Shakeb Jalali

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@shakeb-jalali

Shakeb Jalali shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Shakeb Jalali's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
यही दीवार-ए-जुदाई है ज़माने वालो
हर घड़ी कोई मुक़ाबिल में खड़ा रहता है
Shakeb Jalali
दिल के वीराने में इक फूल खिला रहता है
कोई मौसम हो मिरा ज़ख़्म हरा रहता है
Shakeb Jalali
दिल सा अनमोल रतन कौन ख़रीदेगा 'शकेब'
जब बिकेगा तो ये बे-दाम ही बिक जाएगा
Shakeb Jalali
वक़्त ने ये कहा है रुक रुक कर
आज के दोस्त कल के बेगाने
Shakeb Jalali
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भीगी हुई इक शाम की दहलीज़ पे बैठे
हम दिल के सुलगने का सबब सोच रहे हैं
Shakeb Jalali
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मुझे गिरना है तो मैं अपने ही क़दमों में गिरूँ
जिस तरह साया-ए-दीवार पे दीवार गिरे
Shakeb Jalali
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ये एक अब्र का टुकड़ा कहाँ कहाँ बरसे
तमाम दश्त ही प्यासा दिखाई देता है
Shakeb Jalali
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सोचो तो सिलवटों से भरी है तमाम रूह
देखो तो इक शिकन भी नहीं है लिबास में
Shakeb Jalali
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पहले तो मेरी याद से आई हया उन्हें
फिर आइने में चूम लिया अपने-आप को
Shakeb Jalali
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प्यार की जोत से घर घर है चराग़ाँ वर्ना
एक भी शम्अ' न रौशन हो हवा के डर से
Shakeb Jalali
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आज भी शायद कोई फूलों का तोहफ़ा भेज दे
तितलियाँ मंडला रही हैं काँच के गुल-दान पर
Shakeb Jalali
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तू ने कहा न था कि मैं कश्ती पे बोझ हूँ
आँखों को अब न ढाँप मुझे डूबता भी देख
Shakeb Jalali
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