Mehshar Afridi

Mehshar Afridi

@mehshar-afridi

Mehshar Afridi shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Mehshar Afridi's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
नेवला और साँप दोनों लड़ते लड़ते थक गए
इक तमाशा कर के सब पैसे मदारी ले गया
Mehshar Afridi
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क़सम ख़ुदा की बड़े तजरबे से कहता हूँ
गुनाह करने में लज़्ज़त तो है सुकून नहीं
Mehshar Afridi
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ज़मीं पे घर बनाया है मगर जन्नत में रहते हैं
हमारी ख़ुश-नसीबी है कि हम भारत में रहते हैं
Mehshar Afridi
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अपने में'यार से नीचे तो मैं आने से रहा
शे'र भूखा हूँ मगर घास तो खाने से रहा
Mehshar Afridi
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मैं अगर अपनी जवानी के सुना दूँ क़िस्से
ये जो लौंडे हैं मेरे पाँव दबाने लग जाए
Mehshar Afridi
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उसी को हम सफ़र करना पड़ेगा
नहीं तो दूर तक ख़ाली सड़क है
Mehshar Afridi
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तेरे बग़ैर ही अच्छे थे क्या मुसीबत है
ये कैसा प्यार है हर दिन जताना पड़ता है
Mehshar Afridi
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दिल ये करता है कि इस उम्र की पगडंडी पर
उलटे पैरों से चलूँ फिर वही लड़का हो जाऊँ
Mehshar Afridi
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तेरी ख़ता नहीं जो तू ग़ुस्से में आ गया
पैसे का ज़ो'म था तेरे लहजे में आ गया

सिक्का उछालकर के तेरे पास क्या बचा
तेरा ग़ुरूर तो मेरे काँसे में आ गया
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Mehshar Afridi
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ऐसे हालात से मजबूर बशर देखे हैं
अस्ल क्या सूद में बिकते हुए घर देखे हैं

हम ने देखा है वज़ादार घरानों का जवाल
हम ने सड़कों पे कई शाह ज़फ़र देखे है
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Mehshar Afridi
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मैं न कहता था हिज्र कुछ भी नहीं
ख़ुद को हलकान कर रही थी तुम

कितने आराम से हैं हम दोनों
देखा बेकार डर रही थी तुम
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Mehshar Afridi
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सब सेे बेज़ार हो गया हूँ मैं
ज़ेहनी बीमार हो गया हूँ मैं

कोई अच्छी ख़बर नहीं मुझ में
या'नी अख़बार हो गया हूँ मैं
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Mehshar Afridi
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जगह की क़ैद नहीं थी कोई कहीं बैठे
जहाँ मक़ाम हमारा था हम वहीं बैठे

अमीर-ए-शहर के आने पे उठना पड़ता है
लिहाज़ा अगली सफ़ों में कभी नहीं बैठे
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Mehshar Afridi
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दबी कुचली हुई सब ख़्वाहिशों के सर निकल आए
ज़रा पैसा हुआ तो च्यूँँटियों के पर निकल आए

अभी उड़ते नहीं तो फ़ाख़्ता के साथ हैं बच्चे
अकेला छोड़ देंगे माँ को जिस दिन पर निकल आए
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Mehshar Afridi
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तेरे वादे से प्यार है लेकिन
अपनी उम्मीद से नफ़रत है

पहली ग़लती तो इश्क़ करना थी
शा'इरी दूसरी हिमाक़त है
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Mehshar Afridi
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तुम को हिचकी लेने से भी दिक़्क़त थी
मैं ने तुम को याद ही करना छोड़ दिया
Mehshar Afridi
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मेरे होंठों के सब्र से पूछो
उस के हाथों से गाल तक का सफ़र
Mehshar Afridi
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