Wahshat Shayari
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Wahshat Shayari

    मेरे जुनूँ का नतीजा ज़रूर निकलेगा
    इसी सियाह समुंदर से नूर निकलेगा
    Ameer Qazalbash
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    एक से एक जुनूँ का मारा इस बस्ती में रहता है
    एक हमीं हुशियार थे यारो एक हमीं बद-नाम हुए
    Ibn E Insha
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    बाद-ए-बहार में सब आतिश जुनून की है
    हर साल आवती है गर्मी में फ़स्ल-ए-होली
    Wali Uzlat
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    ये सच है शौक़ भी पहले जुनून होता था
    मगर जुनून भी अब शौक़ बन गया देखो
    Saarthi Baidyanath
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    तेरा जानता है, मेरा जानता है
    किसे क्या है देना ख़ुदा जानता है

    सुनो यार जाके ये "हाफ़ी" से कह दो
    दिवाना ये घर का पता जानता है
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    Rituraj kumar
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    देखना है अगर जुनून-ए-इश्क़
    लहरों पे नाचते सफ़ीने देख
    Chandan Sharma
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    इक बेचैनी सी है मन में क्या होगा ये रब जाने
    यार मिरे कोई पूछो रब से वो तो है सब जाने
    Kabir Altamash
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    पहले कहता है जुनूँ उस का गिरेबान पकड़
    फिर मेरा दिल मुझे कहता है इधर कान पकड़

    ऐसी वहशत भी न हो घर के दरो बाम कहें
    कोई आवाज़ ही ले आ कोई मेहमान पकड़
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    Azbar Safeer
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    जिन हौसलों से मेरा जुनूँ मुतमइन न था
    वो हौसले ज़माने के मेआ'र हो गए
    Ali Jawwad Zaidi
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    हर एक बात पे करते हो क़त्ल-ए-आम की बातें
    तुम्हीं बताओ अब अंज़ाम-ए-गर्मी-ए-जुनूँ क्या है
    Ajeetendra Aazi Tamaam
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    जहाँ था ज़मीं पर ठिकाना नहीं था
    हमारा कभी वो दिवाना नहीं था
    Seema Mahapatra
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    मुर्दा है इश्क़ जज़्ब-ओ-जुनूँ भी हैं पास-पास
    पाने की अब तो उस को तमन्ना भी क्या करें
    A R Sahil "Aleeg"
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    इश्क़ का ही नशा वो करते हैं
    हर सितम को सहा वो करते हैं

    ये जुनूँ है या कुफ़्र है उन का
    बे-वफ़ा से वफ़ा वो करते हैं
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    A R Sahil "Aleeg"
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    मेरे आगे है दरिया सी मोहब्बत
    समुंदर सा ही हूँ रखता जुनूँ मैं
    Rohit tewatia 'Ishq'
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    बड़ी बेचैनी से वो छत पे आती है
    गली में या'नी कोई अब भी रहता है
    Mohd Arham
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    अपना बस इतना ही फ़साना है
    इक हसीना है इक दिवाना है
    Meem Maroof Ashraf
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    जिसे ये लोग पत्थर मारते यूँँ फिर रहे हैं दोस्त
    मोहब्बत में हुआ वो कोई बस पागल दिवाना है
    ABhishek Parashar
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    ये सोचो तो यूँँ दिल के सामने दिल ही दिवाना है
    रहा हूँ उन के दिल में ही जो मेरे जान-ए-जानाँ है
    arjun chamoli
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    किसी को उस नज़र से देखना भी इक ख़ता माना
    जुनून-ए-इश्क़ में महबूब को हम ने ख़ुदा माना
    Raj Tiwari
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    दिल पे हालत जुनूँ की तारी है
    सर में सौदा सवार रहता है
    Sumit Panchal
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