Vivek Chaturvedi

Vivek Chaturvedi

@vivekch23501

Vivek Chaturvedi shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Vivek Chaturvedi's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
बाँटते  हैं वही लोग अक्सर ज़मीं
लोग वो लड़ते है जो ज़मीं के लिए
Vivek Chaturvedi
गर घड़ी हो ख़राब अपनी ही तो फिर
वक़्त के चाल का पता नहीं चलता
Vivek Chaturvedi
ख़ुद के अंदर दफ़्न हूँ मैं
ख़ुद के अंदर मर चुका हूँ
Vivek Chaturvedi
हो गर बराबरी में आना तो बढ़ा कद तू
ये लोग, छोटा हो कद तो गले नहीं लगते
Vivek Chaturvedi
न देखो डालकर आँखों में आँखें तुम
नहीं , आँखें तेरी  गीली हो जाएँगी
Vivek Chaturvedi
ग़लत वो था तो मैं उसे कैसे कहता
उसे पहले ही मैं ज़बाँ दे चुका था
Vivek Chaturvedi
तराशा गया था गली से उठा कर 
वो पत्थर जो अब तो ख़ुदा हो चुका था
Vivek Chaturvedi
अब ज़ख़्म ज़ख़्म से मेरा पाँव भर चुका था
या'नी बहुत से रस्तों से मैं गुज़र चुका था
Vivek Chaturvedi
हम रह गए पीछे उम्र भर उन सेे भी
जो दौड़ में आगे नहीं हो सकते थे
Vivek Chaturvedi
शहीदों के शहादत को हमें याद रखना है
हमें या'नी वतन को अपनें आज़ाद रखना है
Vivek Chaturvedi
इस परिंदे को शज़र में लौटना है
अब मुझे तेरी नज़र में लौटना है
Vivek Chaturvedi
करते थे फ़क़त हम याद या'नी
अब हम को भुलाया जा रहा था
Vivek Chaturvedi
दुश्मनी थी फ़क़त यही उन सेे
की नहीं दोस्ती ता-उम्र उन सेे
Vivek Chaturvedi
हम को आज़माया जा रहा था
सब कुछ सच बताया जा रहा था

पाबंदी सिखाई गई हमें जब
तब भी वक़्त ज़ाया' जा रहा था
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Vivek Chaturvedi
वो ऐसा क्या जादू कर जाते हैं
ख़ाली रहते हैं तो भर जाते है

जो देख के हम को ज़िंदा रहते हैं
हम देख के ही उन को मर जाते हैं
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Vivek Chaturvedi
वो चला गया फ़क़त मेरे एक ग़लती पे ही छोड़ के मुझे
जो कभी मिरे ही ग़लती पे बोला था की तुझे छोड़ूँगा नहीं
Vivek Chaturvedi
आईने को  रख दिया ,उन के चेहरे के सामने
या'नी हाज़िर किया, अपनी जाँ उन के सामने
Vivek Chaturvedi
जीने लगा हूँ मैं भी तब से
मरने लगा हूँ तुझ पे जब से
Vivek Chaturvedi
उन के  नजरों में  चढ़ गए हैं हम
जिन के नजरों से गिर गए थे हम
Vivek Chaturvedi
कितने शिद्दतों से अपने फ़र्ज को निभाता है आईना
जितना तोड़ते हैं उतने चेहरे ,दिखाता है आईना
Vivek Chaturvedi

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