Shivam chaubey

Shivam chaubey

@Shivamchaubey

Shivam chaubey shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Shivam chaubey's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
जैसे कि फूल शाख के और चाँद ईद के
हम भी तो साथ-साथ हैं पर उस तरह नहीं
Shivam chaubey
सूखने की हद तलक अब आ गए दोनों कुएँ
इस क़दर पानी लगा है रुख़्सती के काम में
Shivam chaubey
ज़हर होता है सबके जिस्मों में
नब्ज़ यूँँ ही हरी नहीं होती
Shivam chaubey
आओ कि दूसरी किसी कश्ती का रुख़ करें
इस नाव में कुछ भी नहीं आज़ार के सिवा
Shivam chaubey
जाने किस का ही मुंतज़िर हूँ मैं
कौन है जो कभी नहीं आता
Shivam chaubey
बादल पेड़ परिंदे जैसे रहते हैं
इस जंगल में हम भी वैसे रहते हैं

उस के दिल में रह कर भी उकताए थे
सोचो हम दुनिया में कैसे रहते हैं
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Shivam chaubey
हमारी ज़िंदगी का फ़लसफ़ा क्या
फ़क़त इक है से था तक का सफ़र है
Shivam chaubey
उस ने हमारे चेहरे पे रक्खा यूँ अपना हाथ
जैसे कोई किताब पे इक ऑटोग्राफ़ दे
Shivam chaubey
मुझे मालूम है आगे का क़िस्सा
मैं शक़्ल-ए-ख़ामुशी पहचानता हूँ
Shivam chaubey
उस के हिज्र का इक लम्हा जो मैं ने बरसों बरस जिया
उस ने तो बस तागा खींचा मैं ने खूब उधेड़ा दुख
Shivam chaubey
एक क़िस्सा जो मुकम्मल होते होते रह गया
एक लड़की ने किताब आधी पढ़ी और छोड़ दी
Shivam chaubey
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सोच रहा हूँ उस को भी एक फ़ोन करूँँ
जिस सेे कहने को कोई भी बात नहीं
Shivam chaubey
हम सेे ज़ंजीर तक नहीं टूटी
कैसे रस्म ओ रिवाज़ टूटेंगे
Shivam chaubey
अपनी कमी के वास्ते दुनिया को दोष दें
माना कि वाहियात हैं पर उस तरह नहीं
Shivam chaubey
अच्छी खासी यारी है हम दोनों में
लेकिन किल्लत ये है कि बस यारी है
Shivam chaubey
यार हमारे दिल की जलन ज़ियादा है
तुम सिगरेट पे यूँँ ही लेक्चर देती हो
Shivam chaubey
शिकायत हम भी करना चाहते हैं
मगर ये ज़ब्त हावी हो रहा है
Shivam chaubey
साथ में रकीबों की बद्दुआएँ चलती हैं
मैं दिया जलाता हूँ तो हवाएँ चलती हैं

मैं तो सीधे रस्ते पे चल के भी अकेला हूँ
मेरी चाहतें अक्सर दाएँ बाएँ चलती हैं
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Shivam chaubey
एक समुंदर की आँख नीली है एक बादल का रंग काला है
क्या उदासी है उस मुसव्विर की कितनी शिद्दत से रंग डाला है

वो अपने सब दुखों पे हँसता है मैं अपनी हर ख़ुशी में रोता हूँ
उस के सीने पे फूल खिलते हैं मेरी आँखों में कैसा छाला है
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Shivam chaubey
तेरे आने से कुछ नहीं होगा
मन तो बहलेगा ग़म बहाली से
Shivam chaubey

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