Abhishek shukla

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@abhishek-shukla

Abhishek shukla shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Abhishek shukla's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
सियाह रात की सरहद के पार ले गया है
अजीब ख़्वाब था आँखें उतार ले गया है

है अब जो ख़ल्क़ में मजनूँ के नाम से मशहूर
वो मेरी ज़ात से वहशत उधार ले गया है
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शब भर इक आवाज़ बनाई सुब्ह हुई तो चीख़ पड़े
रोज़ का इक मामूल है अब तो ख़्वाब-ज़दा हम लोगों का
Abhishek shukla
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उस से कहना की धुआँ देखने लाएक़ होगा
आग पहने हुए मैं जाऊँगा पानी की तरफ़
Abhishek shukla
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पा ए उम्मीद प रक्खे हुए सर हैं हम लोग
हैं न होने के बराबर ही मगर हैं हम लोग

तू ने बरता ही नहीं ठीक से हम को ऐ दोस्त
ऐब लगते हैं ब-ज़ाहिर प हुनर हैं हम लोग
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Abhishek shukla
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ये इत्तिफ़ाक़ ज़रूरी नहीं दोबारा हो
मैं तुम को सोचने बैठूँ तो ज़ख़्म भर जाएँ
Abhishek shukla
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सहर की आस लगाए हुए हैं वो कि जिन्हें
कमान-ए-शब से चले तीर की ख़बर भी नहीं
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मैं अपने चारों तरफ़ हूँ और इस तरह का हुजूम
अजीब किस्म की तन्हाई साथ लाता है
Abhishek shukla
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न उस ने हाथ लगाया न उस ने बातें कीं
पड़े पड़े यूँँ ही ख़ुद में ख़राब हो गए हम
Abhishek shukla
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चलते हुए मुझ में कहीं ठहरा हुआ तू है
रस्ता नहीं मंज़िल नहीं अच्छा हुआ तू है
Abhishek shukla
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ये जो हम तख़्लीक़-ए-जहान-ए-नौ में लगे हैं पागल हैं
दूर से हम को देखने वाले हाथ बटा हम लोगों का
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कभी कभी तो ये वहशत भी हम पे गुज़री है
कि दिल के साथ ही देखा है डूबना शब का
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मैं चोट कर तो रहा हूँ हवा के माथे पर
मज़ा तो जब था कि कोई निशान भी पड़ता
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मैं सोचता हूँ बहुत ज़िंदगी के बारे में
ये ज़िंदगी भी मुझे सोच कर न रह जाए
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सफ़र के बा'द भी ज़ौक़-ए-सफ़र न रह जाए
ख़याल ओ ख़्वाब में अब के भी घर न रह जाए
Abhishek shukla
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तेरी आँखों के लिए इतनी सज़ा काफ़ी है
आज की रात मुझे ख़्वाब में रोता हुआ देख
Abhishek shukla
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वहाँ पहले ही आवाज़ें बहुत थीं
सो मैं ने चुप कराया ख़ामुशी को
Abhishek shukla
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वो एक दिन जो तुझे सोचने में गुज़रा था
तमाम उम्र उसी दिन की तर्जुमानी है
Abhishek shukla
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ये इम्तियाज़ ज़रूरी है अब इबादत में
वही दुआ जो नज़र कर रही है लब भी करें
Abhishek shukla
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ये जो दुनिया है इसे इतनी इजाज़त कब है
हम पे अपनी ही किसी बात का ग़ुस्सा उतरा
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किसी से झूठी मुहब्बत किसी से सच्चा बैर
मैं कर तो सकता हूँ ये सब मगर नहीं करूँँगा
Abhishek shukla
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