Mahmood munja

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@mahmood_munja

Mahmood munja shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Mahmood munja's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
गुलाब चेहरे ग़ज़ाल आँखें कि हम भी सदक़े उतार आए
किसी के दिल से उतर के आए किसी को दिल से उतार आए
Mahmood munja
दिल बहुत घबरा रहा था
तू जो नज़दीक आ रहा था
Mahmood munja
मिरी पेशानी उस ने क्या चूमी
मुझे सब कुछ दिखाई देने लगा
Mahmood munja
लबों पे आए जो नाम तेरा
वही तो है ये पयाम मेरा

कभी ख़ुशी में कभी ग़मी में
तुझी पे है ये सलाम मेरा
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Mahmood munja
मेरी आँखों में था बस उस का ही चेहरा
मेरी साँसों पे था बस उस का ही पहरा
Mahmood munja
जिस का भी ज़ख़्म भर गया है
प्यार दोबारा कर गया है

बात उन सेे भी पूछनी है
प्यार कर के जो मर गया है
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Mahmood munja
हो के तुम से जुदा हम किधर जाएँगे
तुम जो हम को मिलो हम सँवर जाएँगे
Mahmood munja
ख़ुद को इस राह-ए-मोहब्बत में जलाना है मुझे
जो हुआ राह-ए-मोहब्बत में भुलाना है मुझे
Mahmood munja
अपनी बाँहों में ऐसे सुलाए हुए
सारे नग़्मा मोहब्बत के गाने लगे

अब जो 'महमूद' ख़त लिख के छोड़े हो जो
ख़ुद ही पढ़ के वो मुझ को सुनाने लगे
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Mahmood munja
उन का हुस्न भी वो जमाल है
सर से पाँव तक वो कमाल है
Mahmood munja
अपने सीने में छुपाए हुए लोग
भूले हैं दिल में बसाए हुए लोग
Mahmood munja
किसी की याद आती है मुझे अब वो सताती है
ग़ज़ल मेरी उसे पढ़ कर सुनाई ही तो जाती है
Mahmood munja
किसी के इश्क़ में खो के बैठा हूँ
मैं उस की याद में रो के बैठा हूँ
Mahmood munja
दिल में उस की तस्वीर ही बना के बैठा हूँ
सारा ग़म उस की याद में भुला के बैठा हूँ
Mahmood munja
लबों पे आए जो नाम तेरा वही तो है ये पयाम मेरा
कभी ख़ुशी में कही ग़मी में तुझी पे है ये सलाम मेरा
Mahmood munja
तेरी गली से मुझे जब गुज़रना होता है
किसी गली को मुझे याद करना होता है
Mahmood munja
काग़ज़ की कश्ती कभी हम भी बनाया करते थे
वो बचपन में जहाज़ हम भी उड़ाया करते थे

अफ़सोस वो तो दिन ही चला गया है अब 'महमूद'
वगर्ना हम भी इनसे कहाँ बाज़ आया करते थे
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Mahmood munja
दिल तो तेरे ही ग़म में मारा हुआ है
क्या हुआ तू अब बे-सहारा हुआ है
Mahmood munja
जो मुझ पे हर बार वार करते हैं
देखो हम उन सेे ही प्यार करते हैं
Mahmood munja
सोचे हुए ख़्वाबों को पाना है मुझे
अब दूर बेहद दूर जाना है मुझे
Mahmood munja

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