Intzar Akhtar

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@intzar_akhtar

Intzar Akhtar shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Intzar Akhtar's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
इश्क़ भी अक़्ल के साथ करते हो तुम
कैसी बेकार की बात करते हो तुम
Intzar Akhtar
ये जो इतने रंग बिखरे हैं ज़माने में
मुस्कुरा दो तुम अगर सब फ़ीके हो जाएँ
Intzar Akhtar
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चाँद भी जिस के आगे फीका है
सिर्फ़ औरत ही वो सितारा है
Intzar Akhtar
फ़ख़्र से कह सकता हूँ मैं ने एक सितारे को छू रक्खा है
हाँ-हाँ वही-वही जिस को तुम अपने काँधे का तिल कहती हो
Intzar Akhtar
मैं चाहूँगा दर्द ये मेरे साथ रहे हर दम
तुम पर ही अपनी बेटी का नाम रखूँगा मैं
Intzar Akhtar
अब मेरे बा'द ऐसा लड़का तुम को फिर न मिलेगा
जो दौर-ए-कंप्यूटर में भी ख़ून से ख़त लिखता हो
Intzar Akhtar
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क्यूँँ मुझे ऐसा कभू लगता है
चाँद के रिश्ते में तू लगता है

मैं ने अब छोड़ दिया दिल का काम
दिल के कामों में लहू लगता है
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Intzar Akhtar
ये कह के उस की सहूलियत का ख़याल रक्खा है मैं ने ख़ुद ही
अगर मैं पूछूँ कि बात हो सकती है हमारी तो कहना "ऊँ हूँ"
Intzar Akhtar
मैं जिस के लिए हूँ जहाँ पे भी भारी
वो लड़की मुझे हल्के में ले रही है
Intzar Akhtar
बड़े सलीक़े से उस ने मेरे दिल को तोड़ा है
उन बातों पे भी "हाँ" कह के जिन पे "नहीं" कहना था
Intzar Akhtar
हम ने दुनिया भर में इक को चाहा शिद्दत देखिए
और उस ने दूसरे को चाहा क़िस्मत देखिए
Intzar Akhtar
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इस पे क्या रोना कि तुम मुझ को नहीं मिल पाए
लाख बादल बरसे, धरती कब मिलेगी उस को
Intzar Akhtar
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इस तरह मैं ने हवस पर इश्क़ को तरजीह दी
उस का माथा चूमा भी तो हाथ रख के चूमा है
Intzar Akhtar
ख़ुशी है कि मेरे दिल में ही रह रहे हो तुम
सितम है कि तुम को ढूँढ़ते फिर रहे हैं हम
Intzar Akhtar
ये तो तय समझो कि उसे छू लेने के बा'द
मेरे लुग़त में आग का मतलब पानी होगा
Intzar Akhtar
चाँद से ही बे-वफ़ाई का चलन आया है
रौशनी सूरज से और फिर गर्दिशें धरती की
Intzar Akhtar
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कोई पूछे कि बतलाओ किसे तुम इश्क़ कहते हो
तो कह देना उदासी के फ़लक पे दर्द का इक चाँद
Intzar Akhtar
उस की ख़ामोशी ने रंग ले लिया है
या'नी अब मैं ख़ून थूकने लगा हूँ
Intzar Akhtar
हम उस के 'ऊँ हूँ' 'तो क्या' 'नईं' पर इस लिए भी रुके हैं
महबूब ज़िद्दी न हो तो फिर आशिक़ी बे-मज़ा है
Intzar Akhtar
दश्त में है इक ग़ज़ाला अमृता जैसी
जिस की दुनिया का मुझे इमरोज़ होना है
Intzar Akhtar

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