Naaz ishq

Naaz ishq

@Naaz_ishq

Naaz ishq shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Naaz ishq's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
  • Nazm
चीज़ कोई भी अपनी जगह न मिलती घर में
जब से माँ की जगह हुई है ख़ाली घर में

जब से बहन हुई है रुख़्सत और पिता जी
तब से मुझ को याद आती है घर की घर में
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Naaz ishq
अब हस्ब-ए-आरज़ू न कोई न जुस्तजू है अब
अब तो कोई भी मिल जाए गुज़ारा कर लेंगे
Naaz ishq
उस को हम में दिलचस्पी थी और हमें थी ग़ज़लों में
दो मिसरे कहने थे उस को इतना भी न हुआ उस से
Naaz ishq
याद आता है रक़ीब से रोज़ उस का झगड़ा करना
और फिर मुझ सेे आ के उस की रोज़ शिक़ायत करनी
Naaz ishq
जिन राहों से यार कभी हम गुज़रे हैं
कोई और होता तो गुज़र गया होता
Naaz ishq
छोड़ा है उस ने मुझे तो "नाज़" फिर इस
में अजब क्या
छोड़ सकता मैं अगर ख़ुद को तो मैं भी छोड़ देता
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Naaz ishq
ख़ामोशी की चादर ओढ़े तन्हा तन्हा रहते हो
लगता है कि तुम भी थोड़े थोड़े मेरे जैसे हो

बात हमारी होती है जब जाने कैसा लगता है
इश्क़ मोहब्बत प्यार नहीं है लेकिन अच्छे लगते हो
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Naaz ishq
जब तक इल्म मुझे हो पाया उस से मोहब्बत का
तब तक तो मुझ सेे काफ़ी दूर जा चुका था वो
Naaz ishq
मैं ने थोड़ी और हिम्मत करली होती काश उस दिन
फिर न मुझ को ये बताना पड़ता फिर सब देख लेते
Naaz ishq
हक़ ज़िंदगी पे मेरी भी अब मेरा नहीं है
अब ख़ुद-कुशी अगर की तो चार जन मरेंगे
Naaz ishq
काश इक बार फिर मोहब्बत हो
इस दफ़ा पर मेरी तरफ़ से नहीं
Naaz ishq
अगर हटती निगाहें उस के चेहरे से
मैं साड़ी पहनी तो तब देखता उस की
Naaz ishq