Kuldeep Tripathi KD

Kuldeep Tripathi KD

@Kuldeep_429

Kuldeep Tripathi KD shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Kuldeep Tripathi KD's shayari and don't forget to save your favorite ones.

Followers

11

Content

31

Likes

194

Shayari
Audios
  • Sher
  • Ghazal
जंग या मुहब्बत में है अगर जो सब जायज़
क़त्ल करते हम उन का शा'इरी नहीं करते
Kuldeep Tripathi KD
इश्क़ है जाने क्या क्या सिखा देता है
पहले लगता था पंखा हवा देता है

दूसरे इश्क़ से हम ने समझा यही
ज़ख़्म मरहम से ख़ुद ही मिला देता है
Read Full
Kuldeep Tripathi KD
हुई ग़लती यही कह कर वो लहजा भूल जाते हैं
चढ़ा लो सर जिन्हें अक्सर वो लहजा भूल जाते हैं

दरख़्तों को दिया पानी बुझाई प्यास भी उन की
मगर बरसात को पाकर वो लहजा भूल जाते हैं
Read Full
Kuldeep Tripathi KD
दिए हैं ज़ख़्म कितने ज़िन्दगी ने भी
फ़क़त महबूब ही क़ातिल नहीं मेरा
Kuldeep Tripathi KD
मौत आई तो डाँट खाएगी
इतनी भी कोई देर करता है
Kuldeep Tripathi KD
क्या हुआ है अगर ये अगर हो रहा
इश्क़ में एक लड़का निडर हो रहा

जबसे पढ़ने लगा हूँ मैं आँखें तेरी
अब सिलेबस भी मेरा कवर हो रहा
Read Full
Kuldeep Tripathi KD
बेटा हो या हो बेटी बराबर हैं सब
याद तब आया जब उन को बेटी हुई
Kuldeep Tripathi KD
कल वो मुझ को छोड़ देगी और फिर
मैं बता सकता नहीं परसों का दुख
Kuldeep Tripathi KD
तुम को खोने का डर, है अगर देखना
इक क़साई की औरत का डर देखना
Kuldeep Tripathi KD
बहुत अच्छा है और अच्छा भी रखना है
है उस सेे दोस्ती, रिश्ता भी रखना है

सुनो माँ कल मुझे जल्दी उठा देना
कि उस की सीट पर बस्ता भी रखना है
Read Full
Kuldeep Tripathi KD
ज़िंदगी काटी हिज्र में लेकिन
मौत के दस्तरस नहीं काटी

उस ने डीपी ही बदली जज साहिब
इश्क़ में उस ने नस नहीं काटी
Read Full
Kuldeep Tripathi KD
दिखा कर के शहीदों की शहादत को
कुछ ऐसे ही तो कल अख़बार रोएगा
Kuldeep Tripathi KD
बड़ा मुश्किल है तेरा भक्त होना भी,
खड़ाऊँ बस बना ले राम पैरों की
Kuldeep Tripathi KD
हमारे बाप दादा ने जो सींचा है
सही पूछो तो भारत वो बग़ीचा है
Kuldeep Tripathi KD
मोहब्बत ज़ुल्म करती है खिलौनों पर
कि बच्चे इश्क़ में बर्बाद बैठे हैं
Kuldeep Tripathi KD
दोस्त हम वो लोग जो लड़ते रहे बस
हिज्र से हम बाप दादा मुफ़लिसी से
Kuldeep Tripathi KD
मजनुओं को मारना है, ले लो ये दिल
काम तो आए कहीं पत्थर हमारा
Kuldeep Tripathi KD
मौत का देखना है अब मंज़र
फ़रवरी में गुलाब बेचूंगा
Kuldeep Tripathi KD
मेरी ग़ज़लों मिरे शे'रों में होंगी ग़लतियाँ बेशक
नहीं भेजा कोई मिसरा कभी उस्ताद को हम ने
Kuldeep Tripathi KD
मुफ़्लिसी का वो दौर भी देखा
दर ब दर माँगते वफ़ा जब थे
Kuldeep Tripathi KD

LOAD MORE