Nakul kumar

Nakul kumar

@nakulra821041

Nakul kumar shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Nakul kumar's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Shayari
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  • Sher
  • Ghazal
  • Nazm
लोग तो बस जिस्मों पर बनवाते फिरते हैं लेकिन
तेरे   नाम  का  टैटू  मैं ने  दिल  पर  बनवाया  था
Nakul kumar
इक लड़की जो मेरी दुनिया थी
और वो भी दुनिया जैसी निकली
Nakul kumar
शदीद उलझनें सब ख़्वाहिशें जला रही हैं
अजीब हाल है मेरा समझ नहीं आता

यूँँ ज़िंदा रहना भी क्या कोई बेवक़ूफ़ी है या
कोई कमाल है मेरा समझ नहीं आता
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Nakul kumar
इक शहज़ादी ने दी है इक माँ को उतरन
इक बच्ची को मिल जाएँगे नए कपड़े आज
Nakul kumar
मेरे हर ग़म में वो इज़ाफ़ा दानिस्ता करती है
और ये काम भी वो आहिस्ता-आहिस्ता करती है
Nakul kumar
इस क़दर दिल सहे ज़द ठीक नहीं
इश्क़ की इतनी भी हद ठीक नहीं

बंद कमरे से निकल आ बाहर
दर्द की इतनी मदद ठीक नहीं
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Nakul kumar
मैं चाहता हूँ कि आँसू लूँ कुछ निकाल तिरे
तिरी नज़र में छुपे हैं सभी सवाल तिरे
Nakul kumar
बंजर हूँ तो बंजर ही रहने दो मुझे
तुम अब मुझे कोई गुलिस्ताँ मत करो

तंग आ चुके हैं हम तेरे इस इश्क़ से
तुम छोड़ दो हम को परेशाँ मत करो
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Nakul kumar
तू चाहिए कि मुकम्मल ही चाहिए मुझ को
तिरा ये जिस्म भी मेरा हो और तेरा दिल भी
Nakul kumar
पहले याद आती हैं तो रोती हैं आँखें
फिर कहीं जा कर ज़रा सोती हैं आँखें

हर नज़र में क़ैद हैं मंज़र कई से
ख़्वाबों की लाशें फ़क़त ढोती हैं आँखें
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Nakul kumar
मुंतज़िर हूँ मैं सहर का
रौशनी है तंग मेरी

एक मिट्टी का दिया हूँ
रात से हैं जंग मेरी
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Nakul kumar
इस मोहब्बत में मेरी कुछ ऐसे बर्बादी हुई है
उस की मेरी ही नज़र के सामने शादी हुई है
Nakul kumar
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एक चेहरा मिरा दर्द-ए-दिल बन गया
ठीक था आदमी मुज़्महिल बन गया

इत्तिफ़ाक़न मैं गुज़रा था इक कूचे से
फिर गुज़रना ही वो मुस्तक़िल बन गया
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Nakul kumar
मिरी बातों को वो आधा समझती हैं
मैं मतला कहता हूँ मक़्ता समझती हैं

हुनर हैं शा'इरी मैं शे'र कहता हूँ
मगर इस को तो वो ज़ाया' समझती हैं
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Nakul kumar
एक दिन बनेंगे ख़ाक हम
मिट्टी की हैं खुराक हम

भीतर ख़लाए साथ है
बाहरस ठीक-ठाक हम
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Nakul kumar