Prashant Rao chourase

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prashant chourase shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in prashant chourase's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
लाख हो बद-तमीज़ वो लड़की
जान तो ख़ैर जान होती है
Prashant Rao chourase
जौन बनना तो अब न मुमकिन है
और दिखावा तो बेवक़ूफ़ है
Prashant Rao chourase
ख़ुदा ने ही किस्मत बनाई हमारी
हमारे ही हाथों में उल्फ़त नहीं है
Prashant Rao chourase
है ग़ज़ल में पहले मतला और मक़्ता बा'द में
या'नी उस का नाम पहले और मेरा बा'द में
Prashant Rao chourase
निशाँ गर्दन पे दे सकती थी तुम मुझ को
ज़रूरत थी नहीं ख़ंजर चलाने की
Prashant Rao chourase
ये मेरे बस की नहीं है बात तेरा दोस्त बनना
तू मुहब्बत थी मुहब्बत है मुहब्बत ही रहेगी
Prashant Rao chourase
तुम्हारा ख़्वाब तो पूरा हो कम से कम
हमारा ज़ख़्म तो भरने नहीं वाला
Prashant Rao chourase
किसी की नहीं तकता मैं राह क्योंकि
किसी ने मुझे ख़त लिखे ही नहीं
Prashant Rao chourase
है सब कुछ गाड़ी बँगला नौकर लेकिन
अब रिश्तों में से अपनापन ग़ायब है
Prashant Rao chourase
बस अपनी रूह को आराम देने के लिए हम ने
न जाने कितने दर छोड़े हैं कितने जिस्म छाने हैं
Prashant Rao chourase
हवस ने ज़िंदा रक्खा है रक़ीबों को
जो होता प्यार कब के मर गए होते
Prashant Rao chourase
इश्क़ में बर्बाद हम जो न होते तो
ये कहानी ख़ूब-सूरत नहीं होती
Prashant Rao chourase
तुम्हारे दिल में कोई ग़म नहीं लेकिन
हमारे सामने तो झूठ मत बोलो
Prashant Rao chourase
जो दिन में छटपताए तो पिता का दर्द समझे
दो रुपए ख़ुद कमाए तो पिता का दर्द समझे
Prashant Rao chourase
उड़ाता वो धुएँ को ख़ुद ही बादल हो गया आशिक़
दुआ करता रहा फिर सच में पागल हो गया आशिक़

वफ़ा कर के मुहब्बत में मिला ही क्या बताऊँ मैं
उसी का ज़िक्र फिर से और घाइल हो गया आशिक़
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Prashant Rao chourase
हमारा हाल हम दोनों को है मालूम लेकिन दोस्त
वो कहती है मैं अच्छी हूँ मैं कहता हूँ मैं अच्छा हूँ
Prashant Rao chourase
ये उदासी कम न होगी मेरे कमरे की मगर
जो जहाँ पर भी रखा है आप रहने दीजिए
Prashant Rao chourase
कभी तू भी तो जाँ मिरा ख़याल कर
मैं ज़िन्दा हूँ या मर गया सवाल कर

नहीं हुआ किसी का मैं मलाल है
तू भी नहीं हुआ मिरा मलाल कर
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Prashant Rao chourase
मुझे पहले समझ फिर कोई अंदाज़ा लगा दोस्त
नहीं समझा तो ख़ुद के आगे आईना लगा दोस्त

बड़ी रफ़्तार से निकला है मेरे दिल से इक शख़्स
नहीं वापस वो आने वाला दरवाज़ा लगा दोस्त
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Prashant Rao chourase
मुहब्बत रास आ जाए हमें ये सोच कर हम ने
जिसे भी चाहा है पहली मुहब्बत की तरह चाहा
Prashant Rao chourase
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