Amanpreet singh

Amanpreet singh

@Poet_preet

Amanpreet singh shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Amanpreet singh's shayari and don't forget to save your favorite ones.

Followers

6

Content

117

Likes

90

Shayari
Audios
  • Sher
  • Ghazal
मोहब्बत तुझ
में अब जादू नहीं है
किसी के हाथ में चाक़ू नहीं है
Read Full
Amanpreet singh
वो पहाड़ों से यूँँ नीचे देखता है
जैसे अब भी बाबा नीचे बैठे होंगे
Amanpreet singh
देखने लग गया था वापसी जाता सब को
आख़िरी बच्चा था मैं पेड़ को छूने वाला
Amanpreet singh
आँखों में बस गया वही मंज़र
बातें जो सुन के आ रहा था मैं
Amanpreet singh
क्या पता कब ख़राब हो जाऊॅं
कल को मैं भी हिजाब हो जाऊॅं

आप के साथ ठीक लगता है
आप जैसा ख़राब हो जाऊॅं
Read Full
Amanpreet singh
ख़ुशी की बू सी आती है ये मेरे में
उदासी काम आती है अकेले में
Amanpreet singh
भला उन बच्चों को अच्छा लगेगा क्या
जिन्हें तब दुनिया दिखती थी ग़ुबारे में
Amanpreet singh
मोहब्बत की ज़मीं पे फूल रख कर
चला मैं ज़िंदगी की धूल रख कर

लगा है बे-वफ़ाई करने वो अब
मुझे इस इश्क़ में मशग़ूल रख कर
Read Full
Amanpreet singh
नई नस्लें नई बातें नया सब कुछ
सभी पर इश्क़ में बर्बाद वैसे ही
Amanpreet singh
आदतन तुझ को भी छोड़ सकता हूँ मैं
घर बचाने को छत तोड़ सकता हूँ मैं
Amanpreet singh
सभी की मानने से घर का सब कुछ टूट जाता है
मोहब्बत में नकल करने से पेपर छूट जाता है
Amanpreet singh
दिल लगाया गया ख़ुद लगा ही नहीं
दिल से मेरा कभी वो हुआ ही नहीं

तारे सबके चमकते रहे रात भर
पर मेरे घर का तारा दिखा ही नहीं
Read Full
Amanpreet singh
होंठ उस के दिखे थे मुझे एक दिन
ज़िंदगी तब से लब लग रही है मुझे
Amanpreet singh
कि ग़ुर्बत ने तमाचा मारा मुँह पर फिर
मोहब्बत करने वाला था मैं पागल सा
Amanpreet singh
नई नस्लें भी तो बर्बाद होंगी
नई नस्लों को भी तो इश्क़ होगा
Amanpreet singh
लटक जाना ही अब बेहतर रहेगा वास्ते मेरे
गुज़ारा इश्क़ में मेरा कि अब होगा नहीं शायद
Amanpreet singh
हमारे शे'र उस की याद में गुज़रे
कि हम तो उम्र भर इरशाद में गुज़रे

ख़ुदा ये ज़िंदगी किस काम की है फिर
अगर ये वाली भी फ़रियाद में गुज़रे
Read Full
Amanpreet singh
हमारे बा'द फिर उस की नज़र में कौन था वैसे
हमारे बा'द चश्मों से नमी किस ने निकाली थी
Amanpreet singh
हमेशा वो बिछड़ जाने की बातें करता रहता था
बिछड़ जाने पे जो रो के दिखाए जा रहा है अब
Amanpreet singh
हमारे साथ होकर ग़ैरों से मिलने जो जाती थी
मुझे ये पूछना था सिलसिला क्या अब भी वैसा है?
Amanpreet singh

LOAD MORE