tumhaara phone aaya hai | तुम्हारा फ़ोन आया है

  - Kumar Vishwas

तुम्हारा फ़ोन आया है

अजब सी ऊब शामिल हो गई है रोज़ जीने में
पलों को दिन में, दिन को काट कर जीना महीने में
महज़ मायूसियाँ जगती हैं अब कैसी भी आहट पर
हज़ारों उलझनों के घोंसले लटके हैं चौखट पर
अचानक सब की सब ये चुप्पियाँ इक साथ पिघली हैं
उम्मीदें सब सिमट कर हाथ बन जाने को मचली हैं
मेरे कमरे के सन्नाटे ने अँगड़ाई सी तोड़ी है
मेरी ख़ामोशियों ने एक नग़्मा गुनगुनाया है
तुम्हारा फ़ोन आया है, तुम्हारा फ़ोन आया है

सती का चैतरा दिख जाए जैसे रूप-बाड़ी में
कि जैसे छठ के मौक़े' पर जगह मिल जाए गाड़ी में
मेरी आवाज़ से जागे तुम्हारे बाम-ओ-दर जैसे
ये नामुमकिन सी हसरत है, ख़याली है, मगर जैसे
बड़ी नाकामियों के बा'द हिम्मत की लहर जैसे
बड़ी बेचैनियों के बा'द राहत का पहर जैसे
बड़ी गुमनामियों के बा'द शोहरत की मेहर जैसे
सुब्ह और शाम को साधे हुए इक दोपहर जैसे
बड़े उनवान को बाँधे हुए छोटी बहर जैसे
नई दुल्हन के शरमाते हुए शाम-ओ-सहर जैसे
हथेली पर रची मेहँदी अचानक मुस्कुराई है
मेरी आँखों में आँसू का सितारा जगमगाया है
तुम्हारा फ़ोन आया है, तुम्हारा फ़ोन आया है

  - Kumar Vishwas

Aahat Shayari

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