Sardi Shayari Collection - Thandi hawa, yaadein aur sard raaton ki shayari

Sardi shayari captures the beauty of cold weather, silent nights, and warm emotions hidden beneath the chill. From cozy moments with chai to lonely sard raatein filled with yaadein, this collection expresses both comfort and quiet longing of winter. Perfect for sharing feelings that feel deeper in the cold season.

sardi shayari
ये सर्द रात ये आवारगी ये नींद का बोझ
हम अपने शहर में होते तो घर चले जाते
Ummeed Fazli
43 Likes
इस नदी की धार में ठंडी हवा आती तो है
नाव जर्जर ही सही, लहरों से टकराती तो है
Dushyant Kumar
33 Likes
इस नदी की धार में ठंडी हवा आती तो है
नाव जर्जर ही सही, लहरों से टकराती तो है
Dushyant Kumar
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सर्द रात है हवा भी सोच मत पहन मुझे
सुब्ह देख लेंगे किस कलर की शाल लेनी है
Neeraj Neer
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एक साया है घने पेड़ का मेरे सर पर
एक आँचल से मुझे ठंडी हवा आती है
Binte Reshma
पहनने को नहीं चप्पल, कड़कती ठंड में, फिर भी
मेरे गांव के बच्चें, घर में अपने जिद नहीं करते
Anurudh kumar shastri
दिसम्बर का महीना सर्द मौसम है
लबों पे मुस्कुराहट दिल में इक ग़म है
Kush Pandey ' Saarang '
सर्द मौसम यूँँ अचानक हो गया
चाँद-सूरज लग रहे रूठे हुए
"Nadeem khan' Kaavish"
हम ने तो अपनों के धोखे तक सहे हैं
सर्द मौसम की ये सर्दी क्या है? कुछ नइँ
Irshad Siddique "Shibu"
सर्द मौसम में ठिठुरते हुए जिस्मों के लिए
चादरें क्यूँँ न मजारों से उठा ली जाए
Faisal Yaseen
ये सर्द मौसम ये घनघोर कोहरा
आओ ज़रा तुम गले से लगा लो
Vishal sharma
दिसम्बर की सर्दी है बस तुम नहीं हो
अकेली रज़ाई से रुकती नहीं ठंड
Mohd Afsar
अब नहीं चाहिए ये दस्ताने
ठंड में तेरा हाथ पकड़ा है
Meem Alif Shaz
सुनो दिल की मेरी धड़कन मेरी फ़रियाद आ जाओ
अभी है ठंड का मौसम तुम इस के बा'द आ जाओ

नहीं लगता है मेरा दिल किसी सूरत किताबों में
सुनो! ऐसा करो अब तुम इलाहाबाद आ जाओ
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Mohd Ashahad
किसी चादर में जैसे ठंड से दुबका हुआ बच्चा
तुम्हारी गर्म बाहों में सिमट जाऊँ, अगर कह दो
Umesh Maurya
जिस को समझा था रौशनी-ए-क़मर
शख़्स ऐसा वो आबगीना था

उस सेे बिछड़े थे सर्द मौसम में
साल का पहला ही महीना था
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Puneet Mishra Akshat
वही सर्द मौसम वही फिर हवा है
नया कुछ दिखे तो नया साल मानूॅं
Manish Yadav
सर्द मौसम में अलालत से अगर बचना है तो
चाय से इश्क़ करो आग से याराना करो
Shajar Abbas
मिलें हम यार दोनों और फिर इक राय हो जाए
बड़ा है सर्द मौसम और दो कप चाय हो जाए
Kamlesh Goyal
एक बच्चा ठंड में बाहर ठिठूर कर मर गया
मख़मली चादर को ओढ़े सोए थे भगवान जी
Daqiiq Jabaalii
सलाम अपना अमीरों पे आम करता है
मगर गरीबों से कब वो कलाम करता है

लिहाफ़ ठंड में बाँटे गिलास गर्मी में
वो वोट पाने के सब इंतिज़ाम करता है
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Meem Alif Shaz
शह्र-ए-दिल के सर्द मौसम और सादा-रूह हम
सारी माचिस फूँक बैठे इक ज़रा सी आग को
pankaj pundir
सर्द मौसम है और आँखों में
हम ने आँसू उबाल रक्खे हैं
Chetan
मुहब्बत से गले मिल कर के रोना लाज़मी लेकिन
नई बुनियाद को ठंडी हवा से चोट लगती है
Rakesh Mahadiuree
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गर्मी की सुब्ह-सुब्ह की ठंडी हवा हो तुम
इस लू लगे मरीज़ की जाना शिफ़ा हो तुम

जिस को में हँसते-हँसते करूँँ शौक़ से क़ुबूल
ऐसे ही एक जुर्म की प्यारी सज़ा हो तुम
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Dipanshu Shams
सर्द मौसम में वो क़रीब आए
दिल का मौसम है सर्द बरसों से
'June' Sahab Barelvi
पहले ये काम बड़े प्यार से माँ करती थी
अब हमें धूप जगाती है तो दुख होता है
Munawwar Rana
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जिस की ख़ातिर कितनी रातें सुलगाई
जिस के दुख में दिल जाने क्यूँ रोता है

इक दिन हम सेे पूछ रही थी वो लड़की
प्यार में कोई पागल कैसे होता है
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Ritesh Rajwada
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उस वक़्त भी अक्सर तुझे हम ढूँढ़ने निकले
जिस धूप में मज़दूर भी छत पर नहीं जाते
Munawwar Rana
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इतना तो ज़िन्दगी में किसी के ख़लल पड़े
हँसने से हो सुकून न रोने से कल पड़े

जिस तरह हँस रहा हूँ मैं पी पी के गर्म अश्क
यूँँ दूसरा हँसे तो कलेजा निकल पड़े
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Kaifi Azmi
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रातें किसी याद में कटती हैं और दिन दफ़्तर खा जाता है
दिल जीने पर माएल होता है तो मौत का डर खा जाता है

सच पूछो तो 'तहज़ीब हाफ़ी' मैं ऐसे दोस्त से आज़िज़ हूँ
मिलता है तो बात नहीं करता और फोन पे सर खा जाता है
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Tehzeeb Hafi
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धूप पड़े उस पर तो तुम बादल बन जाना
अब वो मिलने आए तो उस को घर ठहराना।

तुम को दूर से देखते देखते गुज़र रही है
मर जाना पर किसी गरीब के काम न आना।
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Tehzeeb Hafi
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तुम सेे इक दिन कहीं मिलेंगे हम
ख़र्च ख़ुद को तभी करेंगे हम

धूप निकली है तेरी बातों की
आज छत पर पड़े रहेंगे हम
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Swapnil Tiwari
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रिश्तों की ये नाज़ुक डोरें तोड़ी थोड़ी जाती हैं,
अपनी आँखें दुखती हों तो फोड़ी थोड़ी जाती हैं

ये काँटे, ये धूप, ये पत्थर इनसे कैसा डरना है
राहें मुश्किल हो जाएँ तो छोड़ी थोड़ी जाती हैं
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Subhan Asad
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रुकें तो धूप से नज़रें बचाते रहते हैं
चलें तो कितने दरख़्त आते जाते रहते हैं
Charagh Sharma
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मुझे भी बख़्श दे लहजे की ख़ुश-बयानी सब
तेरे असर में हैं अल्फ़ाज़ सब, मआ'नी सब

मेरे बदन को खिलाती है फूल की मानिंद
कि उस निगाह में है धूप, छाँव, पानी सब
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Subhan Asad
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दिल को सुकून रूह को आराम आ गया
मौत आ गई कि दोस्त का पैग़ाम आ गया
Jigar Moradabadi
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धूप में निकलो घटाओं में नहा कर देखो
ज़िंदगी क्या है किताबों को हटा कर देखो
Nida Fazli
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सफ़र में धूप तो होगी जो चल सको तो चलो
सभी हैं भीड़ में तुम भी निकल सको तो चलो
Nida Fazli
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शदीद गर्मी में कैसे निकले वो फूल-चेहरा
सो अपने रस्ते में धूप दीवार हो रही है
Shakeel Jamali
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धूप के एक ही मौसम ने जिन्हें तोड़ दिया
इतने नाज़ुक भी ये रिश्ते न बनाए होते
Waseem Barelvi
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जो चराग़ सारे बुझा चुके उन्हें इंतिज़ार कहाँ रहा
ये सुकूँ का दौर-ए-शदीद है कोई बे-क़रार कहाँ रहा
Ada Jafarey
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हम ख़ुश हैं हमें धूप विरासत में मिली है
अज्दाद कहीं पेड़ भी कुछ बो गए होते
Shahryar
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इतना तो ज़िंदगी में किसी के ख़लल पड़े
हँसने से हो सुकून न रोने से कल पड़े
Kaifi Azmi
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ग़ुर्बत की ठंडी छाँव में याद आई उस की धूप
क़द्र-ए-वतन हुई हमें तर्क-ए-वतन के बा'द
Kaifi Azmi
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हाल पूछा न करे हाथ मिलाया न करे
मैं इसी धूप में ख़ुश हूँ कोई साया न करे
Kashif Husain Ghair
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वो रातें चाँद के साथ गईं वो बातें चाँद के साथ गईं
अब सुख के सपने क्या देखें जब दुख का सूरज सर पर हो
Ibn E Insha
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'इंशा'-जी उठो अब कूच करो इस शहर में जी को लगाना क्या
वहशी को सुकूँ से क्या मतलब जोगी का नगर में ठिकाना क्या
Ibn E Insha
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बे तेरे क्या वहशत हम को तुझ बिन कैसा सब्र-ओ-सुकूँ
तू ही अपना शहर है जानी तू ही अपना सहरा है
Ibn E Insha
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तेरी यादों की धूप आने लगी है
अभी खुल जाएगा मौसम हमारा
Subhan Asad
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धूप को साया ज़मीं को आसमाँ करती है माँ
हाथ रख कर मेरे सर पर सायबाँ करती है माँ

मेरी ख़्वाहिश और मेरी ज़िद उस के क़दमों पर निसार
हाँ की गुंज़ाइश न हो तो फिर भी हाँ करती है माँ
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Nawaz Deobandi
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सुकून क़ल्ब को जिस से मिल जाए 'ताबाँ'
ग़ज़ल कोई ऐसी सुना दीजिएगा
Anwar Taban
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धूप ये अठखेलियाँ हर रोज़ करती है
एक छाया सीढ़ियाँ चढ़ती उतरती है

ये दिया चौरास्ते का ओट में ले लो
आज आँधी गाँव से हो कर गुज़रती है
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Dushyant Kumar
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गहरी सोचें लम्बे दिन और छोटी रातें
वक़्त से पहले धूप सरों पे आ पहुँची
Aanis Moin
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ये काँटे, ये धूप, ये पत्थर इनसे कैसा डरना है
राहें मुश्किल हो जाएँ तो छोड़ी थोड़ी जाती हैं
Subhan Asad
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रंग बदला यार ने वो प्यार की बातें गईं
वो मुलाक़ातें गईं वो चाँदनी रातें गईं
Hafeez Jalandhari
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हम अपनी धूप में बैठे हैं 'मुश्ताक़'
हमारे साथ है साया हमारा
Ahmad Mushtaq
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धूप भी आराम करती थी जहाँ
अपना ऐसी छाँव से नाता रहा
Madan Mohan Danish
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इसीलिए मैं बिछड़ने पर सोगवार नहीं,
सुकून पहली ज़रूरत है, तेरा प्यार नहीं!

जवाब ढ़ूंढ़ने में उम्र मत गँवा देना,
सवाल करती है दुनिया पर एतबार नहीं
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Balmohan Pandey
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मैं बे-ख़याल कभी धूप में निकल आऊँ
तो कुछ सहाब मिरे साथ साथ चलते हैं
Farhat Abbas Shah
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जाने कैसे ख़ुश रहने की आदत डाली जाती है
उन के यहाँ तो बारिश में भी धूप निकाली जाती है
Ritesh Rajwada
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शोर की इस भीड़ में ख़ामोश तन्हाई सी तुम
ज़िन्दगी है धूप तो मद-मस्त पुर्वाई सी तुम

चाहे महफ़िल में रहूँ चाहे अकेले में रहूँ
गूँजती रहती हो मुझ में शोख़ शहनाई सी तुम
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Kunwar Bechain
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दिन तो ख़ैर गुज़र जाता है
रातें पागल कर देती हैं
Noon Meem Danish
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पराई बाँह में रातें बिता कर जब कभी दिन में
हमें टीवी पे देखोगे तो सोचो कितना रोओगे
Ritesh Rajwada
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इक कली की पलकों पर सर्द धूप ठहरी थी
इश्क़ का महीना था हुस्न की दुपहरी थी

ख़्वाब याद आते हैं और फिर डराते हैं
जागना बताता है नींद कितनी गहरी थी
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Vikram Gaur Vairagi
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धूप निकली है बारिशों के ब'अद
वो अभी रो के मुस्कुराए हैं
Anjum Ludhianvi
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धूप में कौन किसे याद किया करता है
पर तिरे शहर में बरसात तो होती होगी
Ameer Imam
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हिज्र की रातें इतनी भारी होती हैं
जैसे छाती पर ऐरावत बैठा हो
Tanoj Dadhich
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हसीन लड़कियाँ ख़ुश्बूएँ चाँदनी रातें
और इन के बा'द भी ऐसी सड़ी हुई दुनिया
Ameer Imam
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रिश्तों को जब धूप दिखाई जाती है
सिगरेट से सिगरेट सुलगाई जाती है
Ankit Gautam
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बस्ती बस्ती ख़ाक उड़ाये, बस वहशत का मारा हो
उस सेे इश्क़ की आस न करना जिस का मन बंजारा हो

ख़ुद को शाइ'र कहते रहना दिल को लाख सुकूँ दे दे
लेकिन दुनिया की नज़रों में तुम अब भी आवारा हो
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Daagh Aligarhi
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क्या वाक़ई वो तेरी पाज़ेब की खनक थी
ऐसा सुकून तो बस नुसरत के गाने में है
Neeraj Neer
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सताती हैं रुलाती हैं मुझे यादें दिसम्बर की
जगाती हैं जलाती हैं मुझे रातें दिसम्बर की
Munazzah Noor
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ऐ मिरी ज़ात के सुकूँ आ जा
थम न जाए कहीं जुनूँ आ जा

इस से पहले कि मैं अज़िय्यत में
अपनी आँखों को नोच लूँ आ जा
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Fareeha Naqvi
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कहाँ कहाँ पे उसे ढूँढ़ते हैं हम यारों
किसी के लम्स से होता था जो सुकूँ दिल को
Afzal Ali Afzal
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सुकून ए क़ल्ब होता है मुयस्सर
तेरा जब नाम आता है लबों पर
Kiran K
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साहिल के सुकूँ से किसे इनकार है लेकिन
तूफ़ान से लड़ने में मज़ा और ही कुछ है
Aale Ahmad Suroor
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ये कह के दिल ने मिरे हौसले बढ़ाए हैं
ग़मों की धूप के आगे ख़ुशी के साए हैं
Mahirul Qadri
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झूट पर उस के भरोसा कर लिया
धूप इतनी थी कि साया कर लिया
Shariq Kaifi
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जली हैं धूप में शक्लें जो माहताब की थीं
खिंची हैं काँटों पे जो पत्तियाँ गुलाब की थीं
Dagh Dehlvi
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तुम तो सर्दी की हसीं धूप का चेहरा हो जिसे
देखते रहते हैं दीवार से जाते हुए हम
Nomaan Shauque
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घर में ठंडे चूल्हे पर अगर ख़ाली पतीली है
बताओ कैसे लिख दूँ धूप फागुन की नशीली है
Adam Gondvi
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अब आ भी जाओ के सुकूंँ मिले मुझे
अगर जो जाना था तो क्यूँँंँ मिले मुझे

ज़माना हो न हो रकी़ब बीच में
तू अब कभी मिले तो यूँंँ मिले मुझे
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Faiz Ahmad
जिस किसी से तेरा चक्कर चल रहा था
उस को मैं अच्छी तरह से जानता था

रातें रौशन थी किसी की तुझ सेे दिलबर
तो किसी का तेरे बा'इस रत-जगा था
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Dileep Kumar
गुज़ार देते हैं रातें पहलू में उस के
जुगनू को भी दर का फ़क़ीर बना रखा है
ALI ZUHRI
चिलचिलाती धूप है और पैर में चप्पल नहीं
जिस्म घाइल है मगर ये हौसला घाइल नहीं
Tanoj Dadhich
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मुझ पे पड़ती नहीं बलाओं की धूप
सर पे साया-फ़िगन है माँ की दुआ
Amaan Haider
हवा चली तो उस की शॉल मेरी छत पे आ गिरी
ये उस बदन के साथ मेरा पहला राब्ता हुआ
Zia Mazkoor
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सुकून देती थी तब मुझ को वस्ल की सिगरेट
अब उस के हिज्र के फ़िल्टर से होंठ जलते हैं
Upendra Bajpai
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नींद उस की है दिमाग़ उस का है रातें उस की हैं
तेरी ज़ुल्फ़ें जिस के बाज़ू पर परेशाँ हो गईं
Mirza Ghalib
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एक ही शख़्स नहीं होता सदा दिल का सुकूँ
एक करवट पे कभी नींद नहीं आ सकती
Rehan Mirza
तुम तो सर्दी की हसीं धूप का चेहरा हो जिसे
देखते रहते हैं दीवार से जाते हुए हम
Nomaan Shauque
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वो सर्दियों की धूप की तरह ग़ुरूब हो गया
लिपट रही है याद जिस्म से लिहाफ़ की तरह
Musavvir Sabzwari
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तेज़ धूप में आई ऐसी लहर सर्दी की
मोम का हर इक पुतला बच गया पिघलने से
Qateel Shifai
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'अल्वी' ये मो'जिज़ा है दिसम्बर की धूप का
सारे मकान शहर के धोए हुए से हैं
Mohammad Alvi
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उसूली तौर पे मर जाना चाहिए था मगर
मुझे सुकून मिला है तुझे जुदा कर के
Ali Zaryoun
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न तीर्थ जा कर न धर्म ग्रंथो का सार पा कर
सुकूँ मिला है मुझे तो बस तेरा प्यार पा कर

ग़रीब बच्चे किताब पढ़ कर सँवर रहे हैं
अमीर लड़के बिगड़ रहे हैं दुलार पा कर
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Alankrat Srivastava
मुसीबतों में तो याद करते ही हैं किसी को ये लोग सारे
मगर कभी जो सुकूँ में आए ख़याल मेरा तो लौट आना
Hasan Raqim
तेरे बग़ैर ख़ुदा की क़सम सुकून नहीं
सफ़ेद बाल हुए हैं हमारा ख़ून नहीं

न हम ही लौंडे लपाड़ी न कच्ची उम्र का वो
ये सोचा समझा हुआ इश्क़ है जुनून नहीं
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Shamim Abbas
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सावन-रुत और उड़ती पुर्वा तेरे नाम
धूप-नगर से है ये तोहफ़ा तेरे नाम
Tajdar Adil
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हुआ जो इश्क़ तो वो रोज़ ओ शब को भूल गए
वो अपने इश्क़ ए नुमाइश में सब को भूल गए

कहाँ वो दुनिया में आए थे बंदगी के लिए
मिला सुकून जहाँ में तो रब को भूल गए
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Hameed Sarwar Bahraichi
मैं भटकता ही रहा दश्त-ए-शनासाई में
कोई उतरा ही नहीं रूह की गहराई में

क्या मिलाया है बता जाम-ए-पज़ीराई में
ख़ूब नश्शा है तेरी हौसला-अफ़जाई में

तेरी यादों की सुई, प्रेम का धागा मेरा
काम आए हैं बहुत ज़ख़्मों की तुरपाई में

डस रही है ये सियह-रात की नागिन मुझ को
भर रही ज़हर-ए-ख़मोशी, रग-ए-तन्हाई में

सुर्मा-ए-मक्र-ओ-फ़रेब आँखों में जब से है लगा
तब से है ख़ूब इज़ाफ़ा हद-ए-बीनाई में

फ़िक्र-ओ-फ़न, रंग-ए-तग़ज़्ज़ुल, न ग़ज़ल की ख़ुशबू
बस लगा रहता हूँ मैं क़ाफ़िया-पैमाई में

सीख पानी से हुनर काम 'अनीस' आएगा
दौड़ कर ख़ुद ही चला आता है गहराई में
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Anis shah anis
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धूप तो धूप ही है इस की शिकायत कैसी
अब की बरसात में कुछ पेड़ लगाना साहब
Nida Fazli
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मैं बहुत ख़ुश था कड़ी धूप के सन्नाटे में
क्यूँँ तेरी याद का बादल मेरे सर पर आया
Ahmad Mushtaq
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हम को न मिल सका तो फ़क़त इक सुकून-ए-दिल
ऐ ज़िंदगी वगरना ज़माने में क्या न था
Azad Ansari
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क़सम ख़ुदा की बड़े तजरबे से कहता हूँ
गुनाह करने में लज़्ज़त तो है सुकून नहीं
Mehshar Afridi
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ये किस अज़ाब में छोड़ा है तू ने इस दिल को
सुकून याद में तेरी न भूलने में क़रार
Shohrat Bukhari
बेचता यूँँ ही नहीं है आदमी ईमान को
भूख ले जाती है ऐसे मोड़ पर इंसान को

शबनमी होंठों की गर्मी दे न पाएगी सुकून
पेट के भूगोल में उलझे हुए इंसान को
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Adam Gondvi
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