Jazbaat Shayari - Dil ke ehsaas, feelings aur emotions ko bayaan karti shayari

Jazbaat shayari beautifully expresses the hidden emotions of the heart—those unspoken feelings that words often fail to convey. Whether it's love, pain, or silent thoughts, these lines help you connect deeply with your inner ehsaas and share your true emotions.

नाला हूँ मैं बेदारी-ए-एहसास के हाथों
दुनिया मिरे अफ़्कार की दुनिया नहीं होती
Sahir Ludhianvi
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क्या ख़ुशी में ज़िंदगी का होश कम रह जाएगा
ग़म अगर मिट भी गया एहसास-ए-ग़म रह जाएगा
Shakeel Badayuni
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इसी लिए हमें एहसास-ए-जुर्म है शायद
अभी हमारी मोहब्बत नई नई है ना
Afzal Khan
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ओ दिल तोड़ के जाने वाले दिल की बात बताता जा
अब मैं दिल को क्या समझाऊँ मुझ को भी समझाता जा
Hafeez Jalandhari
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बस मोहब्बत बस मोहब्बत बस मोहब्बत जान-ए- मन
बाक़ी सब जज़्बात का इज़हार कम कर दीजिए
Farhat Ehsaas
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ऐसा नहीं कि उन से मोहब्बत नहीं रही
जज़्बात में वो पहली सी शिद्दत नहीं रही
Khumar Barabankvi
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ख़ुदा ऐसे एहसास का नाम है
रहे सामने और दिखाई न दे
Bashir Badr
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तिरे एहसास में डूबा हुआ मैं
कभी सहरा कभी दरिया हुआ मैं
Siraj Faisal Khan
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दर्द में शिद्दत-ए-एहसास नहीं थी पहले
ज़िंदगी राम का बन-बास नहीं थी पहले
Shakeel Azmi
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तेरे एहसास को ख़ुशबू बनाते
जो बस चलता तुझे उर्दू बनाते

यक़ीनन इस से तो बेहतर ही होती
वो इक दुनिया जो मैं और तू बनाते
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Saurabh Sharma 'sadaf'
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हमें हर वक़्त ये एहसास दामन-गीर रहता है
पड़े हैं ढेर सारे काम और मोहलत ज़रा सी है
Khurshid Talab
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रोज़ मिलने पे भी लगता था कि जुग बीत गए
इश्क़ में वक़्त का एहसास नहीं रहता है
Ahmad Mushtaq
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अपनी हालत का ख़ुद एहसास नहीं है मुझ को
मैं ने औरों से सुना है कि परेशान हूँ मैं
Aasi Uldani
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हैं लहू से कई गुना बढ़कर
वो जो एहसास के मरासिम हैं
Shadan Ahsan Marehrvi
अवल्ली इश्क़ के एहसास भी तारी रक्खे
और इस बीच नए काम भी जारी रक्खे

मैं ने दिल रख लिया है ये भी कोई कम तो नहीं
दूसरा ढूँढ़ लो जो बात तुम्हारी रक्खे
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Ashu Mishra
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तुम्हें इक मश्वरा दूँ सादगी से कह दो दिल की बात
बहुत तैयारियाँ करने में गाड़ी छूट जाती है
Zubair Ali Tabish
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उस की हर इक याद में लज़्ज़त होती है
पहली मोहब्बत पहली मोहब्बत होती है

तेरे साथ नहीं हैं तो एहसास हुआ
इक तस्वीर की कितनी क़ीमत होती है
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Aadil Rasheed
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जिस को इस फ़स्ल में होना है बराबर का शरीक
मेरे एहसास में तन्हाइयाँ क्यूँँ बोता है
Ghulam Mohammad Qasir
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हम दोज़ख़-ए-एहसास में जलते ही रहेंगे
ये फ़िक्र का हासिल है बसीरत की सज़ा है
Syed Ahmad Shamim
इतना कम-ज़र्फ़ न बन उस के भी सीने में है दिल
उस का एहसास भी रख अपनी ही राहत पे न जा
Aitbar Sajid
तू कोई ग़म है तो दिल में जगह बना अपनी
तू इक सदा है तो एहसास की कमाँ से निकल
Rajinder Manchanda Bani
जंग पर जाते हुए बेटे की माँ से पूछो
कैसे जज़्बात के तूफ़ान सँभाले होंगे
Shifa Kajganvi
बाद-ए-सबा जब ज़ुल्फ़ों को मेरी सहलाए
एहसास-ए-छुअन तेरा दिल को मेरे महकाए
Angel Pal
हाँ कड़वा होता है लेकिन हम को ये एहसास बहुत है
मिलता है प्रोटीन विटामिन घर वालों के ही ता'ने में
Aarush Sarkaar
जज़्बात हो रहे गुम पर कौन दे तवज्जोह
इंसान का जहाँ मरना आम सी ख़बर हो
Zain Aalamgir
कितने एहसास दफ़्न होते है रोज़ यहाँ
हमारे दिल को क़ब्रिस्तान क्यूँ नहीं कहते
Aryan Goswami
मर गए जज़्बात सबके ये बहर की जंग करते
शा'इरी की क़द्र छूटी, क्या बहर फिर, बे-बहर क्या
Zain Aalamgir
मेरे जज़्बात मेरे साथ होते हैं
मगर मैं फिर भी जज़्बाती नहीं होता
Saarthi Baidyanath
कि शायद मैं भी बच जाता मुहब्बत के ख़राबे से
मैं ने उस रोज़ दिल की बात गर मानी नहीं होती
karan singh rajput
अकेले पन का ये एहसास कुछ ऐसे भुलाता हूँ
मैं उस के लिक्खे गीतों को हमेशा गुनगुनाता हूँ

मैं उस को फ़ोन करता हूँ वो मुझ को डाँट देती है
ये डर भी इस क़दर है सर से पा तक थरथराता हूँ
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Jay kishan
तेरी आँखों को देखा तो एहसास हुआ
ये आँखें भी तहज़ीब का हिस्सा होती हैं
Ramnath Shodharthi
यूँँ तेरी राह तकते तकते सुन
मेरी आँखों में पड़ गए जाले

अब के बारिश कहीं मेरी छत से
तेरा एहसास ही न धो डाले
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Firdous khan
ढलता सूरज हम को ये एहसास दिलाने आता है
हम कितने भी ऊपर जाएँ आख़िर डूब ही जाना है
Khalid Azad
लफ़्ज़ों के इस्तिमाल में कच्चा हूँ इस लिए
समझो ये दिल की बात हमें तुम सेे प्यार है
Akash Rajpoot
तुम छोड़ गए तो मुझे एहसास हुआ ये
हाथों की पकड़ मेरी ही मज़बूत नहीं थी
Dipendra Singh 'Raaz'
उस ने ख़त इक रात लिखे थे आँसू से
दिल के सब जज़्बात लिखे थे आँसू से
Vedic Dwivedi
दिल के जज़्बात मेरे रौंद के जाने वाले
रब करे तेरे भी जज़्बात को रौंदे कोई
Shajar Abbas
एहसास नहीं होता लुटने का सनम हम को
जब आप की महफ़िल से हम लौट के आते हैं
Ajeetendra Aazi Tamaam
चुप रहने से अच्छे खासे हो जाते हैं पागल
ख़ुश रहते हैं जो अपने जज़्बात बता देते हैं
Govind kumar
यूँँ ही नहीं हम दिल के हर जज़्बात लिखते हैं
हर बात में जाँ डालकर हर बात लिखते हैं
"Nadeem khan' Kaavish"
नहीं मैं जानता जज़्बात क्या है
बताएँ वो मुझे की बात क्या है

हुआ है क्या जो मैं ये पूछता हूँ
बताओ तुम मिरी औकात क्या है
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Abhishek Bhadauria 'Abhi'
कहो तो कभी तुम कोई बात हम सेे
छिपाते ही रहते हो जज़्बात हम सेे
"Nadeem khan' Kaavish"
मानता हूँ मैं कि ये सच्चे तेरे जज़्बात हैं
ख़ैर फिर भी इतना ज़्यादा शुक्रिया अच्छा नहीं
Ambar
कुछ तो है जो ख़ास है, कुछ है जो इक एहसास है
कुछ हमारे दरमियाँ ख़ामोश से अल्फ़ाज़ हैं
Prit
उस के माथे पर होंट रखे तो एहसास हुआ मुझ को
पारस को छू कर पत्थर सोना कैसे बन जाता है
Jay kishan
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न कोई रंग न कोई भी रूप था उस का
अजब एहसास हुआ था हमें बहुत पहले
shaan manral
शब-ए-हिज्राँ में गुज़री उम्र है सारी
नहीं मालूम मुझ को शहर ये क्या है

कि दिल की बात काग़ज़ पर सजाता हूँ
नहीं मालूम मुझ को बहर ये क्या है
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Prince
कभी हम ज़ाहिर-ए-जज़्बात करने को
मरे जाते थे उन सेे बात करने को
Sanjay shajar
कोई काटे च्यूँँटी तो हो मुझ को एहसास
कि मैं जी रहा हूँ या फिर मर चुका हूँ
Irshad Siddique "Shibu"
उसी के ख़्वाब भी अल्फ़ाज़ भी जज़्बात भी उस के
उसी को भूल जाऊँ मैं, नहीं खुदगर्ज़ भी इतना
Umesh Maurya
बहा के ले गया दरिया मेरे जज़्बात सारे ही
सो दिल बहलाने को अब चल तलाशें ग़म नया कोई
Kanchan
मेरी नज़र में उस ने जब उस नज़र से देखा
दिल में मेरे ये कैसे जज़्बात आ रहे हैं
Mohd Afsar
क्या क्या है मुझ को प्यार से शिकवा, सुनाऊँगा
इक दिन मैं दिल की बात उसे जा सुनाऊँगा
Hasan Raqim
वालिद को खोने के बा'द हुआ एहसास मुझे
बिन सूरज के इस दिन की कोई औक़ात नहीं
Irshad Siddique "Shibu"
रोज़ मत सोया करो ऐ जाँ हमारे साथ में
फिर यूँँ आधी रात को कर देंगे कुछ जज़्बात में
Danish Balliavi
सिलसिला ये है कि अब वो भी ख़फ़ा रहने लगा
ख़्वाब रूठा मेरी आँखों से जुदा रहने लगा

मेरे एहसास की चाँदी की चमक मद्धम है
जब से आपे में मुहब्बत का ख़ुदा रहने लगा
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Moni Gopal Tapish
जैसे ही होती है बरसात की आवाजाही
तेज़ हो जाती है जज़्बात की आवाजाही

पेड़ पौधों को ही बस दोष न देना यारों
होती है मुझ
में भी इक ज़ात की आवाजाही
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Aqib khan
तुम अपनी आँखों में धार लगाती क्यूँ हो
लोगों के जज़्बात का ख़ून बहाती क्यूँ हो
Meem Alif Shaz
उस बे-वफ़ा की याद मुझ को आती है हर रात में
मैं दर्द की हर दास्ताँ लिखता भी हूँ जज़्बात में
Danish Balliavi
यही हसरत लिए फिरता हूँ अक्सर
कोई मेरे भी दिल की बात सुन ले
Sohil Barelvi
मैं जब भी झाँकता हूँ ख़ुद में तो एहसास होता है
कि अपने बाप की उम्मीद पानी कर रहा हूँ मैं
"Nadeem khan' Kaavish"
इतनी जल्दी तो दिल की बात नहीं होगी इस दोस्ती में
हूँ मैं इक ऐसा फूल कि जो खिलने में वक़्त लगाता है
Sumer Soni
जब प्राण पखेरू चल पड़ते हैं गगन की ओर
तब साँस नहीं रहती एहसास नहीं रहते
Sandeep dabral 'sendy'
शाइरों से मिल के देखो ज़िन्दगी क्या चीज़ है
फिर तुम्हें एहसास होगा शा'इरी क्या चीज़ है

सब निशानी ले के मुझ सेे उस ने बोला आख़िरी
मैं अभी तक सोच में हूँ आख़िरी क्या चीज़ है
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"Nadeem khan' Kaavish"
भला क्यूँ हम किसी के आस में बैठे
मेरे यारा अगर तू पास में बैठे

कोई आए कोई जाए नहीं मतलब
मगर बस तू मेरे एहसास में बैठे
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Murari Mandal
"बीते लम्हें"
जो थे हर लम्हे में सिर्फ़ मेरे

उन सेे अब साझा हम जज़्बात नहीं करते
जो कुछ वक़्त बात न होने पर नाराज़ हुआ करते थे

हाँ यार उन सेे अब हम बात नहीं करते
जिन की ज़ुल्फ़ों में थी हर छाँव मेरी

वो अब इस बेग़ैरत धूप में भी बरसात नहीं करते
जिन के लबों से हम इश्क़ पढ़ा करते थे

अब ग़म हो या ख़ुशी हम मुलाक़ात नहीं करते
याद आए मुझे उन के सात जन्मों के कुछ वादे

कमबख़्त इस जन्म में भी वादों के साथ नहीं चलते
जिन्होंने सिखाया था मुझे चलने का हुनर

वो अब गिर जाने पर भी आगे हाथ नहीं करते
हर्फ़-ए-इश्क़ सीखा हम ने जिन दिलो से

वो दिल भी अब दिल का काम नहीं करते
आँसू भी अब सूखे से आते है हुज़ूर

ये आँसू भी ठीक से ख़ैरात नहीं करते
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Hashim Khan
सभी सीरत, सभी सूरत, सभी एहसास में हो तुम
मेरी आँखों की इक ही आस हैं, उस आस में हो तुम

मेरे ख़्वाबों में आ कर ख़ुद को तुम अच्छा बताते हो
चलो मैं मान लेता हूँ ख़ुदा के ख़ास में हो तुम

परेशानी में जैसे हाथ मेरे सर पे होता है
मुझे महसूस होता है कि जैसे पास में हो तुम
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"Nadeem khan' Kaavish"
तुम्हें भी दूरी का एहसास होगा
तुम्हें भी याद आएगी हमारी
ABhishek Parashar
दिल-ओ-ज़ेहन में मेरे घर कर गए तुम
असरदार थे बे-असर कर गए तुम

सजाकर रखे थे जो एहसास अपने
अचानक इधर से उधर कर गए तुम
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Shubham Mishra
दिल-ए-जज़्बात भी कोई नहीं सुनता
मेरे हालात भी कोई नहीं सुनता

थका हारा हुआ बैठा ज़माने से
हमारी बात भी कोई नहीं सुनता
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jaani Aggarwal taak
ज़रा मुश्किल हो तो एहसास होता है हमें वरना
कहाँ आसानियों में ज़िंदगी मालूम होती है
Irshad 'Arsh'
ज़िंदगी सब को ये एहसास करा देती है
ख़ुद-कुशी करते हैं जो ख़ुद-कुशी क्यूँँ करते हैं
Rehan Mirza
इस जहाँ में है फ़क़त एक क़ज़ा सच बाक़ी
चाहे एहसास हो जज़्बात हो झूटे हैं सब
A R Sahil "Aleeg"
मैं तेरे दर्द के जज़्बात ले कर हाथ पकडूँगा
तेरे मुश्किल सभी हालात ले कर हाथ पकडूँगा

तू जैसी है मुझे वैसी ही है मंज़ूर जीवन में
तेरी अच्छी बुरी हर बात ले कर हाथ पकडूँगा
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Sanskar Shrivastav
वो है एहसास कोई नूर कोई ख़ुश्बू है
उस की तस्वीर बनाऊँ तो बनाऊँ कैसे
RIZWAN ALI RIZWAN
तुम को एहसास नहीं है मेरी बर्बादी का
तुम को एहसास अगर होता तो तुम मर जाते
Shajar Abbas
दिल के एहसास को क्यूँँ हाजत-ए-गोयाई हो
इश्क़ सादिक़ हो तो इज़हार का मोहताज नहीं
Wajid Husain Sahil
सजदे करो लाखों मगर मालूम है ना इश्क़ है
गर मिल गए तो ठीक वरना जानलेवा इश्क़ है

संगम के पानी की तरह तुम सेे मेरा दिल मिल गया
ये जान कर भी सोचती हो क्या भरोसा इश्क़ है

पूछा किसी ने माँ से चुप कब से है तेरा लाडला
कहने लगी जिस दिन मुझे इसने कहा था इश्क़ है

मन्नत से शायद अपको जन्नत तो मिल भी सकती है
पर वो मिलेगा जब उसे एहसास होगा इश्क़ है

शिद्दत जुनूँ दीवानगी काफ़ी नहीं हैं इश्क़ में
करना पड़ेगा सब्र 'मोहित' मोक्ष पाना इश्क़ है
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Kanha Mohit
जज़्बात-ओ-ख़यालात-ओ-मनाज़िर पे न रुकना
झोंके हैं हवाओं के ये चलते ही रहेंगे

हिजरत के भी दरवाज़े खुले रखना है दिल में
दुनिया है यहाँ लोग निकलते ही रहेंगे
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Javed Aslam
बात आगे बढ़ चुकी है बस ज़रा सी बात पर
उँगलियाँ उठने लगी हैं अब हमारी ज़ात पर

अपनी मर्ज़ी के मुताबिक़ ही तुम्हें करता हूँ याद
मैं ने क़ाबू पा लिया है नफ़्स पर जज़्बात पर
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Ashraf Ali
हर घड़ी हर पहर तुम मेरे पास हो
तुम बहुत ख़ूब-सूरत सा एहसास हो
Alankrat Srivastava
एक ही दिल के हैं ये सब जज़्बात
जिस की चाहत है उस से ही नफ़रत
Shubham Nankani
किसी को खो के ये एहसास हो रहा है मुझे
वो शख़्स कितना ज़रूरी था ज़िन्दगी के लिए
Shakir Dehlvi
इक तमाशा बन चुका है इश्क़ में जज़्बात-ए-दिल का
ख़ुद को अब और इश्क़ में रुस्वा करूँँ हिम्मत नहीं है
A R Sahil "Aleeg"
अपने जज़्बात ज़माने को दिखा सकता हूँ
मैं दिवाना हूँ ज़मी सर पे उठा सकता हूँ
Muneer shehryaar
हाथ थामा जो ग़ैरों का तुम ने सनम
मेरे एहसास की याद आनी मगर

भूल जाओगे तुम कैसे भूलेंगे हम
जिस से गुज़रे कभी वो सुहानी डगर
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Jitendra "jeet"
दिल कहे हालात कैसे समझे
वो मिरे जज़्बात कैसे समझे
Seema Mahapatra
बहते दिखे न अश्क कभी आँख से तेरे
जज़्बात सिर्फ़ साफ़ नज़र से दिखे हमें
Manohar Shimpi
मेरे दिल की बात समझना तेरे बस की बात नहीं,
हम दोनों में बात-विवाद का कारण तेरा ईगो है
Nirbhay Nishchhal
बात अब क्या ही करे हालात पर
फ़ख़्र उस के है मुझे जज़्बात पर
Manohar Shimpi
कोई इतना किसी के वास्ते क्यूँ ख़ास होता है
बिछड़ जाता है जब वो शख़्स तो एहसास होता है
Wajid Husain Sahil
डूबता जिस के कभी जज़्बात में
फिर उसी से ही मिला बरसात में
Manohar Shimpi
अना और रिश्ता नहीं रहते दो साथ
तुम्हें सोच कर छोड़ना होगा इक हाथ

नहीं चाहिए कोई भी तर्क मुझ को
मेरी आस्था है सो है वो मेरा नाथ

छुओ जिस्म पर जब उसे याद करना
नहीं करनी है कोई भी रात की बात

है कुछ लोग ही गाँव में खेत बोने
तुम्हें भी हुआ शहर का मोह बरसात

ज़रूरत है क्या समझा था देर से मैं
मेरे उम्र के साथ बदले थे जज़्बात
Read Full
"Dharam" Barot
इब्तिदा में होता है एहसास सब को
इश्क़ बदलेगा तज़व्वुज में हमारा
A R Sahil "Aleeg"
अजब सा एक रिश्ता चाँद का अंबर के तारों से
कि बाग़ों का मिलन हो जैसे सावन में बहारों से

जहाँ में हाँ ज़बाँ कोई मुहब्बत की नहीं होती
बयाँ जज़्बात हो जाते हैं आँखों के इशारों से
Read Full
Shivang Tiwari
भले हर-पल तिरे इस नूर का एहसास हो लेकिन
सुकून-ए-दिल तिरे दीदार के बिन आ नहीं सकता
Rohit Asthana Prabhav
दुनिया रूठी तब जा कर एहसास हुआ
आईने को दोस्त बनाया जा सकता था
Mukesh Guniwal "MAhir"
ख़ुशबू मोहब्बत की तेरी हर श्वास में है
कब से मेरा दिल इस सबब एहसास में है
Manish
एक दुनिया हैं कहीं एहसास में ढलती हुई अब
एक सूरज है जिसे हर रोज़ हीं जलना नहीं है
Raushan Ranjan
हिज्र के दरमियॉं एहसास हुआ ये हम को
वस्ल की मुश्किलें आसान थी कितनी यारों
Dhirendra Pratap Singh
तब मुझे दर्द का एहसास बहुत होता है
जब मेरी लख़्त-ए-जिगर आँख भिगो लेती है
SALIM RAZA REWA
ठीक वैसा ही था जैसे मिरे दिलबर का था
तेरे एहसास की ता'रीफ़ मैं करता कैसे
Yash Sharma
मेरे हालात क्यूँ न समझा वो
मेरे जज़्बात क्यूँ न समझा वो

मैं मुहब्बत नहीं दिखाता हूँ
इतनी सी बात क्यूँ न समझा वो
Read Full
Atif khan
हर इक मुआमले में तू मुझे कमाल लगा
तो तुझ सेे मिल के मुझे अच्छा अपना हाल लगा

यूँँ छोड़ दे तेरा एहसास इश्क़ से मुझ पर
तू अपने हाथों से इन गालों पे गुलाल लगा
Read Full
Bhuwan Singh
तेरे जज़्बात सुनना चाहता हूँ
बयाँ कर दे बहाने से किसी के
Umesh Maurya
तुम को भी एहसास हो मुझ को हमेशा खोने का
बीते लम्हों में मुझे तुम रोज़ ही देखा करो
Naresh sogarwal 'premi'
अगर तुम पास बैठो शे'र उस को इक सुना देना
उसे अच्छा लगे तो एक दो ग़ज़लें भी गा देना

अगर वो पूछ ले तुम से कि ये जज़्बात किस के हैं
बताना एक शाइ'र नाम तुम काफ़िर बता देना
Read Full
Kaffir
मुझे भी दर्द का एहसास करना आ गया था
किसी भी जानवर से अब मुझे ख़तरा नहीं है
Vishakt ki Kalam se