Khamoshi Shayari - Unspoken emotions, silence of heart, and deep inner feelings

Khamoshi shayari beautifully expresses the emotions that words often fail to capture. It reflects the silence of the heart, unspoken feelings, and deep thoughts hidden within. Whether it’s about love, loneliness, or inner peace, khamoshi often speaks louder than words in poetry.

khamoshi shayari
तेरा चुप रहना मेरे ज़ेहन में क्या बैठ गया
इतनी आवाज़ें तुझे दीं कि गला बैठ गया
Tehzeeb Hafi
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sannata shayari
साहिल के सुकूँ से किसे इनकार है लेकिन
तूफ़ान से लड़ने में मज़ा और ही कुछ है
Aale Ahmad Suroor
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उस के क़त्ल पे मैं भी चुप था मेरा नंबर अब आया
मेरे क़त्ल पे आप भी चुप हैं अगला नंबर आप का है
Nawaz Deobandi
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इतना तो ज़िन्दगी में किसी के ख़लल पड़े
हँसने से हो सुकून न रोने से कल पड़े

जिस तरह हँस रहा हूँ मैं पी पी के गर्म अश्क
यूँँ दूसरा हँसे तो कलेजा निकल पड़े
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Kaifi Azmi
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चुप-चाप अपनी आग में जलते रहो 'फ़राज़'
दुनिया तो अर्ज़-ए-हाल से बे-आबरू करे
Ahmad Faraz
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चुप रहते हैं चुप रहने दो राज़ बताओ खोले क्या
बात वफ़ा की तुम करती हो बोलो हम कुछ बोले क्या

उल्फ़त तो अफ़साना है तुम करती खूब सियासत हो
हम भी हैं मक़बूल बहुत अब बोल किसी के होलें क्या
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Anand Raj Singh
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अरे मैं इंतिक़ामन रो रहा हूँ
मैं चुप हो जाऊँगा उस को रुला के
Swapnil Tiwari
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वहाँ पहले ही आवाज़ें बहुत थीं
सो मैं ने चुप कराया ख़ामुशी को
Abhishek shukla
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दिल को सुकून रूह को आराम आ गया
मौत आ गई कि दोस्त का पैग़ाम आ गया
Jigar Moradabadi
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हर एक बात को चुप-चाप क्यूँँ सुना जाए
कभी तो हौसला कर के 'नहीं' कहा जाए
Nida Fazli
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तुम इस ख़मोश तबीअत पे तंज़ मत करना
वो सोचता है बहुत और बोलता कम है
Nawaz Deobandi
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ख़मोश झील के पानी में वो उदासी थी
कि दिल भी डूब गया रात माहताब के साथ
Rehman Faris
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आधी रात की चुप में किस की चाप उभरती है
छत पे कौन आता है सीढ़ियाँ नहीं खुलतीं
Parveen Shakir
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जो चराग़ सारे बुझा चुके उन्हें इंतिज़ार कहाँ रहा
ये सुकूँ का दौर-ए-शदीद है कोई बे-क़रार कहाँ रहा
Ada Jafarey
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इतना तो ज़िंदगी में किसी के ख़लल पड़े
हँसने से हो सुकून न रोने से कल पड़े
Kaifi Azmi
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अपनी ज़बाँ से कुछ न कहेंगे चुप ही रहेंगे आशिक़ लोग
तुम से तो इतना हो सकता है पूछो हाल बेचारों का
Ibn E Insha
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'इंशा'-जी उठो अब कूच करो इस शहर में जी को लगाना क्या
वहशी को सुकूँ से क्या मतलब जोगी का नगर में ठिकाना क्या
Ibn E Insha
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बे तेरे क्या वहशत हम को तुझ बिन कैसा सब्र-ओ-सुकूँ
तू ही अपना शहर है जानी तू ही अपना सहरा है
Ibn E Insha
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चुप-चाप बैठे रहते हैं कुछ बोलते नहीं
बच्चे बिगड़ गए हैं बहुत देख-भाल से
Adil Mansuri
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जो चुप-चाप रहती थी दीवार पर
वो तस्वीर बातें बनाने लगी
Adil Mansuri
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सुकून क़ल्ब को जिस से मिल जाए 'ताबाँ'
ग़ज़ल कोई ऐसी सुना दीजिएगा
Anwar Taban
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है कुछ ऐसी ही बात जो चुप हूँ
वर्ना क्या बात कर नहीं आती
Mirza Ghalib
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मुझ
में रहते हैं करोड़ों लोग चुप कैसे रहूँ
हर ग़ज़ल अब सल्तनत के नाम एक बयान है
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Dushyant Kumar
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छोटी सी बात पे ख़ुश होना मुझे आता था
पर बड़ी बात पे चुप रहना तुम्हीं से सीखा
Zehra Nigaah
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उस की बेचैनी बढ़ाना चाहती हूँ
सुनिए कह कर चुप लगाना चाहती हूँ
Pooja Bhatia
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इसीलिए मैं बिछड़ने पर सोगवार नहीं,
सुकून पहली ज़रूरत है, तेरा प्यार नहीं!

जवाब ढ़ूंढ़ने में उम्र मत गँवा देना,
सवाल करती है दुनिया पर एतबार नहीं
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Balmohan Pandey
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वो आँखें चुप थीं लेकिन हँस रही थीं
मेरा जी कर रहा था चूम लूँ अब
Ritesh Rajwada
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कुछ न कुछ बोलते रहो हम सेे
चुप रहोगे तो लोग सुन लेंगे
Fahmi Badayuni
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वो शांत बैठा है कब से मैं शोर क्यूँ न करूँ
बस एक बार वो कह दे कि चुप तो चूँ न करूँ
Charagh Sharma
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अब तो चुप-चाप शाम आती है
पहले चिड़ियों के शोर होते थे
Mohammad Alvi
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टहनी पे ख़मोश इक परिंदा
माज़ी के उलट रहा है दफ़्तर
Rais Amrohvi
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मैं मारा जाऊँगा पहले किसी फ़साने में
फिर इस के ब'अद हक़ीक़त में मारा जाऊँगा

मैं चुप रहा तो मुझे मार देगा मेरा ज़मीर
गवाही दी तो अदालत में मारा जाऊँगा
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Rana Saeed Doshi
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चुप हुए तो घर से निकले जा के दफ़्तर रो पड़े
इश्क़ ऐसी जंग है जिस में सिकंदर रो पड़े

बस दिलों पर कब किसी का चल सका है इश्क़ में
फिर से डायल कर के हम वो एक नंबर रो पड़े
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Prashant Sharma Daraz
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मैं उस को देख के चुप था उसी की शादी में
मज़ा तो सारा इसी रस्म के निबाह में था
Muneer Niyazi
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बस्ती बस्ती ख़ाक उड़ाये, बस वहशत का मारा हो
उस सेे इश्क़ की आस न करना जिस का मन बंजारा हो

ख़ुद को शाइ'र कहते रहना दिल को लाख सुकूँ दे दे
लेकिन दुनिया की नज़रों में तुम अब भी आवारा हो
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Daagh Aligarhi
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क्या वाक़ई वो तेरी पाज़ेब की खनक थी
ऐसा सुकून तो बस नुसरत के गाने में है
Neeraj Neer
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ऐ मिरी ज़ात के सुकूँ आ जा
थम न जाए कहीं जुनूँ आ जा

इस से पहले कि मैं अज़िय्यत में
अपनी आँखों को नोच लूँ आ जा
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Fareeha Naqvi
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कहाँ कहाँ पे उसे ढूँढ़ते हैं हम यारों
किसी के लम्स से होता था जो सुकूँ दिल को
Afzal Ali Afzal
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सुकून ए क़ल्ब होता है मुयस्सर
तेरा जब नाम आता है लबों पर
Kiran K
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क्या ख़ूब तुम ने ग़ैर को बोसा नहीं दिया
बस चुप रहो हमारे भी मुँह में ज़बान है
Mirza Ghalib
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ये शाम ख़ुशबू पहन के तेरी ढली है मुझ
में जो रेज़ा रेज़ा
मैं क़तरा क़तरा पिघल रही हूँ ख़मोश शब के समुंदरों में
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Kiran K
मुझे आँखें दिखा कर बोलती है चुप रहो भैया
बहिन छोटी भले हो बात वो अम्मा सी करती है
Divy Kamaldhwaj
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अब आ भी जाओ के सुकूंँ मिले मुझे
अगर जो जाना था तो क्यूँँंँ मिले मुझे

ज़माना हो न हो रकी़ब बीच में
तू अब कभी मिले तो यूँंँ मिले मुझे
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Faiz Ahmad
तेरे चुप रहने से हर पौधा सूख गया है
तुझ को मालूम नहीं पौधों का पानी है तू
Kabir Altamash
सुकून देती थी तब मुझ को वस्ल की सिगरेट
अब उस के हिज्र के फ़िल्टर से होंठ जलते हैं
Upendra Bajpai
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ये सोच कर के कि उस ने किया है याद मुझे
मैं मेरी उँगलियों पे हिचकियों को गिनता रहा

पलट के उस ने कराया न मुझ को चुप लेकिन
तमाम रात मेरी सिसकियों को गिनता रहा
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Dipendra Singh 'Raaz'
एक ही शख़्स नहीं होता सदा दिल का सुकूँ
एक करवट पे कभी नींद नहीं आ सकती
Rehan Mirza
उसूली तौर पे मर जाना चाहिए था मगर
मुझे सुकून मिला है तुझे जुदा कर के
Ali Zaryoun
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न तीर्थ जा कर न धर्म ग्रंथो का सार पा कर
सुकूँ मिला है मुझे तो बस तेरा प्यार पा कर

ग़रीब बच्चे किताब पढ़ कर सँवर रहे हैं
अमीर लड़के बिगड़ रहे हैं दुलार पा कर
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Alankrat Srivastava
मुसीबतों में तो याद करते ही हैं किसी को ये लोग सारे
मगर कभी जो सुकूँ में आए ख़याल मेरा तो लौट आना
Hasan Raqim
तेरे बग़ैर ख़ुदा की क़सम सुकून नहीं
सफ़ेद बाल हुए हैं हमारा ख़ून नहीं

न हम ही लौंडे लपाड़ी न कच्ची उम्र का वो
ये सोचा समझा हुआ इश्क़ है जुनून नहीं
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Shamim Abbas
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तनक़ीद न तक़रार बड़ी देर से चुप हैं
हैरत है मेरे यार बड़ी देर से चुप हैं

गूँगों को तकल्लुक़ के मवाक़े हैं मुयस्सर
हम माहिर-ए-गुफ़्तार बड़ी देर से चुप हैं
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Ahmad Abdullah
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हुआ जो इश्क़ तो वो रोज़ ओ शब को भूल गए
वो अपने इश्क़ ए नुमाइश में सब को भूल गए

कहाँ वो दुनिया में आए थे बंदगी के लिए
मिला सुकून जहाँ में तो रब को भूल गए
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Hameed Sarwar Bahraichi
मैं भटकता ही रहा दश्त-ए-शनासाई में
कोई उतरा ही नहीं रूह की गहराई में

क्या मिलाया है बता जाम-ए-पज़ीराई में
ख़ूब नश्शा है तेरी हौसला-अफ़जाई में

तेरी यादों की सुई, प्रेम का धागा मेरा
काम आए हैं बहुत ज़ख़्मों की तुरपाई में

डस रही है ये सियह-रात की नागिन मुझ को
भर रही ज़हर-ए-ख़मोशी, रग-ए-तन्हाई में

सुर्मा-ए-मक्र-ओ-फ़रेब आँखों में जब से है लगा
तब से है ख़ूब इज़ाफ़ा हद-ए-बीनाई में

फ़िक्र-ओ-फ़न, रंग-ए-तग़ज़्ज़ुल, न ग़ज़ल की ख़ुशबू
बस लगा रहता हूँ मैं क़ाफ़िया-पैमाई में

सीख पानी से हुनर काम 'अनीस' आएगा
दौड़ कर ख़ुद ही चला आता है गहराई में
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Anis shah anis
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तुम राह में चुप-चाप खड़े हो तो गए हो
किस किस को बताओगे कि घर क्यूँँ नहीं जाते
Ameer Qazalbash
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हम को न मिल सका तो फ़क़त इक सुकून-ए-दिल
ऐ ज़िंदगी वगरना ज़माने में क्या न था
Azad Ansari
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क़सम ख़ुदा की बड़े तजरबे से कहता हूँ
गुनाह करने में लज़्ज़त तो है सुकून नहीं
Mehshar Afridi
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ज़बाँ रखता हूँ लेकिन चुप खड़ा हूँ
मैं आवाज़ों के बन में घिर गया हूँ
Mohsin Naqvi
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मैं तो इस वास्ते चुप हूँ कि तमाशा न बने
तू समझता है मुझे तुझ सेे गिला कुछ भी नहीं
Akhtar Shumar
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मैं चुप रहूँ तो मेरी आँख बोल पड़ती है
चलो किसी को तो इज़हार करना आता है
Imran Aami
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चुप-चाप सुलगता है दिया तुम भी तो देखो
किस दर्द को कहते हैं वफ़ा तुम भी तो देखो
Bashar Nawaz
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ये किस अज़ाब में छोड़ा है तू ने इस दिल को
सुकून याद में तेरी न भूलने में क़रार
Shohrat Bukhari
जो चुप रहा तो वो समझेगा बद-गुमान मुझे
बुरा भला ही सही कुछ तो बोल आऊँ मैं
Iftikhar Imam Siddiqi
बेचता यूँँ ही नहीं है आदमी ईमान को
भूख ले जाती है ऐसे मोड़ पर इंसान को

शबनमी होंठों की गर्मी दे न पाएगी सुकून
पेट के भूगोल में उलझे हुए इंसान को
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Adam Gondvi
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एक तेरा ही तबस्सुम तो न था वजह-ए-सुकूँ
मेरे आँसू भी मोहब्बत में बहुत काम आए
Mushfiq Khwaja
चुप हूँ तुम्हारा दर्द-ए-मोहब्बत लिए हुए
सब पूछते हैं तुम ने ज़माने से क्या लिया
Shamim Karhani
कोई हमें रखे न रखे याद ऐ वतन
दिल में सुकून है कि तेरे कुछ तो काम आए
Haresh Vanza
एक मैं हूँ कि इस आशोब-ए-नवा में चुप हूँ
वर्ना दुनिया मेरे ज़ख़्मों की ज़बाँ बोलती है
Irfan Siddiqi
फिर उम्र भर कभी न सुकूँ पा सका ये दिल
कटने थे जो भी कट गए राहत में चार दिन
A G Josh
तमाम उम्र अकेले में तुझ से बातें कीं
तमाम उम्र तेरे रू-ब-रू ख़मोश रहे
Khursheed Rizvi
'बाक़ी' जो चुप रहोगे तो उट्ठेंगी उँगलियाँ
है बोलना भी रस्म-ए-जहाँ बोलते रहो
Baqi Siddiqui
मुझे उस की पेशानी का सुकून बनना था मगर
उस की रूह की अज़ीयत का सबब बन गया हूँ
Mohammad Shahrukh Qureshi
उस्तादों से भरी पड़ी है ये दुनिया
चुप रहना ही ठीक सिखाना ठीक नहीं
Atul K Rai
चुप रहने में अपना ही इक जादू है
जो ये कर ले दस के बीच में साधू है
Kush Pandey ' Saarang '
चुप भी रहना है एक फ़न आख़िर
क्या ज़रूरत है बात की जाए
Shivam chaubey
जन्नती सुकून की तलाश में अगर चलूँ
मिल सके मुझे सुकून सिर्फ़ माँ कि गोद में
Zain Aalamgir
मैं चुप बैठा हूँ तो ऐसा नहीं के
तेरा लहजा मुझे चुभता नहीं है
Aarush Sarkaar
बोलने से ही बिगड़ते है "करन" सब काम अपने
लोग जो चुप रहते है उन का नहीं कुछ भी बिगड़ता
karan singh rajput
तू सलामत रहे और रहे पुर-सुकूँ, तेरी मिट्टी करोड़ों की है आबरू
इस ज़मीं के हैं हम इस
में मिल जाएँगे, पर रहेगा हमेशा वतन मेरे तू
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Hasan Raqim
लोग खाते हैं गोलियाँ "अकबर"
हम को चाय सुकून देती है
''Akbar Rizvi"
तुम्हारा हिज्र बड़े ही सुकून से गुज़रा
भटकते रहना था और बस मलाल करना था
Monis faraz
शाम को है लौट आता साथ तेरे
वो सुकूँ जो पूरा दिन दिल ढूँढ़ता है
Amol
सिवाए तालियों के कुछ नहीं मिलता
ग़ज़लगोई फ़क़त धंधा सुकूँ का है
Neeraj Neer
सुकून आप को देती है महफ़िल-ए-ख़ूबाँ
हमें तो मुल्क-ए-ख़मोशाँ सुकून देता है
Shajar Abbas
हुआ हम को भला क्या ग़म चलो हम भी नहीं कहते
अरे तुम भी तो कोई बात सीधी-सी नहीं कहते

निगाहों को तिरी पढ़ना अजब सी कश्मकश है ये
न चुप रहते हैं दोनों और ये कुछ भी नहीं कहते
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anupam shah
कहाँ रोना, कहाँ चुप हो जाना है
कहाँ सीखा पढ़ा बच्चों ने ये सब
Pawan
निकल गया तो सुकून में हूँ
न अब रगों में, न खू़न में हूँ

यक़ीन है तेरे दिल में नइ मैं
यक़ीन है तेरे फॊन में हूँ
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Abuzar kamaal
तुम्हारे साथ में जो गुज़री थी वो ज़िंदगी थी
तुम्हारे बा'द ये क्या ज़िंदगी है? बिल्कुल नइँ

ख़मोश रहने की आदत सी हो गई है मुझे
भला ख़मोशी कभी बोलती है? बिल्कुल नइँ
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Amaan mirza
टकटकी बाँध के मैं देख रहा था जिस को
फिर निगाहों से किए उस ने इशारे चुप चाप
Amaan mirza
रहेंगे चुप तिरे हक़ में सभी नादाँ
हमारे हक़ दिलों दीवार रोएँगे
Shiv
बा'द तेरे सुकूँ तलाश किया
हम को हर शय ने फिर हताश किया

कुछ को कांधा दिया लहू कुछ को
हम ने हर चीड़ को पलाश किया
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anupam shah
यार तो कई है आराम-ए-जाँ जहाँ में इस
पर यहाँ सुकून-ए-दिल सिर्फ़ एक नुसरत है
Kartik tripathi
मैं चुप हूँ यार सो चुप रहने दे ख़ुदा के लिए
ज़बाँ खुलेगी तो लफ़्ज़ों से ख़ून टपकेगा
Shajar Abbas
जिन्हें आवाज़ देना है वही चुप हैं
अकेले बोलता हूँ मैं सभी चुप हैं
Saarthi Baidyanath
ये अर्श ओ फ़र्श तलाशा है जब मिली हो तुम
सुकून-ए-क़ल्ब हो मेरा मेरी ख़ुशी हो तुम

तुम्हें गँवाना क़सम से बड़ा ख़सारा है
मता-ए-जान सुनो मेरी ज़िन्दगी हो तुम
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Shajar Abbas
चुप रहने से अच्छे खासे हो जाते हैं पागल
ख़ुश रहते हैं जो अपने जज़्बात बता देते हैं
Govind kumar
और कितना हमें सताओगे
चुप रहोगे कि कुछ बताओगे
Afzal Sultanpuri
दुनिया भर की सब बातें करती थी
ये लड़की जो चुप बैठी है कब से
Sandeep Rajput
सुकूँ को प्यार मतलब से बनाते हो
हमें भी यार मतलब से बनाते हो
Anurag Pandey
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सुकून देती हैं मेरे दिल को शजर की बातें शजर का लहजा
है ख़ूब-सूरत क़सम से सखियों शजर की ज़ुल्फ़ें शजर का चेहरा

बताओ किस का सुनोगी नग़्मा बताओ किस की सुनोगी ग़ज़लें
वो बोली सखियों से मुस्कुरा के शजर की ग़ज़लें शजर का नग़्मा
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Shajar Abbas
एक तो कुछ भी कहा जाता नहीं
और फिर चुप भी रहा जाता नहीं

इस लिए भी माफ़ कर देता है वो
दरमियाँ कुछ हो, सहा जाता नहीं
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Dileep Kumar
जब तक कि आदमी को सुकूँ की तलाश है
सौ इंक़िलाब आएँगे इक इंक़िलाब क्या
Dharamraj deshraj
अब भला क्यूँँ चुप रहें हम
दर्द और कितना सहें हम

चार दिन की दिल-लगी को
अब मोहब्बत क्यूँ कहें हम
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Vineet Dehlvi
चाहता हूँ सुकून मिल जाए
झूठ दिन रात बोलता हूँ मैं
Sayeed Khan
हमारे घर में ये तहज़ीब अब भी ज़िन्दा है
बुज़ुर्ग बोलें तो बच्चे ख़मोश रहते हैं
Shakir Dehlvi
चुप रहा कर न ज़ख़्मों को शादाब कर
यूँँ न दिख जा मुझे अब न आदाब कर
Shivam Mishra
होश भी था सुकून में थे हम
हाल बदतर नहीं थे यारों तब

वो भी माहिर था बे-वफ़ाई में
हम भी कमतर नहीं थे यारों तब
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Aqib khan
रात इतनी तवील कैसे है
नींद आती नहीं सुकून नहीं
Meem Alif Shaz