Ahmad Faraz

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@ahmad-faraz

Ahmad Faraz shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Ahmad Faraz's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
  • Nazm
वो ख़ार ख़ार है शाख़-ए-गुलाब की मानिंद
मैं ज़ख़्म ज़ख़्म हूँ फिर भी गले लगाऊँ उसे
Ahmad Faraz
हम तेरे शौक़ में यूँँ ख़ुद को गँवा बैठे हैं
जैसे बच्चे किसी त्यौहार में गुम हो जाएँ
Ahmad Faraz
जाने किस हाल में हम हैं कि हमें देख के लोग
एक पल के लिए रुकते हैं गुज़र जाते हैं
Ahmad Faraz
हम दोहरी अज़िय्यत के गिरफ़्तार मुसाफ़िर
पाँव भी हैं शल शौक़-ए-सफ़र भी नहीं जाता
Ahmad Faraz
आवाज़ दे के छुप गई हर बार ज़िंदगी
हम ऐसे सादा-दिल थे कि हर बार आ गए
Ahmad Faraz
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तू अपनी शीशागरी का हुनर न कर ज़ाया'
मैं आइना हूँ मुझे टूटने की आदत है
Ahmad Faraz
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उस ने नज़र नज़र में ही ऐसे भले सुख़न कहे
मैं ने तो उस के पाँव में सारा कलाम रख दिया
Ahmad Faraz
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उसे 'फ़राज़' अगर दुख न था बिछड़ने का
तो क्यूँँ वो दूर तलक देखता रहा मुझ को
Ahmad Faraz
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अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिलें
जिस तरह सूखे हुए फूल किताबों में मिलें
Ahmad Faraz
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दिल को तेरी चाहत पे भरोसा भी बहुत है
और तुझ से बिछड़ जाने का डर भी नहीं जाता
Ahmad Faraz
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मैं क्या कहूँ के मुझे सब्र क्यूँँ नहीं आता
मैं क्या करूँँ के तुझे देखने की आदत है
Ahmad Faraz
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इक ये भी तो अंदाज़-ए-इलाज-ए-ग़म-ए-जाँ है
ऐ चारागरो दर्द बढ़ा क्यूँँ नहीं देते
Ahmad Faraz
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कौन ताक़ों पे रहा कौन सर-ए-राहगुज़र
शहर के सारे चराग़ों को हवा जानती है
Ahmad Faraz
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सुना है लोग उसे आँख भर के देखते हैं
सो उस के शहर में कुछ दिन ठहर के देखते हैं
Ahmad Faraz
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किस किस को बताएँगे जुदाई का सबब हम
तू मुझ से ख़फ़ा है तो ज़माने के लिए आ
Ahmad Faraz
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हम तिरे शौक़ में यूँँ ख़ुद को गँवा बैठे हैं
जैसे बच्चे किसी त्यौहार में गुम हो जाएँ
Ahmad Faraz
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मुझे कहता है झूठी हैं तेरी बेकार सी बातें फ़राज़
मगर लगता है वो मेरी उन्हीं बातों पे मरता है
Ahmad Faraz
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न तुझ को मात हुई है न मुझ को मात हुई
सो अब के दोनों ही चालें बदल के देखते हैं
Ahmad Faraz
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वो जिस घमंड से बिछड़ा गिला तो इस का है
कि सारी बात मोहब्बत में रख-रखाव की थी
Ahmad Faraz
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माना के मोहब्बत का छुपाना है मोहब्बत
चुपके से किसी रोज़ जताने के लिए आ
Ahmad Faraz
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