Khalil Ur Rehman Qamar

Khalil Ur Rehman Qamar

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Khalil Ur Rehman Qamar shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Khalil Ur Rehman Qamar's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
  • Nazm
मुझ से दामन न छुड़ा मुझ को बचा कर रख ले
मुझ से इक रोज़ तुझे प्यार भी हो सकता है
Khalil Ur Rehman Qamar
लफ़्ज़ कितने ही तेरे पैरों से लिपटे होंगे
तू ने जब आख़िरी ख़त मेरा जलाया होगा

तू ने जब फूल किताबों से निकाले होंगे
देने वाला भी तुझे याद तो आया होगा
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Khalil Ur Rehman Qamar
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अपनी आँखों में 'क़मर' झाँक के कैसे देखूँ
मुझ से देखे हुए मंज़र नहीं देखे जाते
Khalil Ur Rehman Qamar
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एक चेहरे से उतरती हैं नक़ाबें कितनी
लोग कितने हमें इक शख़्स में मिल जाते हैं
Khalil Ur Rehman Qamar
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वक़्त बदलेगा तो इस बार मैं पूछूँगा उसे
तुम बदलते हो तो क्यूँँ लोग बदल जाते हैं
Khalil Ur Rehman Qamar
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तेरे दिल के निकाले हम कहाँ भटके कहाँ पहुँचे
मगर भटके तो याद आया भटकना भी ज़रूरी था
Khalil Ur Rehman Qamar
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मैं समझा था तुम हो तो क्या और माँगू
मेरी ज़िन्दगी में मेरी आस तुम हो

ये दुनिया नहीं है मेरे पास तो क्या
मेरा ये भरम था मेरे पास तुम हो
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Khalil Ur Rehman Qamar
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तुम भी वैसे थे मगर तुम को ख़ुदा रहने दिया
इस तरह तुम को ज़माने से जुदा रहने दिया
Khalil Ur Rehman Qamar
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ख़्वाब पलकों की हथेली पे चुने रहते हैं
कौन जाने वो कभी नींद चुराने आए

मुझ पे उतरे मेरे अल्हाम की बारिश बन कर
मुझ को इक बूॅंद समुंदर में छुपाने आए
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Khalil Ur Rehman Qamar
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कुछ न रह सका जहाँ विरानियाँ तो रह गईं
तुम चले गए तो क्या कहानियाँ तो रह गईं
Khalil Ur Rehman Qamar
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मेरी बरसों की उदासी का सिला कुछ तो मिले
उस से कह दो वो मेरा क़र्ज़ चुकाने आए
Khalil Ur Rehman Qamar
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ख़िलाफ़-ए-शर्त-ए-अना था वो ख़्वाब में भी मिले
मैं नींद नींद को तरसा मगर नहीं सोया

ख़िलाफ़-ए-मौसम-ए-दिल था कि थम गई बारिश
ख़िलाफ़-ए-ग़ुर्बत-ए-ग़म है कि मैं नहीं रोया
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Khalil Ur Rehman Qamar
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आँख में नम तक आ पहुँचा हूँ
उस के ग़म तक आ पहुँचा हूँ

पहली बार मुहब्बत की थी
आख़िरी दम तक आ पहुँचा हूँ
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Khalil Ur Rehman Qamar
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