Vashu Pandey

Vashu Pandey

@vashu-pandey

Vashu Pandey shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Vashu Pandey's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
उस के हाथ में बाक़ी क्या रह जाता है
तुम ने जिस का हाथ पकड़ कर छोड़ दिया
Vashu Pandey
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दुखे हुए लोगों की दुखती रग को छूना ठीक नहीं
वक़्त नहीं पूछा करते हैं यारों वक़्त के मारों से
Vashu Pandey
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तुम्हें कैसा लगेगा गर किसी पिंजरे में रख कर के
कोई तुम सेे कहे तेरी हिफ़ाज़त कर रहे हैं हम
Vashu Pandey
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इश्क़ क़ैस फ़रहाद रोमियो जैसे ही कर सकते हैं
हम तो ठहरे दस से छह तक ऑफ़िस जाने वाले लोग
Vashu Pandey
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इतने कहाँ नसीब कि इस सेे प्यास बुझाएँ खेल करें
दरिया हम जैसों को अपने पास बिठा ले काफ़ी है
Vashu Pandey
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ब-जुज़ ख़ुदा के किसी का हम पे करम नहीं है ये कम नहीं है
किसी का सजदा जबीं पे अपनी रक़म नहीं है ये कम नहीं है

हमारी चुप्पी ये है ग़नीमत वगरना ये जो किया है तुम ने
यक़ीन मानो हमारा माथा गरम नहीं है ये कम नहीं है
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Vashu Pandey
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बाक़ी सारे काम भुलाकर इश्क़ किया
सुब्ह से ले कर शाम बराबर इश्क़ किया

ग़लती ये थोड़े थी इश्क़ किया हम ने
ग़लती ये थी ग़ैर बिरादर इश्क़ किया
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Vashu Pandey
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इतने गहरे उतर गया हूँ दरिया-ए-दर्द-ए-दिल में
हाथ पकड़ कर खींच ले वरना डूब के भी मर सकता हूँ

कट्टे ख़ंजर रस्सी माचिस कुछ दिन मुझ सेे दूर रखो
कुछ करने से चूक गया हूँ मैं कुछ भी कर सकता हूँ
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Vashu Pandey
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इस लिए भी इस शजर से सब को इतना प्यार है
दे रहा है फल अभी ये और सायादार है

ऐ ख़ुदा इस ना-ख़ुदा की ख़ैर हो ये नासमझ
ये समझता है कि इस के हाथ में पतवार है
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Vashu Pandey
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ये कब कहते हैं कि आ कर हम को गले लगा ले वो
मिल जाए तो रस्मन ही बस हाथ मिला ले काफ़ी है

इतने कहाँ नसीब कि इस सेे प्यास बुझाएँ खेल करें
दरिया हम जैसों को अपने पास बिठा ले काफ़ी है
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Vashu Pandey
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आप जो ठीक समझते हैं वो करिए साहब
ऐसे मौसम में मैं दफ़्तर तो नहीं आ सकता
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