Zafar Siddqui

Zafar Siddqui

@zafarsiddiqui21

Zafar Siddqui shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Zafar Siddqui's shayari and don't forget to save your favorite ones.

Followers

2

Content

38

Likes

11

Shayari
Audios
  • Sher
  • Ghazal
सब हमीं पर ही लाज़मी है क्या
तुम भी वा'दा कभी करो कोई
Zafar Siddqui
ज़ुल्म की इंतिहा बुरी होगी
सोच कर बस ये मर गया कोई
Zafar Siddqui
बात अब तीर की तरह होगी
शा'इरी मीर की तरह होगी

है फ़साना ज़फ़र का राँझा सा
दास्ताँ हीर की तरह होगी
Read Full
Zafar Siddqui
ये तुम्हें क्या हुआ है क्या ग़म है
तुम बताओ तो आँख क्यूँ नम है

एक ही घूँट में शिफ़ा होगी
पीके देखो ये आब-ए-ज़मज़म है
Read Full
Zafar Siddqui
जंग मैदान-ए-जंग में होगी
क़त्ल भी अब किसी को होना है
Zafar Siddqui
तुम यक़ीं मत मशीन पर रखना
पाँव अपने ज़मीन पर रखना

वो ज़फ़र जाल में फँसाएगा
तुम नज़र उस हसीन पर रखना
Read Full
Zafar Siddqui
जो अदब की है पहचान पढ़ता हूँ मैं
मीर-ओ-ग़ालिब का दीवान पढ़ता हूँ मैं


मत पढ़ाओ मुझे पाठ नफ़रत का तुम

अम्न जिस में है क़ुरआन पढ़ता हूँ मैं
Read Full
Zafar Siddqui
मुहब्बत ये मुहब्बत वो मुहब्बत
सिवाए दर्द-ओ-ग़म के कुछ नहीं है
Zafar Siddqui
वो बड़े ही सख़्त तेवर में दिखा है
इश्क़ के भी आज फ़ेवर में दिखा है

हो गई काफ़ूर चेहरे की कशिश भी
हिज्र का ग़म उस के ज़ेवर में दिखा है
Read Full
Zafar Siddqui
हाथ में उस के अँगूठी नाक में थी उस के नथ
रात मुझ को देख कर वो ख़ूब शरमाती रही
Zafar Siddqui
यार की यार से जुदाई है
हिज्र की याद से लड़ाई है

ग़म से मेरा उदास है बिस्तर
याद तेरी 'ज़फर' जो आई है
Read Full
Zafar Siddqui
ख़्वाब ये जाने क्यूँ मुझ को शब आ गए
प्यासे लब पर मिरे तेरे लब आ गए

मैं तो मदहोश बाँहों में तेरी हुआ
दिन मिरे या'नी अच्छे ही अब आ गए
Read Full
Zafar Siddqui
मुझ को बख़्शी है तू ने ख़ुद्दारी
मुफ़्लिसी दिल से शुक्रिया तेरा
Zafar Siddqui
मिल रहा है गले ज़फ़र दुश्मन
ईद ऐसी बहार लाई है
Zafar Siddqui
कॉल पर कॉल हमदम करे है
राह दुश्वार मौसम करे है

बीच मँझधार में फँस गया हूँ
आँख ये मसअला नम करे है
Read Full
Zafar Siddqui
हुई है आँख क्यूँ पुर-नम समझ ले
ज़फ़र के प्यार को हमदम समझ ले

सही जाती नहीं फ़ुर्क़त तिरी अब
मिरे ग़म को तू अपना ग़म समझ ले
Read Full
Zafar Siddqui
प्यास बुझती नहीं होंठ सूखे पड़े
हाल क्या हो गया ग़म के बाज़ार में

रात कटती है बिस्तर पे करवट में अब
चैन लूटा है तू ने सनम प्यार में
Read Full
Zafar Siddqui
यूँँ सितम उस ने माँ पे ढाया है
माँ के ज़ेवर ही बेच आया है

चापलूसी है करता बीवी की
और माँ को फ़क़त सताया है
Read Full
Zafar Siddqui
आँख से अपनी पिला दे
इश्क़ का कुछ तो नफ़ा' दे

होंठ हैं बीमार कब से
चूम कर इन को दवा दे
Read Full
Zafar Siddqui
इश्क़ का यूँँ जवाब लेना है
या'नी उस से गुलाब लेना है

उस ने तोहफ़े गिना दिए हैं ज़फर
अब तुझे भी हिसाब लेना है
Read Full
Zafar Siddqui

LOAD MORE