होते हुए भी किसी और की चाहत
ऐसी उल्फ़त से अलग हो के चला जाऊँगा
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Vikas Shah musafir
उसे जाना था तो जाने दिया रोका नहीं मैं ने
ज़बरदस्ती का रिश्ता अब मुझे उस सेे नहीं रखना
Vikas Shah musafir
जो अस्ली ग़ज़ल है यही है "ग़ज़ल" वो
मगर ये "ग़ज़ल" जो है अस्ली नहीं है
Vikas Shah musafir
वो गिरी चीजें उठाती ही नहीं है
देख लेना वो दुबारा फेंक देगी

चूड़ियाँ उस की पहन ली गर जो उस ने
फिर तो वो छल्ला तुम्हारा फेंक देगी
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Vikas Shah musafir
इश्क़ की इस क़ैदस मुझ को रिहाई कब मिलेगी
देश तो आज़ाद कब का बंदिशों से हो चुका है
Vikas Shah musafir
इश्क़ करते थे तभी सहना पड़ा मुझ को, नहीं तो
दूर रहते जानते होते कि तुम ऐसा करोगी
Vikas Shah musafir
इन सब तकलीफ़ों से थक कर आँखों से आँसू बहते हैं
कहने वाले क्या जानें सहने वाले कितना सहते हैं
Vikas Shah musafir
मुझ बिन रहना तुम तो सीख गई पर
तुम बिन रहना सीख नहीं पाया मैं
Vikas Shah musafir
मैं तुम को सिर्फ़ रोने के लिए अब याद करता हूँ
वो पहले का ज़माना और था हर दिन याद आते थे
Vikas Shah musafir
मुझ को भी ऐसी आँख अता कर मेरे ख़ुदा
अंधा हो कर भी मुझ को ये नज़्ज़ारगी मिले
Vikas Shah musafir
मेरे वालिद पे क़र्ज़ा था मेरी ता'लीम को ले कर
उसी लाला का अब मुझ को तो कर्ज़ा भी चुकाना है
Vikas Shah musafir
समझा कर वो दोस्त थी मेरी
जैसे कि वो अब दोस्त तेरा है
Vikas Shah musafir
मेरा प्यार समझ ले अब तो
अब तो मुझ को सोच ले जाना

अब तन्हा हैं हम दोनों फिर
साथ चलेंगे मिल के जाना
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Vikas Shah musafir
तुम कभी नहीं आना चाहती हो मेरे घर
दुख कभी नहीं होता गर मिला नहीं होता
Vikas Shah musafir

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