Bharosa Shayari - Dil ke rishte, trust aur wafadari ki gehri shayari

Bharosa shayari captures the delicate emotion of trust in relationships, whether it’s love, friendship, or life itself. It reflects yakeen, loyalty, and sometimes the pain of broken trust. These lines help express what words often cannot when trust is built or shattered.

bharosa shayari
हैं बाशिंदे उसी बस्ती के हम भी
सो ख़ुद पर भी भरोसा क्यूँ करें हम
Jaun Elia
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vishwas shayari
दीवारें छोटी होती थीं लेकिन पर्दा होता था
तालों की ईजाद से पहले सिर्फ़ भरोसा होता था
Azhar Faragh
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aitbaar shayari
है दुख तो कह दो किसी पेड़ से परिंदे से
अब आदमी का भरोसा नहीं है प्यारे कोई
Madan Mohan Danish
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trust shayari
हिम्मत, ताकत, प्यार, भरोसा जो है सब इनसे ही है
कुछ नंबर हैं जिन पर मैं ने अक्सर फोन लगाया है
Pratap Somvanshi
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yakeen shayari
झूट पर उस के भरोसा कर लिया
धूप इतनी थी कि साया कर लिया
Shariq Kaifi
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उसे भी धोका मिलेगा यक़ीन है मुझ को
भरोसा वो भी किसी पर तो कर रहा होगा
Aqib Jawed
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डरा-धमका के तुम हम सेे वफ़ा करने को कहते हो
कहीं तलवार से भी पाँव का काँटा निकलता है
Munawwar Rana
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इस से पहले कि बे-वफ़ा हो जाएँ
क्यूँँ न ऐ दोस्त हम जुदा हो जाएँ
Ahmad Faraz
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इस ज़माने को ज़माने की अदा आती है
और इक हम है हमें सिर्फ़ वफ़ा आती है
Zubair Ali Tabish
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तेरे ख़त आज लतीफ़ों की तरह लगते हैं
ख़ूब हँसता हूँ जहाँ लफ़्ज़-ए-वफ़ा आता है
Zubair Ali Tabish
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चुप रहते हैं चुप रहने दो राज़ बताओ खोले क्या
बात वफ़ा की तुम करती हो बोलो हम कुछ बोले क्या

उल्फ़त तो अफ़साना है तुम करती खूब सियासत हो
हम भी हैं मक़बूल बहुत अब बोल किसी के होलें क्या
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Anand Raj Singh
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चारों तरफ़ बिखर गईं साँसों की ख़ुशबुएँ
राह-ए-वफ़ा में आप जहाँ भी जिधर गए
Kumar Vishwas
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ये सोच कर कोई अहद-ए-वफ़ा करो हम सेे
हम एक वादे पे 'उम्रें गुज़ार देते हैं
Waseem Barelvi
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दोस्त ने दिल को तोड़ के नक़्श-ए-वफ़ा मिटा दिया
समझे थे हम जिसे ख़लील का'बा उसी ने ढा दिया
Arzoo Lakhnavi
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या तेरे अलावा भी किसी शय की तलब है
या अपनी मोहब्बत पे भरोसा नहीं हम को
Shahryar
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उस दुश्मन-ए-वफ़ा को दुआ दे रहा हूँ मैं
मेरा न हो सका वो किसी का तो हो गया
Hafeez Banarasi
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आसान नहीं मरहला-ए-तर्क-ए-वफ़ा भी
मुद्दत हुई हम इस को भुलाने में लगे हैं
Hafeez Banarasi
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हम से कोई तअल्लुक़-ए-ख़ातिर तो है उसे
वो यार बा-वफ़ा न सही बे-वफ़ा तो है
Jameel Malik
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तुझे मेरी मोहब्बत पे ऐतिबार हो जाना
मुमकिन नहीं है गधे का समझदार हो जाना
Bhavesh kumar
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दिल से निकलेगी न मर कर भी वतन की उल्फ़त
मेरी मिट्टी से भी ख़ुशबू-ए-वफ़ा आएगी
Lal Chand Falak
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'शाद' ग़ैर-मुमकिन है शिकवा-ए-बुताँ मुझ से
मैं ने जिस से उल्फ़त की उस को बा-वफ़ा पाया
Shaad Arfi
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कभी ये भी नहीं पूछा है गर्दन पे निशाँ कैसा
हमें अंधी मोहब्बत थी हमें अंधा भरोसा था
Shayra kirti
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मुझे छोड़ दे मेरे हाल पर तिरा क्या भरोसा है चारा-गर
ये तिरी नवाज़िश-ए-मुख़्तसर मेरा दर्द और बढ़ा न दे
Shakeel Badayuni
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गुमान है या किसी विश्वास में है
सभी अच्छे दिनों की आस में है

ये कैसा जश्न है घर वापसी का
अभी तो राम ही वनवास में है
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Azhar Iqbal
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तुम मिरी ज़िंदगी हो ये सच है
ज़िंदगी का मगर भरोसा क्या
Bashir Badr
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अब इन हुदूद में लाया है इंतिज़ार मुझे
वो आ भी जाएँ तो आए न ऐतिबार मुझे
Khumar Barabankvi
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जब अपना दिल ख़ुद ले डूबे औरों पे सहारा कौन करे
कश्ती पे भरोसा जब न रहा तिनकों पे भरोसा कौन करे
Anand Narayan Mulla
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दिल को तेरी चाहत पे भरोसा भी बहुत है
और तुझ से बिछड़ जाने का डर भी नहीं जाता
Ahmad Faraz
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हर-चंद ए'तिबार में धोके भी हैं मगर
ये तो नहीं किसी पे भरोसा किया न जाए
Jaan Nisar Akhtar
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वो कहते हैं मैं ज़िंदगानी हूँ तेरी
ये सच है तो उन का भरोसा नहीं है
Aasi Ghazipuri
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हम आज राह-ए-तमन्ना में जी को हार आए
न दर्द-ओ-ग़म का भरोसा रहा न दुनिया का
Waheed Quraishi
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जान तुझ पर कुछ ए'तिमाद नहीं
ज़िंदगानी का क्या भरोसा है
Khan Arzoo Sirajuddin Ali
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उस की ख़्वाहिश पे तुम को भरोसा भी है उस के होने न होने का झगड़ा भी है
लुत्फ़ आया तुम्हें गुमरही ने कहा गुमरही के लिए एक ताज़ा ग़ज़ल
Irfan Sattar
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यक़ीं कैसे करूँँ वादों पे तेरे साथ रहने के
यही वादे किए होंगे उन्होंने भी जो बिछड़े हैं
Priya Dixit
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तुम्हारी ख़ानदानी रस्म रस्म-ए-बेवफ़ाई है
हमीं पागल थे जो तुम पर भरोसा कर लिया हम ने
Shajar Abbas
जिस की फ़ितरत ही बे वफ़ाई हो
उस सेे उम्मीद-ए-वफ़ा क्या करना
Ajeetendra Aazi Tamaam
तिरा दिल मुस्कुराएगा दुआ है
हमें भी तो भरोसा है ख़ुदा पर
Meem Alif Shaz
भरोसा मुझ पे रक्खो और कुछ पल
रुका हूँ, मैं अभी हारा नहीं हूँ
Divy Kamaldhwaj
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जहाँ तक मुझ सेे मतलब है जहाँ को
वही तक मुझ को पूछा जा रहा है

ज़माने पर भरोसा करने वालों
भरोसे का ज़माना जा रहा है
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Naeem Akhtar Khadimi
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बेशक तू बे-वफ़ा का सनम नाम दे मुझे
बा'द आज़माने के मगर इल्ज़ाम दे मुझे
Ajeetendra Aazi Tamaam
बे-वफ़ा शख़्स तेरे होंठों पे ये लफ़्ज़-ए-वफ़ा
सच बताऊँ मुझे बिल्कुल नहीं अच्छा लगता
Shajar Abbas
थी इक वक़्त अब शा'इरी बस बची है
यक़ीं करना मुझ
में मुहब्बत नहीं है
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Parul Singh "Noor"
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कटी उम्र सारी वफ़ा करते करते
किसी की मुहब्बत अदा करते करते

वो थकता नहीं है ज़फा करते करते
मैं थकती नहीं हूँ दुआ करते करते
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Shadab Asghar
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भरोसा तोड़ कर अच्छा किया तुम ने
मैं दुनिया पर भरोसा करने वाला था
Aatish Alok
तुम जितना तो कोई मुझ को ख़ास नहीं
लेकिन फिर भी क्यूँ तुम को विश्वास नहीं

मुझ सेे बेहतर लड़का तो मिल जाएगा
लेकिन मेरी माँ से बेहतर सास नहीं
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Tanoj Dadhich
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भले ही जान-लेवा हो सियासत को ग़लत कहना
मगर फिर भी ये सच ईमान वाले लोग कहते हैं
Amaan Pathan
ख़ुद से मैं ये कहता हूँ कि सब ठीक है लेकिन
मुझ को मिरी बातों पे भरोसा भी नहीं है
Amaan Pathan
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अंजाम-ए-वफ़ा ये है जिस ने भी मोहब्बत की
मरने की दुआ माँगी जीने की सज़ा पाई
Nushur Wahidi
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ख़ुद से मैं ये कहता हूँ कि सब ठीक है लेकिन
मुझ को मिरी बातों पे भरोसा भी नहीं है
Amaan Pathan
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ग़लती मिरी है मुझ को तिरा ऐतिबार था
मेरी यही सज़ा है मुझे शर्मसार कर
Amaan Pathan
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जीना वो क्या जो हो नफ़स-ए-ग़ैर पर मदार
शोहरत की ज़िंदगी का भरोसा भी छोड़ दे
Allama Iqbal
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जिन पे होता है बहुत दिल को भरोसा 'ताबिश'
वक़्त पड़ने पे वही लोग दग़ा देते हैं
Tabish Dehlvi
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बेचता यूँँ ही नहीं है आदमी ईमान को
भूख ले जाती है ऐसे मोड़ पर इंसान को

शबनमी होंठों की गर्मी दे न पाएगी सुकून
पेट के भूगोल में उलझे हुए इंसान को
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Adam Gondvi
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ऐ वतन इक रोज़ तेरी ख़ाक में खो जाएँगे सो जाएँगे
मर के भी रिश्ता नहीं छूटेगा हिंदुस्तान से ईमान से
Rahat Indori
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करूँँ तो कैसे करूँँ तुझ पे मैं यक़ीन बता
नहीं है ख़ुद पे भी जब कोई ऐतिबार मुझे
Amaan Pathan
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मैं ख़ानदान की पाबंदियों से वाक़िफ़ थी
ख़ुदा का शुक्र है उस शख़्स ने वफ़ा नहीं की
Komal Joya
एक वा'दा है किसी का जो वफ़ा होता नहीं
वर्ना इन तारों भरी रातों में क्या होता नहीं
Saghar Siddiqui
जानता हूँ, है जहाँ ये झूठ लेकिन
मैं भरोसा तुम पे करना चाहता हूँ
Charagh
इक आख़िरी रस्म निभा लो कि अब ये रिश्ता तोड़ देते हैं
तुम तो जा ही चुकी हो हम भी अब तुम सेे मुँह मोड़ लेते हैं

थी झूठी सब क़स
में, थे झूठे सब वादे, और वो तुम्हारे फ़रेबी इरादे
उम्मीद-ए-वफ़ा तुम सेे नहीं, वफ़ा का ज़िम्मा भी ख़ुद ही पे छोड़ देते हैं
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Shashank Tripathi
यूँ मेरे ख़्वाबों को हसीं बना कर तुम क्या पाओगे
मुझ सेे नजदीकियां बढ़ाने की तुम सज़ा पाओगे

मैं बदनाम हूँ किसी से मोहब्बत की ख़ातिर "निहार"
मुझ सेे इश्क़ कर के तुम फ़क़त दर्द-ए-वफ़ा पाओगे
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Shashank Tripathi
मुझे अगले पल का भरोसा नहीं कोई
लोग कहते है सो साल जियेंगे आप
karan singh rajput
कैसी वफ़ा तुझ सेे निभा जाता यहाँ पत्ता बिछड़
सीधे शजर से आ हथेली पर तिरे गिर जाए जो
Zain Aalamgir
के अलग चलता मिरा धंदा, समझ ना तुम सकोगे
बेचता हूँ मैं दग़ा ले कर वफ़ा ही जो हमेशा
Zain Aalamgir
हमारी वफ़ा का वो इंसाफ़ होगा
तिरी आँख से जब ये काजल छटेंगे
Aarush Sarkaar
जो वफ़ा करते हैं उन को तो सज़ा मिलती है
बेवफाओं को ही ईनाम-ए-वफ़ा मिलती है
Aditya
वफा के नाम पर हम सेे ज़फा करता रहा जो दिल
हमारी नींद सपने सब वो पल भर में उड़ा निकला
Kavi Bhimsen Singh Ujjwal
अजी मेरा यक़ीं करिए, वही लड़का है ये जिस के
कभी ए बी सी डी में लड़खड़ाते थे ज़बाँ के पाँव
Aarush Sarkaar
तेरी मासूम सूरत पर भरोसा हम करें कैसे
तेरी आँखों के काजल पर दोबारा हम मरें कैसे

मोहब्बत ने दिए जो घाव अब वो घाव जलते हैं
तुम्हीं अब ये बताओ की मोहब्बत हम करें कैसे
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Ravi 'VEER'
बातें करो तो ऐसी कि दुनिया यक़ीं करे
ये क्या कि तुम को मेरा कोई मिस्ल मिल गया
Haider Khan
भरोसा ख़ुद पे होता है जहाँ पर
वही पहुँचा है अक्सर आसमाँ पर

बहुत जल्दी समझ लो बात सारँग
कोई अपना नहीं होता यहाँ पर
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Kush Pandey ' Saarang '
ये मुसलसल बिछड़ते जाते है
बद-दुआ है वफ़ा निगारों को
Sandeep kuthe
जफ़ा जो कर सके बदले वफ़ा के
मोहब्बत उस के दर सज्दा करेगी
Ashutosh Kumar "Baagi"
जिस के लिए थे कर रहे शादी की बात घर
उस ने कहा कि तुमपे भरोसा नहीं रहा
Prashant Sitapuri
दे दी ज़बान फिर भी भरोसा नहीं हुआ
अब ऐसा क्या करें जो उन्हें ए'तिबार हो
Prashant Sitapuri
वक़्फ़ हो "अशरफ़" वफ़ा की राह पर तुम इस लिए
ख़्वाहिशों को मार दो, ख़ुदगरज़ियाँ अंदर रखो
Ashraf Ali
भरोसा कौन अब किस पर करेगा और कैसे
भरोसा तोड़ने वाला हमारा यार निकला
Atul K Rai
महसूस कर रहा हूँ तेरा शुमार ख़ुद में
सो झाँकने लगा हूँ मैं बार-बार ख़ुद में

तेरी चमक से रौशन हर रहगुज़ार होगा
इतना तो मेरे जुगनू रख ऐतिबार ख़ुद में
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Karan Sahar
अंजाम-ए-वफ़ा है 'जाज़िब' रक़्स करूँँगा मैं
ये ग़म तो ख़रा है 'जाज़िब' रक़्स करूँँगा मैं

फिर छोड़ के मुझ को आगे जाते हुए मुझ से
उस ने भी कहा है 'जाज़िब' रक़्स करूँँगा मैं
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Chandan Sharma
बा-वफ़ा या बे-वफ़ाई की कहानी,
इश्क़ में तुम दो मुझे कोई निशानी
Vedic Dwivedi
झूठा है सच्चा भी तो हो सकता है
चश्मा है गन्दा भी तो हो सकता है

बारिश केवल बादल की मज़बूरी है?
बादल का ग़ुस्सा भी तो हो सकता है
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Atul K Rai
भरोसा भाईयों पर कर रहा हूँ
वसीयत तक ज़ुबानी चल रही है
Hamza Bilal
जिन लोगों पर मैं विश्वास जताता हूँ
उन लोगों से ही धोखा खा जाता हूँ

मैं ने लोगों के चेहरे पढ़ रक्खे हैं
फिर भी उन की बातों में आ जाता हूँ
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Aman G Mishra
सुनी है ये ख़बर जबसे भरोसा उठ गया मेरा
दवाई खा रहे थे जो दवाई खा गई उन को
Tarique Jamal
सितारों ने कभी सोचा, हुए जो दिन कहाँ जाएँ
गुज़ारे दिन जो हैं हम ने उन्हें गिन-गिन कहाँ जाएँ

कभी हम भी वफ़ा के नाम से मशहूर थे लेकिन
नहीं मालूम अब हम को तुम्हारे बिन कहाँ जाएँ
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Naimish trivedi
अच्छा तुम इक बात बताओ, सच कहना
किस के सह थे रात बताओ, सच कहना

ना मुझ को तुम पे बिल्कुल विश्वास नहीं
सर पे रख के हाथ बताओ, सच कहना
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Sarvjeet Singh
लोगों पर अब भरोसा नहीं है
मैं हवाओं से दुख बाँटता हूँ
karan singh rajput
ख़ुद से ज़्यादा कभी किसी पर सुनो
अब शजर ऐतिबार मत करना
Shajar Abbas
ख़ुदा करे न मिले तुझ सा बा-वफ़ा मुझ को
ख़ुदा करे तुझे अब मुझ सा बे-वफ़ा न मिले
Shajar Abbas
कोई गर शक हो तो फिर आज़माकर देख लेना तुम
कभी इस प्यार के सागर में आ कर देख लेना तुम

मुझे विश्वास है मेरी मोहब्बत पर सुनो इतना
मुझे गर भूल पाओ तो बुला कर देख लेना तुम
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Sanya rai
आप से तो कुछ भी है छुपा नहीं हुआ
फिर आप को भी क्यूँँ भरोसा नहीं हुआ?
Abhishek Bhadauria 'Abhi'
भला कैसे वफ़ा के तौर हैं ये
भला कैसी हमारी दोस्ती है
Prasoon
अब आइना मेरा सहारा ना रहा
वो मर गया मुझ पे भरोसा था जिसे
Pushkar Tripathi
भरोसा आप को इतना है मुझ पे
भरोसा टूट भी सकता है समझे
Kush Pandey ' Saarang '
मोहब्बत नशा है, नशा है मोहब्बत
जिसे पहले होश आया वो बे-वफ़ा है
Abuzar kamaal
इस बार तो लगता हमें बस ग़म मिलेंगे
इक ख़्वाब ही तो है ये के जानम मिलेंगे

अगले जनम में ना मुझे विश्वास वैसे
पर मान लेता हूँ कि उस
में हम मिलेंगे
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Sarvjeet Singh
मोहब्बत में मिले हैं इतने धोखे
मोहब्बत से भरोसा उठ गया है
Shajar Abbas
मिलोगी तुम मुझे ही बा'द में जाना
भरोसा था मिरे दिल को ज़माने से
Kaviraj " Madhukar"
भरोसा इस ज़माने में करें किस पर
टके में बिक रहीं अख़बार की बातें
Vivek Vistar
हमारा य़कीं था कि सच्चे ही हो तुम
मगर तुम भी निकले ज़माने के जैसे
"Nadeem khan' Kaavish"
करेंगे हर पल वफ़ा तुम से इंशा-अल्लाह जाँनाँ
जफ़ा कर बैठूँ तो इल्ज़ाम रब की मर्ज़ी पे होगा
A R Sahil "Aleeg"
मत करो इन हसीं लोगों पे शजर इतना यक़ीं
ये हसीं लोग हैं पल भर में बदल जाते हैं
Shajar Abbas
वफ़ा याद कर जान मेरी
बता फिर सितम यार मेरा
MOHSIN JAHANGIR
दोस्ती में हो रहे हैं आज जो वादे वफ़ा
ये हबीब इबने मज़ाहिर आप का एहसान है
''Akbar Rizvi"
कभी तू यक़ीं कर किसी ग़ैर पर दोस्त
ये धोखा तुझे भी बराबर मिलेगा
shaan manral
वफ़ा चाहा मगर धोखा हुआ
चलो जो भी हुआ अच्छा हुआ
Irshad Siddique "Shibu"
कुछ किताबें इस जहाँ में इस क़दर बदनाम हैं
आदमी का इन किताबों से भरोसा उठ गया
Saarthi Baidyanath
वो बे-वफ़ा रहे पर मुझ को वफ़ा रहेगी
आख़िर वो कब तलक ही मुझ सेे जुदा रहेगी

मुझ को यक़ीन इक दिन वो आ मिलेगी मुझ सेे
तितली भी फूल से यूँँ कब तक ख़फ़ा रहेगी
Read Full
Ravi 'VEER'
किसी की बात पर कर के भरोसा
हम अपना वक़्त ज़ाया' कर रहें हैं
gulab muntazir