Dariya Shayari
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Dariya Shayari

    गिले शिकवे ज़रूरी हैं अगर सच्ची मुहब्बत है
    जहाँ पानी बहुत गहरा हो थोड़ी काई रहती है
    Munawwar Rana
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    मुझे भी बख़्श दे लहजे की ख़ुश-बयानी सब
    तेरे असर में हैं अल्फ़ाज़ सब, मआ'नी सब

    मेरे बदन को खिलाती है फूल की मानिंद
    कि उस निगाह में है धूप, छाँव, पानी सब
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    Subhan Asad
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    ज़ब्त कीजे तो दिल है अँगारा
    और अगर रोइए तो पानी है
    Firaq Gorakhpuri
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    पा के तूफ़ां का इशारा दरिया
    तोड़ देता है किनारा दरिया
    Abdul Mannan Tarzi
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    मेरे जुनूँ का नतीजा ज़रूर निकलेगा
    इसी सियाह समुंदर से नूर निकलेगा
    Ameer Qazalbash
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    पत्थर के जिगर वालो ग़म में वो रवानी है
    ख़ुद राह बना लेगा बहता हुआ पानी है
    Bashir Badr
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    जाने किस किस का ख़याल आया है
    इस समुंदर में उबाल आया है

    एक बच्चा था हवा का झोंका
    साफ़ पानी को खँगाल आया है
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    Dushyant Kumar
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    सब को बस पानी पीने से मतलब है
    बस माँ को चिंता है मटका भरने की
    Tanoj Dadhich
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    तू अपने सारे दुख जा कर बताता है जिन्हें, इक दिन
    बढ़ाएँगे वही ग़म-ख़्वार तेरी आँख का पानी
    Siddharth Saaz
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    रोते बच्चे पूछ रहे हैं मम्मी से
    कितना पानी और मिलाया जाएगा
    Divy Kamaldhwaj
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    उस ने फेंका मुझ पे पत्थर और मैं पानी की तरह
    और ऊँचा और ऊँचा और ऊँचा हो गया
    Kunwar Bechain
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    अगर फ़ुर्सत मिले पानी की तहरीरों को पढ़ लेना
    हर इक दरिया हज़ारों साल का अफ़्साना लिखता है
    Bashir Badr
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    वो थे जवाब के साहिल पे मुंतज़िर लेकिन
    समय की नाव में मेरा सवाल डूब गया
    Bekal Utsahi
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    किस तरह ये आप की आँखों में पानी आ गया
    याद जस्सर आप को भी कोई या'नी आ गया
    Avtar Singh Jasser
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    कभी चल कर रुके होंगे, कभी रुक कर चले होंगे
    अदा-ए-ख़ुश-ख़िरामी में वो जाने कब ढले होंगे

    सियाही बे-सबब आँखों के साहिल पर नहीं आती
    यक़ीनन चश्मे-आतिश में कई आशिक़ जले होंगे
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    Wajid Husain Sahil
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    शायद कि वो वाक़िफ़ नहीं आदाब-ए-सफ़र से
    पानी में जो क़दमों के निशाँ ढूँड रहा था
    Sahar Ansari
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    दौर-ए-तूफ़ाँ में भी जी लेते हैं जीने वाले
    दूर साहिल से किसी मौज-ए-गुरेज़ाँ की तरह
    Ghulam Rabbani Taban
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    मेरे पैरों में छाले हैं मेरी आँखों में पानी है
    मुझे फिर भी मोहब्बत है मोहब्बत है न जाने क्यूँँ
    Amaan Pathan
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    दोस्त अहबाब से लेने न सहारे जाना
    दिल जो घबराए समुंदर के किनारे जाना
    Abdul Ahad Saaz
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    तुम से हासिल हुआ इक गहरे समुंदर का सुकूत
    और हर मौज से लड़ना भी तुम्हीं से सीखा
    Zehra Nigaah
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