Shajar Abbas

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@ShajarAbbas8

Shajar Abbas shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Shajar Abbas's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
  • Nazm
सामने आँखों के ये कैसी कहानी आ गई
इश्क़ के ख़ामोश दरिया में रवानी आ गई

बारगाह-ए-रब में यूसुफ़ हो गए महव-ए-दु'आ
दफ़अ'''तन बूढ़ी ज़ुलैख़ा पर जवानी आ गई
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Shajar Abbas
मुस्कुराओ ख़ुशी का लम्हा है
अब नहीं तुम दुखों के मारे हुए

हाथ में हाथ दे के उस ने कहा
लो 'शजर' आज हम तुम्हारे हुए
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Shajar Abbas
तस्लीम कैसे कर लूँ किसी को तेरी जगह
दुनिया में तेरा कोई भी नेमुल-बदल नहीं
Shajar Abbas
उज़्न में कौकब को पहने माह पर टाके क़मर
उस को कहना सब ये उस के ज़ेवरात-ए-हुस्न हैं
Shajar Abbas
यक़ीं है हम भी किसी रोज़ तुझ पे शहर-ए-सुख़न
जनाब-ए-मीर की मानिंद ग़ालिब आएँगे
Shajar Abbas
दिल में तेरे अगर है हुब्ब-ए-वतन
जश्न-ए-जमहूरियत में शामिल हो
Shajar Abbas
छीन ली है मुझ सेे तेरे हिज्र ने दानिशवरी
अब मैं ख़ुद से पूछता हूँ आख़िरश मैं कौन हूँ
Shajar Abbas
शाख़-ए-शजर पे गुल के बदन चाक हो गए
इस मौसम-ए-ख़िज़ाँ में चमन ख़ाक हो गए

सद
में गुज़र रहे हैं दिल-ए-बाग़बान पर
मंज़र जो ख़ुश-नुमा थे वो ग़म-नाक हो गए
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Shajar Abbas
अहल-ए-नज़र दें मिल के मिरे हौसले की दाद
परवाज़ कर रहा हूँ बिना बाल-ओ-पर के मैं
Shajar Abbas
वक़्त-ए-मुश्किल में हूँ इमदाद करो कुछ मेरी
उम्र भर आप का एहसान नहीं भूलूँगा
Shajar Abbas
ज़ीस्त जब मौत की आग़ोश में सो जाएगी
हर हक़ीक़त मिरी इक वाक़िआ' हो जाएगी
Shajar Abbas
दिल-ए-नादाँ इसे तस्लीम कर ले
ग़म-ए-हस्ती रफ़ीक़-ए-ज़िंदगी है
Shajar Abbas
हाँ हमीं हैं वो बद-नसीब शजर
जिस का कोई नहीं रफ़ीक़-ए-सफ़र
Shajar Abbas
मुसलसल सोचते हैं हम-सफ़र में
तलाश-ए-हम-सफ़र कब पूरी होगी
Shajar Abbas
बाँटने ग़म कोई नहीं आया
हज़ उठाने हज़ार आए हैं
Shajar Abbas
आप को हम कलाम करना है
अपना क़िस्सा तमाम करना है

हम ने सोचा है अब मुहब्बत में
क़ैस के जैसा नाम करना है
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Shajar Abbas
सोचते हैं कि नेक काम करें
आप का दिल से एहतिराम करें

तुम को अपने गले लगाएँ शजर
ज़िंदगानी तुम्हारे नाम करें
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Shajar Abbas
रौनक़-ए-शहर-ए-सुख़न ताज़ा सुख़न-दान हैं हम
मीर-ओ-ग़ालिब की तरह साहिब-ए-दीवान हैं हम
Shajar Abbas
आतिश-ए-शौक़ यूँँ निराले हैं
हम अलग ही मिज़ाज वाले हैं

अक़रिबा दोस्तों की सूरत में
साँप ख़ुद आस्तीं में पाले हैं
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Shajar Abbas
ख़ुद बे-वफ़ाई कर के सितमगर ने इश्क़ में
इल्ज़ाम-ए-बे-वफ़ाई मिरे सर पे रख दिया
Shajar Abbas

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