Ashraf Ali

Ashraf Ali

@Ashraf-Ali

Ashraf Ali shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Ashraf Ali's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
  • Nazm
बात आगे बढ़ चुकी है बस ज़रा सी बात पर
उँगलियाँ उठने लगी हैं अब हमारी ज़ात पर

अपनी मर्ज़ी के मुताबिक़ ही तुम्हें करता हूँ याद
मैं ने क़ाबू पा लिया है नफ़्स पर जज़्बात पर
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Ashraf Ali
चाक पैवंद सीने चलते हैं
चंद लम्हात जीने चलते हैं

छोड़िए भी उदास क्या रहना
आइए चाय पीने चलते हैं
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Ashraf Ali
जो भी मुझ
में बाक़ी है गड़बड़ी निकालूँगा
चाबियाँ बनाऊँगा, हथकड़ी निकालूँगा

ये जो तुम शरीफ़ों को धौंस देते फिरते हो
एक दिन तुम्हारी भी हेकड़ी निकालूँगा
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Ashraf Ali
बे-वजह नज़्म-सराई से मुझे क्या लेना
तेरी अंगुश्त-नुमाई से मुझे क्या लेना

तुझ को पाने की तमन्ना ही नहीं रखता मैं
फिर तेरे बाप से भाई से मुझे क्या लेना
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Ashraf Ali
फ़िलहाल मेरे ग़म की दवा कुछ भी नहीं है
सब ठीक नहीं और हुआ कुछ भी नहीं है

तुम भी वही हम भी वही हालात वही हैं
हर बात पुरानी है नया कुछ भी नहीं है
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Ashraf Ali
पुतलियों में घुला समुंदर है
मोतियों की दुकान आँखें हैं

आप तहक़ीक़ ही नहीं करते
सब ख़ज़ानों की खान आँखें हैं
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Ashraf Ali
है इल्म दुनिया को ज़हरा के चैन जीत गए
अली के नस्ल के सब नूर-ए-ऐन जीत गए

मेरे नबी के नवासे ने ऐसा सज़दा किया
यज़ीद हार गया और हुसैन जीत गए
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Ashraf Ali
शाख़ पे गुल कभी खिले ही नहीं
चाक दिल भी कभी सिले ही नहीं

एक ही शहर में हैं हम दोनों
फिर भी बरसों हुए, मिले ही नहीं
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Ashraf Ali
रूठी क़िस्मत को समझाना मुश्किल है
हर मुश्किल का हल मिल पाना मुश्किल है

इस हफ़्ते भी काम बहुत है ऑफ़िस में
इस हफ़्ते भी घर जा पाना मुश्किल है
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Ashraf Ali
पहले तो तुम्हें जान पुकारेंगे यही लोग
फिर ख़ुद ही तुम्हें जान से मारेंगे यही लोग

मुँह पर तो बड़े फ़ख्र से ता'ईद करेंगे
फिर पीठ में खंज़र भी उतारेंगे यही लोग
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Ashraf Ali
ग़म-ए-हयात में यूँँ ढह गया नसीब का घर
कि जैसे बाढ़ में डूबा हुआ गरीब का घर

वबायें आती गईं और लोग मरते गए
हमारे गाँव में था ही नहीं तबीब का घर
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Ashraf Ali
चमन में फूल सब मुरझा रहे हैं
ये बादल आग क्यूँँ बरसा रहे हैं

कबीले पर मेरे हमला हुआ है
मेरे सब लोग मारे जा रहे हैं
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Ashraf Ali
दु'आओं का असर इक बार हो जाए तो क्या कहने
उसे भी मेरे जितना प्यार हो जाए तो क्या कहने

इधर मैं भी हूँ रोज़े से उधर वो भी है रोज़े से
किसी दिन साथ में इफ़्तार हो जाए तो क्या कहने
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Ashraf Ali
है नाज़ मुझ को आप मेरे राब्ते में हैं
मेरे भी हिस्से आ गए कुछ शानदार लोग

ज़िंदादिली का ज़िक्र कहीं हो रहा हो तो
सुनते ही याद आते हैं बचपन के यार लोग
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Ashraf Ali
हैं दफ़्न दिल में जो राज़ सारे मिलो तो तुम पर अयाँ करूँँगा
तमाम चाहत तमाम उल्फ़त तमाम हसरत बयाँ करूँँगा

है एक जंगल हमारे भीतर जो इक सदी से सुलग रहा है
ख़ुशी का छलका कभी जो आँसू बुझा के इस को धुआँ करूँँगा
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Ashraf Ali
तुम बिन शायद जी न पाऊँ ऐसा पहले लगता था
लेकिन अब भी जिन्दा हूँ या'नी भरम था टूट गया
Ashraf Ali
निकम्में हुक्मरानों की सलामी छोड़ दी मैं ने
सो अब आज़ाद हूँ या'नी गुलामी छोड़ दी मैं ने
Ashraf Ali
मुझ को हिन्दू या मुसलमान समझने वालों
मैं ने इंसान ही रहने की क़सम खायी है
Ashraf Ali
सब महँगे ज़ेवरात की क़ीमत घटाऊँगा
सोने का नाम आज से पीतल करूँँगा मैं
Ashraf Ali
कोई तो सदमा लगा है ज़रूर मुझ को भी
थकन शदीद है और नींद भी उड़ी हुई है

नजूमी तकते हैं बेचारगी से मेरी तरफ़
लकीर माथे पे जितनी भी थी मिटी हुई है
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Ashraf Ali

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