Anmol Mishra

Anmol Mishra

@anmolmishra214

Anmol Mishra shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Anmol Mishra's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
  • Nazm
ख़ामोशियाँ ग़ुलाम बनाती हैं शोर को
शब इश्क़ के उसूल सिखाती चकोर को

दिन भर तो मेरे यार मेरे यार थे बहुत
पर शाम को गया जो वो लौटा न भोर को
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Anmol Mishra
क़ीमती स्याही भरी जिस जिस क़लम में आँसुओं की
वक़्त पे वो भूल बैठे ये ग़लत ये ठीक सा है

बोलते थे बोल जो ता'रीफ़ में हर रोज़ मेरी
एक दिन वो बोल बैठे आप की ता'रीफ़ क्या है
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Anmol Mishra
फटे मुक़द्दर पे रख के खद्दर हुई सिकंदर उदास नस्लें
ज़मीन फाड़ी निचोड़े बादल बनाए सागर उदास नस्लें

सुलगते ख़्वाबों की राख ले कर गढ़े थे पुतले जो टेढ़े मेढ़े
हँसी के मंतर से जान फूँके उन्हीं के अंदर उदास नस्लें
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Anmol Mishra
जो जो जितना पास था मेरे वो वो उतना दूर हुआ
उस सेे कहा इक छोटा क़िस्सा अगले ही दिन मशहूर हुआ

किसी सहारे की चाहत में जब जब टूटे रातों को
ख़ुद के कंधे पर सिर रखना फिर रोना मंज़ूर हुआ
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Anmol Mishra
तमाम रातें सुकून सारा चुरा के जानाँ कहाँँ को चल दी
सुनो शब-ए-वस्ल है हमारी जगा के जानाँ कहाँँ को चल दी

हमारे पैरों पे पैर रख के खड़ी हुई थी गले लगाने
तुम्हारे पैरों लगी महावर लगा के जानाँ कहाँँ को चल दी
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Anmol Mishra
महकते पन्नों की भीनी ख़ुशबू नशा चढ़ाए अलग तरह का
जहाँँ में जितने शराब-ख़ाने बनाओ सारे किताबख़ाने
Anmol Mishra
एक लड़की थी जिसे पगली कहा करता था तू
एक लड़की याद रख बस एक पगली भूल जा
Anmol Mishra
सादे काग़ज़ जैसा जीवन जीवन जैसा नइँ होता
कुछ न सही तो टेढ़ी मेढ़ी खींच लकीरें काग़ज़ पर
Anmol Mishra
कागज़ों की कश्ती पर दिल के ज़ख़्म ढोते हैं
हाथ लगती चीज़ों को हाथ लगते खोते हैं

एक दिन अँधेरे ने आके मुझ सेे बोला ये
जो उदास रहते नइँ वो उदास होते हैं
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Anmol Mishra
दर्द वहशत और हिजरत से लबालब हों घड़े जो
लाओ रख दो सामने मैं आज फिर उलझा हुआ हूँ
Anmol Mishra
बोलते थे बोल जो ता'रीफ़ में हर रोज़ मेरी
एक दिन वो बोल बैठे आप की ता'रीफ़ क्या है
Anmol Mishra
जो टूट बैठे थकन के मारे जो हार बैठे हैं आधे रस्ते
सुनो ऐ मंज़िल ज़रा बिचारों के पास आओ गले लगाओ
Anmol Mishra
कट गईं वो भी पतंगें जिन के माँझे तेज़ थे
तुम भी ज़्यादा उड़ रहे हो हश्र अपना सोच लो
Anmol Mishra
ये हुनर मेरे भी अंदर आ गया है दोस्तों
दिल पे लगती बात को बस मुस्कुरा कर टाल दूँ
Anmol Mishra
किसी को रात में सर पर मुयस्सर छत नहीं होती
किसी छत के भी सर पे छत बनी होती है क्या समझे
Anmol Mishra
तुम्हें वो मिल नहीं पाईं उन्हें तुम मिल नहीं पाए
कन्हैया साथ में क्यूँ फिर सदा तस्वीर दिखती है
Anmol Mishra
आज जवानी ठोकर खाकर गिरती है
बूढ़े कंधे बोझ उठाए चलते हैं
Anmol Mishra
ख़ुद ही मारो ख़ुद ही ख़ुद में मर जाओ
ख़ुद की लाशें ख़ुद कंधों पर ढोते नइंँ
Anmol Mishra
ये दोस्त दुनिया ये जालसाज़ी क़दम क़दम पर करे है ठोकर
तेरा सुदामा गिरा कन्हैया इसे उठाओ गले लगाओ
Anmol Mishra
धुएँ की चाह में पागल हरी पत्ती जलाते हो
समझ पाए न इल्मों को तो तुम पुस्ती जलाते हो

बहुत नादान हो तुम भी तुम्हारी हरकतें क्या कम
उजाले को मिटाने के लिए बत्ती जलाते हो
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Anmol Mishra

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