Gulfam Ajmeri

Gulfam Ajmeri

@Gulfamalikhan

Gulfam Ali Khan shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Gulfam Ali Khan's shayari and don't forget to save your favorite ones.

Followers

9

Content

46

Likes

73

Shayari
Audios
  • Sher
  • Ghazal
अब तो मैं भी हर मरासिम को भुला सकता हूँ दोस्त
गर यक़ीं आता नहीं दिल से उतर के देख ले
Gulfam Ajmeri
वैसे इस का तो इरादा भी नहीं जीने का अब
फिर भी चारा-गर कोई कोशिश ही कर के देख ले
Gulfam Ajmeri
वो घुट के रह गई घूँघट की आड़ में
वो कह न पाई कि लड़का नहीं पसंद
Gulfam Ajmeri
अजब अंदाज़ से ये घर गिरा है
मिरा मलबा मिरे ऊपर गिरा है
Gulfam Ajmeri
जुस्तुजू भी न रही और न कोई निस्बत
अब तो हालात के मारे भी नहीं आएँगे
Gulfam Ajmeri
क्या अब यही है सच कि मुहब्बत नहीं रही
मतलब यही के तुम को भी हसरत नहीं रही

कल रात तुम ने हम को निकाला जो बज़्म से
यारों में बात क्या रहे इज़्ज़त नहीं रही

जिस जिस भी कूचे में गए खाए हैं ज़ख़्म ही
अब और दिल लगाने की हसरत नहीं रही

तन्हाई भी है दर्द भी है तेरा ग़म भी है
अब मेरे कमरे में कोई ख़ल्वत नहीं रही

अब तो सितम ये है के सितमगर ने कह दिया
अब और सितम को तेरी ज़रूरत नहीं रही

हम जिस के पहलू से चले आए हैं दश्त में
वो दर नहीं रहा कि वो निस्बत नहीं रही

बाज़ार-ए-इश्क़ में भी पुकारे गए मगर
वो दिन नहीं रहे के वो क़ीमत नहीं रही
Read Full
Gulfam Ajmeri
ऐसा न हो मुझ पर तरस खा जाए तू
आँखों का क्या आँखें तो बहती रहती है
Gulfam Ajmeri
तुझ से मिलें बातें करें सो आ बैठे
हम और इरादे से नहीं आए हैं
Gulfam Ajmeri
देखूँ जो ख़ुद को दिखता है बस उस का अक्स
सो सारे आईने जला के बैठा हूँ

उस ने कहा था लौट कर आऊँगा मैं
जब से नज़र दर पे लगा के बैठा हूँ
Read Full
Gulfam Ajmeri
बस वो दीया जलाने को सोचें
और जंगल में आग लग जाए
Gulfam Ajmeri
गिला कुछ भी नहीं है मौत से मुझ को पर
ख़ुदा लेने अगर आया तो जाऊँगा मैं
Gulfam Ajmeri
बस रह न पाए हम हमारे ही मगर
इस खेल में वैसे तो हारे कुछ नहीं

पागल हो जाए देख ले बस इक नज़र
फिर तो तुम्हारे जादू टोने कुछ नहीं
Read Full
Gulfam Ajmeri
मुहब्बत आठवीं कर तो लें हम भी पर
ज़रा सातों का दुख भी कम हुआ होता

नहीं की ख़ुद-कुशी ये सोच कर मैं ने
फ़क़त अब मौत से भी मेरा क्या होता
Read Full
Gulfam Ajmeri
सब पूछते हैं इस उदासी का सबब
रो देते हैं लेकिन उगलते कुछ नहीं
Gulfam Ajmeri
जब हाथ उस का पकड़ा तो कहने लगी
मेरी सुनो शादी से पहले कुछ नहीं
Gulfam Ajmeri