Sandeep dabral 'sendy'

Sandeep dabral 'sendy'

@sandeepdabral

Sandeep dabral 'sendy' shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Sandeep dabral 'sendy''s shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
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नामुमकिन जैसा तो कुछ भी नहीं है दुनिया में
पत्थर को भी काटा जा सकता है पानी से
Sandeep dabral 'sendy'
इश्क़ ने बर्बाद ऐसे की यहाँ फ़स्लें हमारी
सो भरी हैं अब उदासी से नई नस्लें हमारी
Sandeep dabral 'sendy'
जिस का दीद मुयस्सर नइँ लोगों को उस को छूऊँ मैं
इस सेे ज़्यादा और मुहब्बत में याँ मिसाल क्या दूँ मैं

तुम जिस के साथ दो क़दम चलने की तमन्ना रखते हो
उस के साथ तो इक उम्र का सफ़र कर के आया हूँ मैं
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Sandeep dabral 'sendy'
हम तो सिर्फ़ तुम्हारी दु'आओं से ठीक होने वाले हैं
इलाज गर कुछ मुमकिन होता तो फिर चारा-गर करते
Sandeep dabral 'sendy'
क़त्ल अदाएँ और निगाहें करती हैं
इश्क़ में मुल्ज़िम दिल बेचारा होता है
Sandeep dabral 'sendy'
लोग पता पूछा करते हैं तुम्हारा और
सबका मेरी ओर इशारा होता है
Sandeep dabral 'sendy'
सबकी ज़बाँ पे सब सेे प्यारा होता है
अच्छा शे'र यहाँ आवारा होता है
Sandeep dabral 'sendy'
जीतने की नज़ीर पेश करो
खेल में अब वज़ीर पेश करो
Sandeep dabral 'sendy'
सिर्फ़ तुम से ही नहीं वो ऐसा सब से बोलते हैं
मेरे घर के लोग सब के सब अदब से बोलते हैं

तुम भड़क क्यूँ जाती हो इस बात से जानाँ सुनो तो
तुम को भाभी दोस्त मेरे जाने कब से बोलते हैं
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Sandeep dabral 'sendy'
गर इक बार मुयस्सर ये गाल हो जाएँ
हम भी गुलाल के हम-ख़याल हो जाएँ
Sandeep dabral 'sendy'
कुछ और लौटाओ या मत लौटाओ लेकिन हे ख़ालिक़
बस विधवा के पैरों में पायल की छन छन लौटा दो
Sandeep dabral 'sendy'
इस लिए ईद का करता हूँ इंतिज़ार
ताकि अपने पिता के गले लग सकूँ
Sandeep dabral 'sendy'
मरने से पहले यहाँ जीते जी मरना पड़ता है सो
इतना आसाँ है कहाँ ये ख़ुद-कुशी की मौत मरना
Sandeep dabral 'sendy'
एक कहानी और बयाँ कर रहे कटे पर दुनिया की
पक्का आज किसी ने फिर उड़ने की कोशिश की होगी
Sandeep dabral 'sendy'
ये मानो न मानो यहाँ अपना कल सुन रहा है
ये पढ़ने की इस उम्र में जो ग़ज़ल सुन रहा है
Sandeep dabral 'sendy'
इतनी उदास क्यूँ रहती हैं दिल की दीवारें
इस
में कोई रहता था क्या मुझ सेे भी पहले
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Sandeep dabral 'sendy'
चूड़ियों का नाप लेने आया था मैं उस की सम्त
देख कर हाथों में कंगन मैं पलट कर आ गया
Sandeep dabral 'sendy'
वो तो मैं हूँ जो अब तक ठीक-ठाक हूँ वरना
ये इतने ग़म और किसी को पागल कर देते
Sandeep dabral 'sendy'
जिस ने नज़राने में इक रोज़ ये घड़ी थी दी
आज उसी के पास हमारे लिए समय नइँ है
Sandeep dabral 'sendy'
कि वर्षों बा'द वो अब अपने धाम आ रहे हैं
अवध पुरी में मेरे प्रभु श्री राम आ रहे हैं
Sandeep dabral 'sendy'

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