Kumar Prem Pinaki

Kumar Prem Pinaki

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Kumar Prem Pinaki shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Kumar Prem Pinaki's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
इतने चेहरे हैं दुनिया में
कोई हर चेहरे पर मरता क्या

तुम सेे बेहतर यूँँ न सोचा था
बस तुम पर मरता करता क्या
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Kumar Prem Pinaki
इस दुनिया में जीते जी
सारी दुनिया हारी है

इक फाॅंसी के फंदे ने
कितनी लाश सॅंभाली है
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Kumar Prem Pinaki
इक सफ़र ऐसा है जिस
में
मंज़िल की कोई बात नहीं

इक सफ़र ऐसा है जिस
में
मिलने की कोई रात नहीं
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Kumar Prem Pinaki
आइने का सौदा कर
मुफ़लिसी में मर गया

सब मुखौटे बेच कर
हर कोई सँवर गया
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Kumar Prem Pinaki
ये दुनिया कितनी प्यारी है
इस
में ही दुनिया सारी है

जीता है उस ने कितना कुछ
इक शर्त अभी भी हारी है
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Kumar Prem Pinaki
पहले हिम्मत बाँधी फिर
हिम्मत से दो चार किया

क़िस्मत की ऑंधी आई
हार नहीं स्वीकार किया
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Kumar Prem Pinaki
प्रेम जब मन में हुआ
भेद सारे औन हैं

कर रहे हैं बात दिल
शब्द सारे मौन हैं
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Kumar Prem Pinaki
जब शीश कटे फिर धड़ ये लड़े
लड़ते रहे उन हैवानों से

बाज़ी क्यूँ फिर हारी हम ने
ये पूछो तुम ग़द्दारों से
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Kumar Prem Pinaki
जितना जीवन तुम जीते हो
हम ने उतने ही काटे हैं

तेज़ तपिश से तुम डरते हो
अंगारों से यहाँ नाते हैं
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Kumar Prem Pinaki
जिस दुनिया को हम जीते हैं
कोई क्या ऐसे जीता है

गर जीता है तो सोचो फिर
मसअला कितना संजीदा है
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Kumar Prem Pinaki
जीवन में इतनी बाधाएँ
हर बाधाएँ हम ढोए हैं

दिन का जगना तो लाज़िम है
रातों के सपने खोए हैं
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Kumar Prem Pinaki
यादें ही देखो पूरी हैं
रूहों के जलने के लिए

धोखे यहाँ ज़रूरी हैं
यारों सॅंभलने के लिए
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Kumar Prem Pinaki
टूटे हुए को ही यहाँ
जुड़ने की चाहत होती है

सागर को मिलने में ही कब
दरिया की आदत होती है
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Kumar Prem Pinaki
पत्थर से मजबूत इरादे
टूटेंगे तो मिट्टी होंगे

ख़ुद की शर्तों पे मरते हैं
सोचो कितने ज़िद्दी होंगे
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Kumar Prem Pinaki
किस का कितना हिस्सा है
किस ने कितना पाया है

बातें जो अनसुलझी हैं
सब भोले की माया है
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Kumar Prem Pinaki
मेरी अपनी कहानी है
मेरे अपने क़िस्से हैं

दर्द नहीं इक जैसा है
उस के भी कई हिस्से हैं
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Kumar Prem Pinaki
मन जब मौन हो जाता है
ख़ुद में कौन हो जाता है
Kumar Prem Pinaki
दरिया इतना जो पानी ले कर बहता है
भीतर कोई कहानी ले कर बहता है
Kumar Prem Pinaki
मन में पहले सौ युद्ध हुए
जीते उन सेे तब बुद्ध हुए
Kumar Prem Pinaki
संघर्ष बिना जो जीता है
वो जीता कोई ख़ास नहीं

दुनिया में कोई राम नहीं
जिस का अपना वनवास नहीं
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Kumar Prem Pinaki

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