Hameed Sarwar Bahraichi

Hameed Sarwar Bahraichi

@hameed_sarwar

Hameed Sarwar Bahraichi shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Hameed Sarwar Bahraichi's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
  • Nazm
हमारे ख़्वाब समुंदर में डूब जाते हैं
सो अपने ख़्वाब में हम कश्तियाँ बनाते हैं
Hameed Sarwar Bahraichi
हम मुनाफ़िक़ की किसी बात में आएँगे नहीं
चाहे तन्हा रहें जज़्बात में आएँगे नहीं

ज़र्फ़ वाले हैं मुहब्बत है हमारा पेशा
या'नी कुछ भी हो ख़ुराफ़ात में आएँगे नहीं
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Hameed Sarwar Bahraichi
मुख़लिस रहे सख़ी भी रहे मोतबर रहे
हर शख़्स की नज़र में मगर मुख़्तसर रहे

उस ने बस एक बार में दीवाना कर दिया
हम लाख कोशिशों के इवज़ बे-असर रहे
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Hameed Sarwar Bahraichi
कमाल ये नहीं उस को भुला चुका हूँ मैं
कमाल ये है बहुत दूर जा चुका हूँ मैं

वो छोड़ कर के गया जिस मुक़ाम पर मुझ को
उसी मुक़ाम को मंज़िल बना चुका हूँ मैं
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Hameed Sarwar Bahraichi
कैसा मंज़र था उन की आँखों में
इक समुंदर था उन की आँखों में
Hameed Sarwar Bahraichi
हज़ारों बार अपनी बेबसी पर रो चुके हैं हम
मगर फिर भी हमारी ज़िद है कश्ती पार करने की
Hameed Sarwar Bahraichi
कमाल ये नहीं उस को भुला चुका हूँ मैं
कमाल ये है बहुत दूर जा चुका हूँ मैं
Hameed Sarwar Bahraichi
इन आँखों को तुम्हारे हिज्र में बीमार करने की
रही हसरत न कोई अब तुम्हें यूँँ प्यार करने की
Hameed Sarwar Bahraichi
ये सोच कर किसी मजनूँ ने हाथ काटे हैं
वो हाथ रख दे किसी ज़ख़्म पर तो शादाबी
Hameed Sarwar Bahraichi
एक किरदार सिमट आया फ़साने भर में
ज़ख़्म नासूर हुआ सब को दिखाने भर में

थी बड़ी बात बदलता जो हमारा मेआ'र
वरना ये साल ही बदलेगा ज़माने भर में
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Hameed Sarwar Bahraichi
ज़िंदगी अब मज़ा नहीं देती
काश कोई तो हम सफ़र होता

चोट लगती तो हम संभल जाते
काश ऐसा भी कुछ हुनर होता
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Hameed Sarwar Bahraichi
हुआ जो इश्क़ तो वो रोज़ ओ शब को भूल गए
वो अपने इश्क़ ए नुमाइश में सब को भूल गए

कहाँ वो दुनिया में आए थे बंदगी के लिए
मिला सुकून जहाँ में तो रब को भूल गए
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Hameed Sarwar Bahraichi
अदब वाले अदब की महफ़िलें पहचान लेते हैं
उन्हें तुम प्यार से कुछ भी कहो वो मान लेते हैं

जहाँ तक देख सकते हैं वहाँ तक सुन नहीं सकते
मगर जब इश्क़ हो जाए तो धड़कन जान लेते हैं
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Hameed Sarwar Bahraichi
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ईमान की दौलत का असर सूख रहा है
क्या बात कि सर सब्ज़ शजर सूख रहा है

आराम नहीं ज़ीस्त को ज़िंदान में सरवर
हर लम्हा मेरा कस्ब-ए-हुनर सूख रहा है
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Hameed Sarwar Bahraichi
ग़मों की धूप में बैठे हैं मुस्कुराते हैं
न जाने कौन सा दुख है जो हम छुपाते हैं

किसे ख़बर है यहाॅं कौन किस का अपना है
सभी के अपने मसाइल हैं आज़माते हैं
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Hameed Sarwar Bahraichi
अँधेरी रात ये बतला रही है
उदासी हम सभी को खा रही है

मेरे ख़्वाबों में इक कच्ची डगर है
और उस पर रेलगाड़ी जा रही है
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Hameed Sarwar Bahraichi
हुस्न की दस्तरस में थे हम भी कभी
हुस्न ढलता गया हम निकलते गए

मोम जैसे थे हम, आग जैसी थी वो
वो सुलगती गई हम पिघलते गए
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Hameed Sarwar Bahraichi
यही मुख़्तसर सी कहानी मेरी
फ़ना हो गई ज़िंदगानी मेरी
Hameed Sarwar Bahraichi
जब भी वो सामने नज़र आए
मेरी आँखों में अश्क भर आए

दर-बदर ढूँढ़ते रहे ख़ुद को
बा'द मुद्दत के अपने घर आए
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Hameed Sarwar Bahraichi
बिगड़ गई थी जो दुनिया सॅंवार दी हम ने
चढ़ा के सर पे मुहब्बत उतार दी हम ने
Hameed Sarwar Bahraichi

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