Puneet Mishra Akshat

Puneet Mishra Akshat

@mpuneetmishra

Puneet Mishra Akshat shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Puneet Mishra Akshat's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
नए बरस से मुहब्बत नहीं करेंगे हम
किसी से इश्क़ में ये आख़िरी दिसंबर है
Puneet Mishra Akshat
जिस को समझा था रौशनी-ए-क़मर
शख़्स ऐसा वो आबगीना था

उस सेे बिछड़े थे सर्द मौसम में
साल का पहला ही महीना था
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Puneet Mishra Akshat
ज़ख़्म हम दिल के दिखाएँ तो दिखाएँ कैसे
हो गई है जो ख़ता उस को छिपाएँ कैसे

मुफ़लिसी देख मेरी जिस ने भुलाया मुझ को
ऐसे इन्साँ को वफा़दार बताएँ कैसे
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Puneet Mishra Akshat
यहाँ अब कौन करता है ज़माने में वफ़ा उल्फ़त
यहाँ उल्फ़त के आड़े जिस्म के व्यापार होते हैं

मुझे बीता हुआ अपना ज़माना याद आता है
कहाँ फिर से वो बचपन के भला इतवार होते हैं
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Puneet Mishra Akshat
तुम्हारे ख़्वाब बिछड़े आ रहे हैं
हमें ये बारहा तड़पा रहे हैं

वहाँ पर तुम किसी से मिल रहे हो
यहाँ सिगरट जलाए जा रहे हैं
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Puneet Mishra Akshat
किसी की चंद रातों का सुधाकर हो नहीं पाया
तुम्हारी उर्मियों का मैं, उर-अंतर हो नहीं पाया

सरल थीं मन की प्रतिमाएं, मगर अफ़सोस है इतना
मैं सब कुछ था तेरा, मेहंदी महावर हो नहीं पाया
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Puneet Mishra Akshat
तुम से बिछड़ कर और निखरने वाले हैं
हम माँ की बाँहों में मरने वाले हैं
Puneet Mishra Akshat
एक बरस अब पूरा होने वाला है
पिछले साल इसी मौसम में बिछड़े थे
Puneet Mishra Akshat
दिल की धड़कन को मुझ को सुना दीजिए
आग चाहत की दिल में लगा दीजिए

जाम आँखों में रखने से क्या फ़ाइदा
आप नज़रों से मुझ को पिला दीजिए
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Puneet Mishra Akshat
उस की आँखों से मैं लिपटा तो बिखर जाऊँगा
इस लिए वो मुझे काजल नहीं होने देता
Puneet Mishra Akshat
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हर दिए को मुयस्सर नहीं रौशनी
रात भर एक जुगनू जला रह गया

मैं ने रस्में-निशानी में दिल दे दिया
और वो था के बस बे-वफ़ा रह गया
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Puneet Mishra Akshat
व्यूह के चक्र को तोड़कर आए हैं
बे-ख़बर ज़िंदगी छोड़कर आए हैं

जिस नदी ने कभी हम को सींचा नहीं
उस नदी का सफ़र मोड़कर आए हैं
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Puneet Mishra Akshat
कितने दर्द सहेजे हम ने,तब जा कर ये गीत लिखे हैं
तुम क्या जानों इन नयनों की कितनी पीर पुरानी होगी
Puneet Mishra Akshat
किसी की याद में इतना रहा हूँ
मिरी आँखों के आँसू मर गए हैं
Puneet Mishra Akshat