SALIM RAZA REWA

SALIM RAZA REWA

@salimraza1975

SALIM RAZA REWA shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in SALIM RAZA REWA's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
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फफोले पड़ चुके आँखों में ज़ौक़-ए-दीद बाक़ी है 
बहुत है दूर तू मुझ सेे मगर उम्मीद बाक़ी है 

मेरी जाँ लौट के आजा दिल-ए-बीमार की ख़ातिर
सभी की हो गई है ईद मेरी ईद बाक़ी है
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SALIM RAZA REWA
एक दिन ख़्वाब में वो क्या आए
घर मेरा आज तक महकता है
SALIM RAZA REWA
जी भर के मुझ को नाच नचा ले तू ज़िंदगी
मैं ने भी घुँघरू बाँध लिए अपने पाँव में
SALIM RAZA REWA
शादाब जिन की ख़ुशबू से हर इक गुलाब है
रौशन चमक से जिन की 'रज़ा' आफ़ताब है

सूरत वो जिस पे नाज़ है कुल काएनात को
वो सूरत-ए-रसूल ख़ुदा की किताब है
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SALIM RAZA REWA
इन दरिंदों को भी सूली पे चढ़ाया जाए
बोटियाँ काट के कुत्तों को खिलाया जाए

ताकि कोई भी इलाक़ा न पहलगाम बने
इस तरह हिन्द से दुश्मन को मिटाया जाए
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SALIM RAZA REWA
मुझ को तिजारतों में ख़सारा नहीं हुआ
ये और बात है कि गुज़ारा नहीं हुआ

ये सोच कर मैं ख़ुश हूँ कि ग़ुरबत में भी मुझे
लालच-दग़ा-फ़रेब गवारा नहीं हुआ
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SALIM RAZA REWA
शादाब जिन की ख़ुशबू से हर इक गुलाब है
रौशन चमक से जिन की 'रज़ा' आफ़ताब है

सूरत वो जिस पे नाज़ है कुल काएनात को
वो सूरत-ए-रसूल ख़ुदा की किताब है
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SALIM RAZA REWA
बन के मेहमान उस की ग़ुर्बत का
लज़्ज़त-ए ग़म को चख के आया हूँ

क़ैद करने को हर अदा उस की
आँखें चौखट पे रख के आया हूँ
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SALIM RAZA REWA
हाथों में तेरे हमदम जादू नहीं तो क्या है
मिट्टी को तू ने छू कर सोना बना दिया है

उस दिन से जाने कितनी नज़रें लगी हैं मुझ पर
जिस दिन से तू ने मुझ को अपना बना लिया है
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SALIM RAZA REWA
हुज़ूर-ए-पाक रसूल-ए- ख़ुदा के सदक़े में
हबीब-ए-किब्रिया ख़ैरुल वरा के सदक़े में

दुआएँ उन की यक़ीनन क़ुबूल होंगी रज़ा
जो माँगते हैं दुआ मुस्तफ़ा के सदक़े में
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SALIM RAZA REWA
उन के दर पर सलाम कह देना
मैं हूँ उन का ग़ुलाम कह देना

उन सेे मिलने की दिल में ख़्वाहिश है
मेरा इतना पयाम कह देना
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SALIM RAZA REWA
अच्छा किया जो छोड़ दिया साथ हमारा
कब तक सॅंभालते ये दिल-ए-बेक़रार को
SALIM RAZA REWA
वो जिसे चाहे अता कर दे ज़माने की ख़ुशी
उस के ही हाथों में हैं सारे जहाँ की नेमतें
SALIM RAZA REWA
ढल गई अब तो जवानी जिस्म बूढ़ा हो गया
पर तुम्हारे प्यार को बूढ़ा नहीं होने दिया

तुम ने भी वा'दा निभाया इस क़दर कि उम्र भर
मुझ को पागल कर के फिर अच्छा नहीं होने दिया
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SALIM RAZA REWA
लगेंगे तेरे काँधे पर सितारे कामयाबी के
मगर तुझ को सफ़र में भीड़ से आगे निकलना है
SALIM RAZA REWA
मौसमों का इशारा है आ जाइए
ख़ूब-सूरत नज़ारा है आ जाइए

ऐसा मौक़ा' हसीं जाने कब आएगा
धड़कनों ने पुकारा है आ जाइए
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SALIM RAZA REWA
उन के दर पर सलाम कह देना
मैं हूँ उन का ग़ुलाम कह देना

उन सेे मिलने की दिल में ख़्वाहिश है
मेरा इतना पयाम कह देना
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SALIM RAZA REWA
रहमतें बरसती हैं हर घड़ी मदीने में
क्या हसीन मंज़र है हर तरफ़ उजाला है

माँग ले रज़ा तू भी मुस्तफ़ा के सदक़े में
रब ने उन के सदक़े में मुश्किलों को टाला है
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SALIM RAZA REWA
बंदिश ख़याल रब्त निभाता रहा मगर
इक शे'र बा-वक़ार कभी कह नहीं सका

मैं ने ज़बाँ पे टेप लगाया तो था मगर
कमबख़्त दिल दिमाग़ से चुप रह नहीं सका
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SALIM RAZA REWA
जिस की चाहत पे दिल दिवाना है
उस के क़दमों तले ज़माना है

मेरी ख़्वाहिश है जिस को पाने की
उस के होंटों पे सिर्फ़ ना ना है
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