Tiwari Jitendra

Tiwari Jitendra

@Tiwarijitendra01

Tiwari Jitendra shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Tiwari Jitendra's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
नहीं काट सकते तुम्हारे बिना दिन
बिना बात के क्यूँ जुदाई हुई है
Tiwari Jitendra
ख़ुदा मेरी गुज़ारिश है न सबके साथ ऐसा कर
किसी के सर से उस के बाप का साया न छीना कर
Tiwari Jitendra
मैं किसी पीर को भी नहीं मानता
तो ये मोमिन बताते हैं काफ़िर मुझे
Tiwari Jitendra
बदल रहा हूँ ख़ुदा की बनाई क़िस्मत को
मिटा रहा हूँ लकीरों को रोज़ हाथों से
Tiwari Jitendra
कभी अम्मा कभी मम्मी कभी माते बुलाता हूँ
बड़ा नादान लड़का हूँ सदा उन को सताता हूँ
Tiwari Jitendra
क़तारो में खड़ा होना नहीं आता
अना के साथ समझौता नहीं आता

तुझे शौहर मुबारक हो मेरी जाँना
मुहब्बत बा'द फिर रिश्ता नहीं आता
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Tiwari Jitendra
उम्र भर के लिए दिल लगाया गया
दोस्त कह के मुझे जाँ बताया गया

मैं समझता रहा सिर्फ़ दिल तक हूँ मैं
घर के हर आइने में सजाया गया
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Tiwari Jitendra
मर गया हूँ मैं किसी की आशिक़ी में
लाश है बस जिस्म मेरी ज़िंदगी में
Tiwari Jitendra
मुहब्बत रोक लेती है मुझे हर बार जाने से
उदासी आ गई है बस तुम्हारे यार जाने से

समझते हैं मुझे बेकार उन सेे बस यही कह दो
महल गिरता है घर की एक बस दीवार जाने से
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Tiwari Jitendra
नहीं होगा गुजारा दीद करना है
तिरी आँखों में रहते हैं कई लड़के

उसे जाने दिया तुम ने नहीं रोका
उसे ही चाँद कहते हैं कई लड़के
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Tiwari Jitendra
प्रेम जैसे हुआ दिल अलग कर दिया
उस ने जैसे छुआ दिल अलग कर दिया

देखते ही हमें फिर वो रोने लगी
ख़ुश रहो दी दुआ दिल अलग कर दिया
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Tiwari Jitendra
मुझे मेरी तरह का चाहिए दुश्मन
अना के साथ समझौता न कर बैठे
Tiwari Jitendra
क़तारो में खड़ा होना नहीं आता
अना के साथ समझौता नहीं आता
Tiwari Jitendra
इक अलग दुनिया बनाने को चले आए यहाँ
दूर देशों में कमाने को चले आए यहाँ

सारे आते हैं यहाँ दिल को लगाने के लिए
हम तो तितली को मनाने को चले आए यहाँ
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Tiwari Jitendra
काफ़िर बनाया हम ने उस को इस लिए
उस की दु'आएँ बद-दु'आएँ बन गई
Tiwari Jitendra
दुख सभी के हैं हमारी ही तरह अब
ख़ुद-कुशी पे कोई आमादा नहीं है
Tiwari Jitendra
अब पढ़ाई लिखाई से मन भर गया
ये रिलेशन समझ यार पाते नहीं
Tiwari Jitendra
जिस्म को नोच कर फेंक देता मगर
थी शराफ़त अभी ख़ानदानी बची
Tiwari Jitendra
हमेशा ही दुखा है बस हमारा दिल
नहीं देखा किसी का और प्यारा दिल

वफ़ा को बेच कर पैसे कमाना भी
मुहब्बत में गया इक और मारा दिल
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Tiwari Jitendra
जला कर ख़त उसे मैं छोड़ आया हूँ
कि जैसे दर्द से ग़ाफ़िल नहीं थकता
Tiwari Jitendra

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