Ansar Etavi

Ansar Etavi

@ansar_ethvi

Ansar Ethvi shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Ansar Ethvi's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
  • Nazm
वो दोस्त बनेंगे न कभी यार बनेंगे
जो लोग मुख़ालिफ़ के तरफ़दार बनेंगे

दस्तार जो ख़ुद रखते हैं क़दमों में किसी के
मैं कैसे समझ लूँ कि वो सरदार बनेंगे
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Ansar Etavi
जिसे देखा नहीं उस के सहारे साथ चलते हैं
मैं दरिया में उतरता हूँ किनारे साथ चलते हैं

तुझे इक ख़्वाब की ताबीर से लगने लगा है डर
यहाँ हर रोज़ ऐसे ही ख़सारे साथ चलते हैं
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Ansar Etavi
कुछ कम बनाएँगे हाँ मगर हम बनाएँगे
गर्दिश में काम आएँ जो हमदम बनाएँगे
Ansar Etavi
वो जिन का तेज़ हवाओं से दोस्ताना था
उन्हीं के सामने हम को दिया जलाना था

तमाम राज़ मिरे दुश्मनों को सौंप आया
वो जिस का रोज़ मिरे घर में आना जाना था
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Ansar Etavi
वा'दा कभी न अपना निभाया करेंगे लोग
अब मुश्किलों में काम न आया करेंगे लोग

सूरज से जिन का हो न कभी कोई इख़्तिलाफ़
तुम सोचते हो धूप में साया करेंगे लोग
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Ansar Etavi
बचे ही अब कहाँ आँसू जो ग़म का बोझ हल्का हो
तपिश सूरज की पड़ती है तो दरिया सूख जाते हैं
Ansar Etavi
ताइर ये समझता है कि इमदाद करेगा
सय्याद से ही शिकवा-ए-सय्याद करेगा

उस शख़्स से इतनी सी शनासाई है मेरी
तकलीफ़ में होगा वो तभी याद करेगा
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Ansar Etavi
जिस को वीरानी ने रक्खा हुआ असीरी में
उस को गुलशन में भी सहरा दिखाई देता है
Ansar Etavi
जहाँ हर शाम पक्षी को शजर ही याद आता है
मैं दफ़्तर से निकलता हूँ तो घर ही याद आता है

बहुत करते हैं हम कोशिश मगर ये हो नहीं पाता
जिसे हम भूलना चाहें वो अक्सर याद आता है
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Ansar Etavi
मैं जैसा चाहूँ ये क़िस्मत कभी वैसा नहीं रखती
बहुत खिलवाड़ करती है कभी अच्छा नहीं रखती

फटा सा नोट हूँ हर बार तो मैं चल नहीं सकता
दवा अपना असर हर बार के जैसा नहीं रखती
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Ansar Etavi
जिसे तुम अपना समझ रहे हो उसी को दिल से लगा रहे हो
अगर वो फिर भी ना हो तुम्हारा बताओ मुझ को तो क्या करोगे

वो पास आतिश के ही खड़ा है जिसे मुहाफ़िज़ समझ लिया है
करे जो आँधी को इक इशारा बताओ मुझ को तो क्या करोगे
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Ansar Etavi
बीच नफ़रत में सब को ढकेला गया
खेल हम सब से कुछ ऐसा खेला गया

सब ने मारा है मिल कर उसी को यहाँ
जो भी सड़कों पे अबतक अकेला गया
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Ansar Etavi
मुझ को किसी की ऐसी फ़ितरत नहीं पसंद
चीज़ों की जिन को सच में क़ीमत नहीं पसंद

मुझ को मुख़ालिफ़ों की रंजिश तो है क़ुबूल
लेकिन मुनाफ़िक़ों की क़ुर्बत नहीं पसंद
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Ansar Etavi
सच्चाई है कि ऐसे भी मंज़र मिले मुझे
जब प्यास मिट गई तो समुंदर मिले मुझे

हाथों को जिन के चूमा है अपना जिसे कहा
इक दिन उन्हीं के हाथों में ख़ंजर मिले मुझे

अंसार एटवी
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Ansar Etavi
मुझ को मुख़ालिफ़ों की रंजिश तो है क़ुबूल
लेकिन मुनाफ़िक़ों की क़ुर्बत नहीं पसंद
Ansar Etavi
लहरों ने टूटी कश्ती को कमतर समझ लिया
अच्छा हुआ कि कश्ती ने तेवर समझ लिया

जिस दाम जिस ने चाहा उसी दाम में रखा
मुझ को किसी गरीब का ज़ेवर समझ लिया
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Ansar Etavi
जो भी कहना है तो मैदान में आना होगा
ज़िंदा रहना है तो मैदान में आना होगा

पीछे चलने से तो पहचान सिमट जाती है
आगे रहना है तो मैदान में आना होगा
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Ansar Etavi
उस को जब ख़त भेजेंगे
लिखकर लानत भेजेंगे

हाकिम सचमुच हिटलर है
कर के हिम्मत भेजेंगे
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Ansar Etavi
हर कोई कब पाने की चाहत करता है
पाने वाला ही अक्सर शिद्दत करता है

तुम उस सेे आज़ादी की बातें करते हो
जो ज़ंजीरों की काफ़ी इज़्ज़त करता है
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Ansar Etavi
किसी भी शख़्स के झूठे दिलासे में नहीं आती
कहानी हो अगर लंबी तराशे में नहीं आती

जहाँ में अब कहाँ कोई जो मजनूँ की तरह चाहे
मोहब्बत इस लिए भी अब तमाशे में नहीं आती
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