Tehzeeb Hafi

Tehzeeb Hafi

@tehzeeb-hafi

Tehzeeb Hafi, hailing from Lahore, Pakistan, is a beloved poet, particularly adored by the youth. Explore a delightful collection of his Shayari, available in both Hindi and English and don't hesitate to enjoy and share these poetic gems with your friends.

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Shayari
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ये फ़िल्मों में ही सब को प्यार मिल जाता है आख़िर में
मगर सचमुच में इस दुनिया में ऐसा कुछ नहीं होता

चलो माना कि मेरा दिल मेरे महबूब का घर है
पर उस के पीछे उस के घर में क्या-क्या कुछ नहीं होता
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गले तो लगना है उस से कहो अभी लग जाए
यही न हो मेरा उस के बग़ैर जी लग जाए

मैं आ रहा हूँ तेरे पास ये न हो कि कहीं
तेरा मज़ाक़ हो और मेरी ज़िंदगी लग जाए
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भरम रखा है तेरे हिज्र का वरना क्या होता है
मैं रोने पे आ जाऊँ तो झरना क्या होता है

मेरा छोड़ो मैं नइँ थकता मेरा काम यही है
लेकिन तुम ने इतने प्यार का करना क्या होता है
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अब उस जानिब से इस कसरत से तोहफ़े आ रहे हैं
कि घर में हम नई अलमारियाँ बनवा रहे हैं
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तपते सहराओं में सब के सर पे आँचल हो गया
उस ने ज़ुल्फ़ें खोल दीं और मसअला हल हो गया
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मुझे आज़ाद कर दो एक दिन सब सच बता कर
तुम्हारे और उस के दरमियाँ क्या चल रहा है
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क्या ग़लत-फ़हमी में रह जाने का सदमा कुछ नहीं
वो मुझे समझा तो सकता था कि ऐसा कुछ नहीं
इश्क़ से बच कर भी बंदा कुछ नहीं होता मगर
ये भी सच है इश्क़ में बंदे का बचता कुछ नहीं
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मेरे नाम से क्या मतलब है तुम्हें मिट जाएगा या रह जाता है
जब तुम ने ही साथ नहीं रहना फिर पीछे क्या रह जाता है

मेरे पास आने तक और किसी की याद उसे खा जाती है
वो मुझ तक कम ही पहुँचता है किसी और जगह रह जाता है
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उस लड़की से बस अब इतना रिश्ता है
मिल जाए तो बात वगैरा करती है

बारिश मेरे रब की ऐसी नेमत है
रोने में आसानी पैदा करती है
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मैं उस से ये तो नहीं कह रहा जुदा न करे
मगर वो कर नहीं सकता तो फिर कहा न करे

वो जैसे छोड़ गया था मुझे उसे भी कभी
ख़ुदा करे कि कोई छोड़ दे ख़ुदा न करे
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अब इन जले हुए जिस्मों पे ख़ुद ही साया करो
तुम्हें कहा था बता कर क़रीब आया करो

मैं उस के बा'द महिनों उदास रहता हूँ
मज़ाक में भी मुझे हाथ मत लगाया करो
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Tehzeeb Hafi
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ज़ेहन से यादों के लश्कर जा चुके
वो मेरी महफ़िल से उठ कर जा चुके

मेरा दिल भी जैसे पाकिस्तान है
सब हुकूमत कर के बाहर जा चुके
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Tehzeeb Hafi
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तुझ को बतलाता मगर शर्म बहुत आती है
तेरी तस्वीर से जो काम लिया जाता है
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मैं ने जो कुछ भी सोचा हुआ है, मैं वो वक़्त आने पे कर जाऊँगा
तुम मुझे ज़हर लगते हो और मैं किसी दिन तुम्हें पी के मर जाऊँगा
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ
ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है

तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें
ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
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Tehzeeb Hafi
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया
और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया

मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग
मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
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Tehzeeb Hafi
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अब ज़रूरी तो नहीं है कि वो सब कुछ कह दे
दिल में जो कुछ भी हो आँखों से नज़र आता है

मैं उस सेे सिर्फ़ ये कहता हूँ कि घर जाना है
और वो मारने मरने पे उतर आता है
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Tehzeeb Hafi
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इसीलिए तो सब सेे ज़्यादा भाती हो
कितने सच्चे दिल से झूठी क़स
में खाती हो
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Tehzeeb Hafi
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जैसे तुम ने वक़्त को हाथ में रोका हो
सच तो ये है तुम आँखों का धोख़ा हो
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कौन तुम्हारे पास से उठ कर घर जाता है
तुम जिस को छू लेती हो वो मर जाता है
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