Shubham Seth

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@shubham-seth

Shubham Seth shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Shubham Seth's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
हँसती गाती अपनी आँख भिगो दोगे
हाल हमारा जानोगे तो रो दोगे
Shubham Seth
कभी राहें मैं भूलूँ तो कभी घर भूल जाता हूँ
सिवा तेरे सभी चीजें मैं अक्सर भूल जाता हूँ

अचानक नींद से उठकर कभी भी रोने लगता हूँ
तुझे क्या सच में लगता है मैं सोकर भूल जाता हूँ
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Shubham Seth
आग उगलती रातों में इक शीतलता सी छायी थी
गर्मी की छुट्टी में फिर वो मामा के घर आई थी
Shubham Seth
दिन गुजारूंँ आप के बिन ये तो था मुश्किल बहुत
ख़ुद ख़ुशी से मर गया मैं, ख़ुद-कुशी आसान थी
Shubham Seth
बता ज्योतिष तुझे कितने भरूँ पैसे बदलने को
सभी ले कर मुझे वो दे, लकीरों को बदल मेरी
Shubham Seth
किसी की ख़्वाहिशों को कब तलक तुम बाँध पाओगे
बड़ा वो पेड़ होगा और गमला टूट जाएगा
Shubham Seth
तुझे शीशा बनाया है ख़ुदा ने ध्यान रक्खा कर
गले पत्थर के जो लगने लगेगा टूट जाएगा
Shubham Seth
पानी में मैं डूब रहा हूँ देख मुझे
दरिया से ख़ुद दूर किनारा जाएगा
Shubham Seth
मैं ने तेरा नाम लिखा है शजरों पर
उन का हर इक फूल निहारा जाएगा
Shubham Seth
हमारा हाल मत पूछो हमारा हाल अच्छा है
नहीं था ठीक पर कहता रहा बेहाल अच्छा है

मिरा तो कुछ नहीं बिगड़ा इसी कारण नहीं बोला
किसी बस और से मत बोल देना साल अच्छा है
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Shubham Seth
उस घूँघट में इक चेहरा है उस चेहरे पे इक तिल भी है
उस तिल पे हमारी जान फिदा कुरबान उसी पर दिल भी है

वो सत्रह आशिक़ क़त्ल हुए इन तेरी फ़रेबी नज़रों से
इक हद तक तो मासूम तू है पर इक हद तक क़ातिल भी है
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Shubham Seth
शिकायत के सिवा देखो उसे कुछ भी नहीं आता
अगर हम एक-दो कर दें उसी पर रूठ जाता है
Shubham Seth
उन को दाना पानी मिलता, उन के भी बच्चे सो जाते
कितना अच्छा होता जो सब अपने-अपने घर को जाते
Shubham Seth
तितली वो ही फूल चुनेगी जिस पर उस का दिल आए
इक लड़की के पीछे इतनी मारामारी ठीक नहीं
Shubham Seth
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ये लो ख़ंजर जितने भी हैं शिक़वे तुम बस ख़त्म करो
इक ग़लती पर ता'ने देना बारी-बारी ठीक नहीं
Shubham Seth
मुझे इस इश्क़ ने तेरे बड़ा लाचार कर डाला
अजी लाचार क्या पूरी तरह बेकार कर डाला

मिरे हाकिम बड़ा जादू दिखाते हैं क्या देखोगे?
मरे थे चार सौ लेकिन उसे बस चार कर डाला
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Shubham Seth
सभी को लग रहा था ख़ुद-कुशी से मर गया था मैं
मगर सच्चाई ये थी, ख़ुद ख़ुशी से मर गया था मैं
Shubham Seth
कहा उस बाप ने मुझ सेे न जाए ये कोरोना
शहर से लौट आए देख लो बच्चे हमारे
Shubham Seth
लुभाते थे उसे बस आज के शाइ'र सो मैं ने भी
पढ़ीं तहजीब की ग़ज़लें करीं अफ़्कार की बातें
Shubham Seth
अकेलापन हमें खा जाएगा मालूम तो था
तुझे देखे बिना फिर भी मरेंगे कम अकेले
Shubham Seth

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