Divy Kamaldhwaj

Divy Kamaldhwaj

@divykdhwaj

Divy Kamaldhwaj shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Divy Kamaldhwaj's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
मैं ने भी मुस्कुरा के मेरे घर से ली विदा
माँ ने भी अपने आँसू छलकने नहीं दिए
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रंग को मलने से ही रौनक़ नइँ आती
हर इक नुस्ख़ा यार किताबी होता है

देखो शर्माना भी बहुत ज़रूरी है
शर्माने से रंग गुलाबी होता है
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अभी तो शे'र कहने हैं बहुत से
अभी तो उम्र ही क्या है हमारी
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फ़क़त क़िरदार में ढलना था हम को
फ़क़त क़िरदार बन कर रह गए हैं
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उस के जाने और आने में फ़क़त ये फ़र्क़ है
दूर जाती मौत है तो पास आती ज़िन्दगी
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भारत के उपकार को, मान रहे सब लोग
रोग 'घटाने' के लिए, दिया विश्व को 'योग'
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भारत के उपकार को, मान रहे सब लोग
रोग 'घटाने' के लिए, दिया विश्व को 'योग'
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धीरे धीरे कुछ भी आसाँ नहीं होता
धीरे धीरे बस आदत हो जाती है
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माँ जैसे देखती हो तुम मगर मैं
तुम्हारी आँख का तारा नहीं हूँ
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भरोसा मुझ पे रक्खो और कुछ पल
रुका हूँ, मैं अभी हारा नहीं हूँ
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मामूली सी बात को लिखने के ख़ातिर
क़लम को पूरी रात भिगोना पड़ता है
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मुझे आँखें दिखा कर बोलती है चुप रहो भैया
बहिन छोटी भले हो बात वो अम्मा सी करती है
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कहते भी हैं कि हम सेे मुहब्बत नहीं उन्हें
और अब तलक रखी है निशानी सँभाल कर
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अब तो गाँवो में भी ईंटों के महल बसने लगे
गाँव की मिट्टी से वो ख़ुशबू रूहानी ख़ो गई
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मैं किसी के पास जाता ही नहीं
दूर होकर मन नहीं लगता मेरा
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देश मेरा जंग तो जीता मगर
लौट कर आया नहीं बेटा मेरा
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तुम्हें ज़रूरत क्या कोई त्योहारों की
रंग लगाकर गले लगाने आ जाओ
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एक वा'दा कर रहा हूँ आप से
हर किया वा'दा निभाऊँगा सनम
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पहले कोई कोशिश कर के तो देखे
हम इतने भी सख़्त नहीं दुनिया वालों
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है उस के पास हीरे की अँगूठी
हमारे पास में ग़ज़लें है जानाँ
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