Aqib khan

Aqib khan

@AkibKhan

Akib khan shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Akib khan's shayari and don't forget to save your favorite ones.

Followers

9

Content

187

Likes

333

Shayari
Audios
  • Sher
  • Ghazal
  • Nazm
हो चुका हो खेल तो फिर चल पड़ें घर की तरफ़
हाँ अगर अब फिर से उलझा तो समझ क़िस्सा तमाम
Aqib khan
हड़प्पा के मकानों में हैं रौशनदान दरवाज़े
मगर वो लोग ताका-झाँकी को खिड़की नहीं रखते
Aqib khan
बड़ी अजीब सी रौनक़ है आज गलियों में
सुना है आप यहाँ बन-सँवर के गुज़रे थे
Aqib khan
टूटे हुए टुकड़ों को ज़रा जोड़ के देखो
तब ये नज़र आ जाएगा क्या चीज़ थे तुम भी
Aqib khan
अभी भी वक़्त है जोड़ो तो ख़ुद को जोड़ सकते हो
अभी टुकड़े हुए हैं कोई चकनाचूर थोड़ी हो
Aqib khan
मैं बचकर निकल आया हूँ आइनों से
पर अपना ही चेहरा भला कैसे भूलूँ
Aqib khan
साथ जितने थे हमारे अब वो ओझल हो गए हैं
ज़िंदगी की दौड़ में हम इस क़दर पीछे खड़े हैं
Aqib khan
तू ना कहता था दिल की सुनो सुन लूँ क्या
ख़ुद-कुशी के लिए रोज़ कहता है ये
Aqib khan
हम को ख़राब वक़्त में अंदाज़ा ये हुआ
कुछ आदतें ख़राब भी रखनी ही चाहिए
Aqib khan
झूट होगा जो कहें फेंक दी तस्वीर उस की
देखते तो हैं प अक्सर नहीं देखा करते

छूटने वाले तो मुड़कर ही खड़े रहते हैं
छोड़ने वाले पलटकर नहीं देखा करते
Read Full
Aqib khan
मैं ने उन की बात न मानी ठीक कहा था लोगों ने
सड़ जाता है ठहरा पानी ठीक कहा था लोगों ने
Aqib khan
मुझ सेे मिलने का ये एहसान आख़िरी तो नहीं
ये मुलाक़ात मेरी जान आख़िरी तो नहीं

जाने वाले तू चला जा मगर ये बतला दूँ
इस ज़माने में तू इंसान आख़िरी तो नहीं
Read Full
Aqib khan
एक तस्वीर थी पुरानी सी
याद क्या क्या दिला गई मुझ को
Aqib khan
छूटने वाले तो मुड़कर ही खड़े रहते हैं
छोड़ने वाले पलटकर नहीं देखा करते
Aqib khan
उम्मीद ये थी दुनिया को जीतेंगे एक दिन
और ये हुआ कि हार के बैठे हैं अपना घर
Aqib khan
तुम जो रहे हो वो भी बड़ी बात है मगर
तुम हो गए हो क्या ज़रा ये भी तो देख लो
Aqib khan
हम ऐसे लोग जो रुकना ग़लत समझते थे
फिर एक शख़्स पे ठहरे तो लाश हो बैठे
Aqib khan
अपने लिए तो इश्क़ भी ग़ैरत की चीज़ थी
हम लोग वो थे जिन को पढ़ाया ग़लत गया
Aqib khan
मैं जानता हूँ साँप है पर आस्तीं में रह
हम सेे नया न कोई भी अब पाला जाएगा
Aqib khan
मौत के आस पास जा कर ही
चैन पड़ता है दिल लगाकर ही

तुम भी समझोगे वक़्त पर प्यारे
हम भी समझे हैं चोट खाकर ही
Read Full
Aqib khan

LOAD MORE