Prashant Sitapuri

Prashant Sitapuri

@Prashantsitapuri

Prashant Sitapuri shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Prashant Sitapuri's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
एक एहसान कीजिए साहब
मुझ को हैरान कीजिए साहब

आप सरकारी महक
में से हैं
कुछ परेशान कीजिए साहब
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Prashant Sitapuri
आप के साथ रहा जो भी रहा लुत्फ़ ए हयात
आप के बा'द तो मुश्किल से गुज़ारी ही गई
Prashant Sitapuri
कट जाता फिर ख़ुशी से उदासी का ये सफ़र
होते अगर हयात में तुम जैसे दोस्त और
Prashant Sitapuri
दिन गुज़ारा है कहीं रात कहीं शाम यहाँ
बेवफ़ाओं ने किया इश्क़ को बदनाम यहाँ
Prashant Sitapuri
खोलता जब हूँ कभी उस की पुरानी चैटें
याद आ जाता है कुछ और हँसी आती है
Prashant Sitapuri
कौन सी बात पे रो के मैं करूँँ बात रफ़ू
छोड़ जाने का सबब कुछ तो बताए जाते
Prashant Sitapuri
उस का आना है कि जैसे किसी स्टेशन पर
रेल कुछ देर को आती है चली जाती है
Prashant Sitapuri
आप से तो कोई उम्मीद नहीं है लेकिन
जो वफ़ादार है इंसान वफ़ा चाहेगा
Prashant Sitapuri
हैं उल्फ़त में कई इन'आम लेकिन
वफ़ादारी से बेहतर कुछ नहीं है
Prashant Sitapuri
दुनिया जो देखनी है तो मुझ को ही देख लो
अच्छा है आदमी जो बुरा भी उसी के साथ
Prashant Sitapuri
अभी मुमकिन है मुझ को रोक ले तू
अभी सीधा है रस्ता वापसी का
Prashant Sitapuri
मेरे हाथों में अपना हाथ तो दे
बदल जाएगी क़िस्मत साथ तो दे
Prashant Sitapuri
क़ुर्बान क्या करेंगे भला इस हयात पर
अपना पराया करते हैं जो बात बात पर

हर हादसे से लड़ने का पैदा करें जुनून
क़ाबू नहीं है अपना किसी हादसात पर
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Prashant Sitapuri
हासिल नहीं है जंग किसी भी फ़साद का
हासिल भी है अगर तो बराबर की जंग हो
Prashant Sitapuri
कुछ काम लीजिए न गुलाबी लबों से आप
मेरा सुझाव है कि मुझे प्यार कीजिए
Prashant Sitapuri
दिलों की डोर का साथी ये कैसा खेल है जिस
में
किसी की मैं मोहब्बत हूँ कोई मेरी मोहब्बत है
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Prashant Sitapuri
अच्छी तरह से है मुझे दुनिया का इल्म, सो
क्या काम है जो आप यूँँ अपना बना रहे
Prashant Sitapuri
ता'उम्र जिन के वास्ते उलफ़त बनायी है
वो लोग मेरे हिस्से में धोखा बना रहे
Prashant Sitapuri
मुझ को बनाना हू-ब-हू मुमकिन नहीं है अब
तुम जो बना रहे मेरा चरबा बना रहे
Prashant Sitapuri
मुझ सेे मिली तो सारा गुमाँ ख़ाक हो गया
जलते रहे चराग़ हवा कुछ न कर सकी
Prashant Sitapuri

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