Aahat Shayari - Dil ko chhoo lene wali halki si aahat aur ehsaas

Aahat shayari captures the subtle sounds and silent emotions that touch the heart before words do. Whether it's the soft footsteps of a loved one or the quiet echo of memories, these lines express delicate feelings of presence, longing, and anticipation. Perfect for those moments when even a faint aahat says everything.

aahat shayari
बहुत पहले से उन क़दमों की आहट जान लेते हैं
तुझे ऐ ज़िंदगी हम दूर से पहचान लेते हैं
Firaq Gorakhpuri
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dastak shayari
आहट सी कोई आए तो लगता है कि तुम हो
साया कोई लहराए तो लगता है कि तुम हो
Jaan Nisar Akhtar
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के 'हैलो' सुनते ही कट कर दिया है उस ने मेरा फ़ोन
ख़ुदा का शुक्र है आवाज़ तो पहचानता है वो
Zubair Ali Tabish
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नाला हूँ मैं बेदारी-ए-एहसास के हाथों
दुनिया मिरे अफ़्कार की दुनिया नहीं होती
Sahir Ludhianvi
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क्या ख़ुशी में ज़िंदगी का होश कम रह जाएगा
ग़म अगर मिट भी गया एहसास-ए-ग़म रह जाएगा
Shakeel Badayuni
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हम किसी दर पे न ठिटके न कहीं दस्तक दी
सैकड़ों दर थे मिरी जाँ तिरे दर से पहले
Ibn E Insha
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इसी लिए हमें एहसास-ए-जुर्म है शायद
अभी हमारी मोहब्बत नई नई है ना
Afzal Khan
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दिल पर दस्तक देने कौन आ निकला है
किस की आहट सुनता हूँ वीराने में
Gulzar
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ख़ुदा ऐसे एहसास का नाम है
रहे सामने और दिखाई न दे
Bashir Badr
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दर्द ऐसा नज़र-अंदाज़ नहीं कर सकते
जब्त ऐसा की हम आवाज नहीं कर सकते

बात तो तब थी कि तू छोड़ के जाता ही नहीं
अब तेरे मिलने पे हम नाज नहीं कर सकते
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Ismail Raaz
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तिरे एहसास में डूबा हुआ मैं
कभी सहरा कभी दरिया हुआ मैं
Siraj Faisal Khan
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बहुत कुछ बोलना है पर अभी ख़ामोश रहने दो
ख़मोशी बोलती है तो, बड़ी आवाज़ करती है
Divy Kamaldhwaj
भटकती फिर रही है आँख घर में
तिरी आवाज़ इस को दिख रही है
Himanshu Kiran Sharma
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बुरा मनाया था हर आहट हर सरगोशी का
सोचो कितना ध्यान रखा उस ने ख़ामोशी का

तुम इस का नुक़सान बताती अच्छी लगती हो
वरना हम को शौक़ नहीं है सिगरेट-नोशी का
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Khurram Afaq
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किसी सीने पे आहट दी, किसी काँधे पे सर रक्खा
हुए कितने भी बेपरवाह मगर बस एक घर रक्खा
Prashant Beybaar
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दे रहे हैं लोग मेरे दिल पे दस्तक बार बार
दिल मगर ये कह रहा है सिर्फ़ तू और सिर्फ़ तू
Fareeha Naqvi
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दर्द में शिद्दत-ए-एहसास नहीं थी पहले
ज़िंदगी राम का बन-बास नहीं थी पहले
Shakeel Azmi
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तेरी आवाज़ मेरा रिज़्क हुआ करती थी
तू मुझे भूख से मारेगा ये सोचा नहीं था
Rafi Raza
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पहले कहता है जुनूँ उस का गिरेबान पकड़
फिर मेरा दिल मुझे कहता है इधर कान पकड़

ऐसी वहशत भी न हो घर के दरो बाम कहें
कोई आवाज़ ही ले आ कोई मेहमान पकड़
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Azbar Safeer
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तेरे एहसास को ख़ुशबू बनाते
जो बस चलता तुझे उर्दू बनाते

यक़ीनन इस से तो बेहतर ही होती
वो इक दुनिया जो मैं और तू बनाते
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Saurabh Sharma 'sadaf'
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हमें हर वक़्त ये एहसास दामन-गीर रहता है
पड़े हैं ढेर सारे काम और मोहलत ज़रा सी है
Khurshid Talab
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'अख़्तर' गुज़रते लम्हों की आहट पे यूँँ न चौंक
इस मातमी जुलूस में इक ज़िंदगी भी है
Akhtar Hoshiyarpuri
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रोज़ मिलने पे भी लगता था कि जुग बीत गए
इश्क़ में वक़्त का एहसास नहीं रहता है
Ahmad Mushtaq
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दरवाज़े पर दस्तक देने से पहले
मेरे हाथ दुआ में ख़ुद उठ जाते हैं
Tanoj Dadhich
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एक आवाज़ कि जो मुझ को बचा लेती है
ज़िन्दगी आख़री लम्हों में मना लेती है

जिस पे मरती हो उसे मुड़ के नहीं देखती वो
और जिसे मारना हो यार बना लेती है
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Ali Zaryoun
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हम को बस आवाज़ लगानी होती है
पीछे मुड़ना काम तुम्हारा रहता है
Anurag Pandey
कोई शहर था जिस की एक गली
मेरी हर आहट पहचानती थी

मेरे नाम का इक दरवाज़ा था
इक खिड़की मुझ को जानती थी
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Ali Zaryoun
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किस ने दस्तक दी ये दिल पर कौन है
आप तो अंदर हैं बाहर कौन है
Rahat Indori
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अपनी हालत का ख़ुद एहसास नहीं है मुझ को
मैं ने औरों से सुना है कि परेशान हूँ मैं
Aasi Uldani
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हैं लहू से कई गुना बढ़कर
वो जो एहसास के मरासिम हैं
Shadan Ahsan Marehrvi
अवल्ली इश्क़ के एहसास भी तारी रक्खे
और इस बीच नए काम भी जारी रक्खे

मैं ने दिल रख लिया है ये भी कोई कम तो नहीं
दूसरा ढूँढ़ लो जो बात तुम्हारी रक्खे
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Ashu Mishra
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दीवारों पर दस्तक देते रहिएगा
दीवारों में दरवाज़े बन जाएँगे
Kunwar Bechain
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मेरा दस्तक देना इतना अच्छा लगता है उस को
दस्तक देना बंद करूँँ तो दरवाज़ा खुल जाता है
Vishnu virat
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अभी तो शाम की दस्तक हुई है
अभी से लग गया बिस्तर हमारा

यही तन्हाई है जन्नत हमारी
इसी जन्नत में है अब घर हमारा
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Vikas Sharma Raaz
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अच्छा ख़्वाब दिखाया तुम ने ख़्वाब दिखाने वालों में
ऐसी बात कहाँ होती थी इस सेे पहले वालों में

दरवाज़े पर ताला हो तो फिर भी दस्तक दे देना
नाम तो शामिल हो जाएगा दस्तक देने वालों में
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Aman Shahzadi
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ये दिल विल का धड़कना कुछ नहीं है
तेरे सीने में जो हलचल है मैं हूँ
Shakir Dehlvi
उस की हर इक याद में लज़्ज़त होती है
पहली मोहब्बत पहली मोहब्बत होती है

तेरे साथ नहीं हैं तो एहसास हुआ
इक तस्वीर की कितनी क़ीमत होती है
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Aadil Rasheed
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जिस को इस फ़स्ल में होना है बराबर का शरीक
मेरे एहसास में तन्हाइयाँ क्यूँँ बोता है
Ghulam Mohammad Qasir
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जिसे न आने की क़स्में मैं दे के आया हूँ
उसी के क़दमों की आहट का इंतिज़ार भी है
Javed Naseemi
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हम दोज़ख़-ए-एहसास में जलते ही रहेंगे
ये फ़िक्र का हासिल है बसीरत की सज़ा है
Syed Ahmad Shamim
इतना कम-ज़र्फ़ न बन उस के भी सीने में है दिल
उस का एहसास भी रख अपनी ही राहत पे न जा
Aitbar Sajid
किसी आहट में आहट के सिवा कुछ भी नहीं अब
किसी सूरत में सूरत के सिवा क्या रह गया है
Irfan Sattar
कभी होगी नहीं होगी अगर होगी तो कब होगी
वो इक दस्तक कि जिस के वास्ते हम दर बनाते हैं
Anfal Rafique
तू कोई ग़म है तो दिल में जगह बना अपनी
तू इक सदा है तो एहसास की कमाँ से निकल
Rajinder Manchanda Bani
जैसे उस एक दिए ने रात का ख़याल रखा है
मेरे सन्नाटों को तेरी आवाज़ ने सँभाल रखा है
Ankit
तुम्हारे क़दमों की आहट से ये दिल उछल पड़ता है
क्या हश्र होगा जाना जब तुम आ कर गले लगाओगी
Yashvardhan Jain
जो इस दुनिया से डरतें हैं
ख़ाक, मोहब्बत करते हैं

हम को देखो हम से सीखो
हम तो तुम पर ही मरतें हैं
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Sandeep Gandhi Nehal
बाद-ए-सबा जब ज़ुल्फ़ों को मेरी सहलाए
एहसास-ए-छुअन तेरा दिल को मेरे महकाए
Angel Pal
हम को तो आवाज़ उठा कर कहना भी नाजाइज़ है
आप बड़े घर के बच्चे हैं आप का नख़रा जाइज़ है
Aarush Sarkaar
हाँ कड़वा होता है लेकिन हम को ये एहसास बहुत है
मिलता है प्रोटीन विटामिन घर वालों के ही ता'ने में
Aarush Sarkaar
कितने एहसास दफ़्न होते है रोज़ यहाँ
हमारे दिल को क़ब्रिस्तान क्यूँ नहीं कहते
Aryan Goswami
अँधेरी ज़िन्दगी रौशन करेगी
यही तो काम इल्मो फ़न करेगी

हमें आहट मिलेगी तब ए जानाँ
जभी पायल तिरी छन-छन करेगी
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Kush Pandey ' Saarang '
मेरी ख़ामोश निगाहों पे जरा दस्तक दे
एक मुद्दत से मरा जाता हूँ धीरे धीरे
आशुतोष तिवारी 'आशू'
अकेले पन का ये एहसास कुछ ऐसे भुलाता हूँ
मैं उस के लिक्खे गीतों को हमेशा गुनगुनाता हूँ

मैं उस को फ़ोन करता हूँ वो मुझ को डाँट देती है
ये डर भी इस क़दर है सर से पा तक थरथराता हूँ
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Jay kishan
तेरी आँखों को देखा तो एहसास हुआ
ये आँखें भी तहज़ीब का हिस्सा होती हैं
Ramnath Shodharthi
हर इक आहट पर मैं घबरा जाता हूँ
ना जाने क्या डर इस दिल में बैठा है
Sarvjeet Singh
यूँँ तेरी राह तकते तकते सुन
मेरी आँखों में पड़ गए जाले

अब के बारिश कहीं मेरी छत से
तेरा एहसास ही न धो डाले
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Firdous khan
ढलता सूरज हम को ये एहसास दिलाने आता है
हम कितने भी ऊपर जाएँ आख़िर डूब ही जाना है
Khalid Azad
इक बार बस तू ज़ोर से आवाज़ देता
जो मैं अड़ा था ज़िद पे तू ही हार लेता
Sarvjeet Singh
जब से दिखी है वो हमें
हलचल मची है ज़ेहन में
Rachit Sonkar
तुम छोड़ गए तो मुझे एहसास हुआ ये
हाथों की पकड़ मेरी ही मज़बूत नहीं थी
Dipendra Singh 'Raaz'
हलचल मची हुई थी दिल-ए-बेक़रार में
सिगरेट पी रहा था तेरे इंतिज़ार में
Rekhta Pataulvi
हवाएँ चूम कर तुम ने
चिराग़ों को जलाया है

तेरी आवाज़ दस्तक है
ख़ुदा ने घर बुलाया है
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SIDDHARTH SHARMA
अबस दस्तक न दो वीरान दिल पर
मैं मरता अब नहीं होंठों के तिल पर
Ashish Kumar Tiwari
जिन्हें आवाज़ देना है वही चुप हैं
अकेले बोलता हूँ मैं सभी चुप हैं
Saarthi Baidyanath
मोजिज़ा कुछ तो है उस की आवाज़ में
ज़िन्दगी यूँँ नहीं ख़ुश-नवा है मिरी
Kiran K
एहसास नहीं होता लुटने का सनम हम को
जब आप की महफ़िल से हम लौट के आते हैं
Ajeetendra Aazi Tamaam
गया है छोड़ कर वो जब से मुझ को
सहम जाता हूँ दस्तक पर किसी की
Dipendra Singh 'Raaz'
आज़ फिर दर्द ने दस्तक दी है
आज़ फिर रात क़यामत होगी
Harun Umar
शौक़ है तुम को मेरी ग़ज़ल, मेरी आवाज़ में सुनने का
मेरे अश'आर में दर्दो-ग़म के सिवा कुछ भी तो है नहीं
A R Sahil "Aleeg"
कुछ तो है जो ख़ास है, कुछ है जो इक एहसास है
कुछ हमारे दरमियाँ ख़ामोश से अल्फ़ाज़ हैं
Prit
उस के माथे पर होंट रखे तो एहसास हुआ मुझ को
पारस को छू कर पत्थर सोना कैसे बन जाता है
Jay kishan
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बहुत ही आफ़रीं आवाज़ है तेरी
नहीं लगती थी पहले आज लगती है
A R Sahil "Aleeg"
छत पे जाने को बोल रहे हैं
फिर तह ख़ानों को खोल रहे हैं

दस्तक देने में डर लगता है
सो खुल जा सिम सिम बोल रहे हैं
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Shobhit Dixit
न कोई रंग न कोई भी रूप था उस का
अजब एहसास हुआ था हमें बहुत पहले
shaan manral
मैं अभी टूटा हुआ था मैं अभी जुड़ सा गया हूँ
एक आहट क्या हुई तेरी तरफ़ मुड़ सा गया हूँ
Umesh Maurya
आवाज़-ए-क़ैस सुन के सभी आशिक़-ए-जहाँ
दश्त-ए-जुनूँ की सिम्त को आमादा हो गए
Shajar Abbas
कहाँ ख़ुद पे फिर मेरा क़ाबू चलेगा
वो आवाज सुनली तो जादू चलेगा
Ashkrit Tiwari
कोई काटे च्यूँँटी तो हो मुझ को एहसास
कि मैं जी रहा हूँ या फिर मर चुका हूँ
Irshad Siddique "Shibu"
घर के आँगन में अगर पत्ता खड़कता है कोई
ऐसा लगता है कि तुम आए हो दस्तक देने
Shajar Abbas
जिन की मीठी चहकन सुन कर मेरा दिन पूरा होता था
अब उन चिड़ियों की आहट को जैसे कान तरस जाते हैं
Shiva awasthi
मैं ने ही आवाज़ नहीं दी थी वरना
जाने वाले रोके भी जा सकते थे
Ravi 'VEER'
जैसे जैसे लड़की पाँव बढ़ाती है
पानी में ख़ुद ही हलचल मच जाती है

इन भँवरों की जात है केवल मँडराना
असल मज़ा फूलों का तितली पाती है
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Jatin shukla
कितनी अच्छी लगती है ख़ामोशी की सरगोशी
जैसे तितलियाँ करती रहती हैं फूलों से नोशी
Meem Alif Shaz
सब ने यही सोचा की वो आवाज़ है
तूफ़ान तो ऐसे नहीं आता कभी
Meem Alif Shaz
अपने ही हाल पे रो देता हूँ अक्सर यारों
रोना भी ऐसा कि सिसकी की भी आहट न लगे
Aqib khan
वालिद को खोने के बा'द हुआ एहसास मुझे
बिन सूरज के इस दिन की कोई औक़ात नहीं
Irshad Siddique "Shibu"
आज अपने पराए हुए हैं
लोभ हलचल मचाए हुए हैं
Navneet krishna
सिलसिला ये है कि अब वो भी ख़फ़ा रहने लगा
ख़्वाब रूठा मेरी आँखों से जुदा रहने लगा

मेरे एहसास की चाँदी की चमक मद्धम है
जब से आपे में मुहब्बत का ख़ुदा रहने लगा
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Moni Gopal Tapish
जो राहें थीं ये फूलों सी
वाँ पर सारे दलदल निकले

तू इतना भी बेबस मत कर
इस दिल से फिर हलचल निकले
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Divya 'Kumar Sahab'
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इस बंजर का तुम हल बनके
बरसोगे कब तुम जल बनके

तुम याद करो मैं निकलूँगा
परछाई से हलचल बनके
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Divya 'Kumar Sahab'
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बहुत आवाज़ दी लोगों को मैं ने
बहुत से लोग गुम थे लौटते वक़्त
Sohil Barelvi
दिए जाते हैं दस्तक फिर नए दुख
उदासी चार-सू फैली पड़ी है
Sohil Barelvi
ज़ोर से दस्तक देना अब दरवाज़े पर
और तरह का शोर भी शामिल है घर में
Sohil Barelvi
मैं जब भी झाँकता हूँ ख़ुद में तो एहसास होता है
कि अपने बाप की उम्मीद पानी कर रहा हूँ मैं
"Nadeem khan' Kaavish"
उस ने कहा मुझ सेे यही तुम कुछ नहीं मेरे लिए
आवाज़ ने उस की कहा कहना इसे कुछ और था
Divya 'Kumar Sahab'
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रास्ता मिल ही न पाया खो गया जब
वक़्त ने आवाज़ दी मैं सो गया जब
Meem Alif Shaz
जब प्राण पखेरू चल पड़ते हैं गगन की ओर
तब साँस नहीं रहती एहसास नहीं रहते
Sandeep dabral 'sendy'
शाइरों से मिल के देखो ज़िन्दगी क्या चीज़ है
फिर तुम्हें एहसास होगा शा'इरी क्या चीज़ है

सब निशानी ले के मुझ सेे उस ने बोला आख़िरी
मैं अभी तक सोच में हूँ आख़िरी क्या चीज़ है
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"Nadeem khan' Kaavish"
भला क्यूँ हम किसी के आस में बैठे
मेरे यारा अगर तू पास में बैठे

कोई आए कोई जाए नहीं मतलब
मगर बस तू मेरे एहसास में बैठे
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Murari Mandal
सभी सीरत, सभी सूरत, सभी एहसास में हो तुम
मेरी आँखों की इक ही आस हैं, उस आस में हो तुम

मेरे ख़्वाबों में आ कर ख़ुद को तुम अच्छा बताते हो
चलो मैं मान लेता हूँ ख़ुदा के ख़ास में हो तुम

परेशानी में जैसे हाथ मेरे सर पे होता है
मुझे महसूस होता है कि जैसे पास में हो तुम
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"Nadeem khan' Kaavish"
अदालत में गवाही कौन देगा
कि सब ने मौत की आहट सुनी है
Meem Alif Shaz
इस भीड़ में कैसे मिलेगी ज़िन्दगी
जब ज़िन्दगी आवाज़ सुन पाती नहीं
Meem Alif Shaz
तुम्हें भी दूरी का एहसास होगा
तुम्हें भी याद आएगी हमारी
ABhishek Parashar
तिरे क़दमों की आहट सुन न पाए हम
ख़ुशी तू ने भी कितना दिल दुखाया है
Meem Alif Shaz
दिल-ओ-ज़ेहन में मेरे घर कर गए तुम
असरदार थे बे-असर कर गए तुम

सजाकर रखे थे जो एहसास अपने
अचानक इधर से उधर कर गए तुम
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Shubham Mishra
अपनी यादों से कहो और न दें दस्तक दिल पर
मकाँ कमज़ोर हुआ जाता है गिर जाएगा
Faiz Ahmad
शाम होते ही परिंदे लौट आए
और इक तुम हो कि आहट भी नहीं है
Meem Alif Shaz