Bekhudi Shayari - Ishq mein khud ko bhool jaane ke jazbaat

Bekhudi shayari captures the state where love or emotions make you forget yourself completely. It reflects that deep junoon and sukoon where identity fades and only feelings remain. These lines beautifully express the magic of being lost in ishq and inner emotions.

bekhudi shayari
मेरे जुनूँ का नतीजा ज़रूर निकलेगा
इसी सियाह समुंदर से नूर निकलेगा
Ameer Qazalbash
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उन्हीं के फ़ैज़ से बाज़ार-ए-अक़्ल रौशन है,
जो गाह गाह जुनूँ इख़्तियार करते रहे
Faiz Ahmad Faiz
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क़र्ज़ की पीते थे मय लेकिन समझते थे कि हाँ
रंग लावेगी हमारी फ़ाक़ा-मस्ती एक दिन
Mirza Ghalib
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मुझ से कहा जिब्रील-ए-जुनूँ ने ये भी वही-ए-इलाही है
मज़हब तो बस मज़हब-ए-दिल है बाक़ी सब गुमराही है
Majrooh Sultanpuri
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हम को जुनूँ क्या सिखलाते हो हम थे परेशाँ तुम से ज़ियादा
चाक किए हैं हम ने अज़ीज़ो चार गरेबाँ तुम से ज़ियादा
Majrooh Sultanpuri
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कमी न की तिरे वहशी ने ख़ाक उड़ाने में
जुनूँ का नाम उछलता रहा ज़माने में
Firaq Gorakhpuri
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दिल की तमन्ना थी मस्ती में मंज़िल से भी दूर निकलते
अपना भी कोई साथी होता हम भी बहकते चलते चलते
Majrooh Sultanpuri
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वही मंज़िलें वही दश्त ओ दर तिरे दिल-ज़दों के हैं राहबर
वही आरज़ू वही जुस्तुजू वही राह-ए-पुर-ख़तर-ए-जुनूँ
Noon Meem Rashid
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एक से एक जुनूँ का मारा इस बस्ती में रहता है
एक हमीं हुशियार थे यारो एक हमीं बद-नाम हुए
Ibn E Insha
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उस से बढ़ कर किया मिलेगा और इनआम-ए-जुनूँ
अब तो वो भी कह रहे हैं अपना दीवाना मुझे
Hafeez Banarasi
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बाद-ए-बहार में सब आतिश जुनून की है
हर साल आवती है गर्मी में फ़स्ल-ए-होली
Wali Uzlat
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मेरी अक्ल-ओ-होश की सब हालतें
तुम ने साँचे में जुनूँ के ढाल दी

कर लिया था मैं ने अहद-ए-तर्क-ए-इश्क़
तुम ने फिर बाँहें गले में डाल दी
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Jaun Elia
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कुछ न मैं समझा जुनून ओ इश्क़ में
देर नासेह मुझ को समझाता रहा
Meer Taqi Meer
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ऐ इश्क़-ए-जुनूँ-पेशा हाँ इश्क़-ए-जुनूँ-पेशा
आज एक सितमगर को हँस हँस के रुलाना है
Jigar Moradabadi
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मेरी शोहरत के तक़ाज़े ही अलग थे ताबिश
गुमशुदा रहते हुए नाम कमाना था मुझे
Tousief Tabish
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करे जो क़ैद जुनूँ को वो जाल मत देना
हो जिस
में होश उसे ऐसा हाल मत देना

जो मुझ सेे मिलने का तुम को कभी ख़याल आए
तो इस ख़याल को तुम कल पे टाल मत देना
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Kashif Adeeb Makanpuri
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हर एक सम्त यहाँ वहशतों का मस्कन है
जुनूँ के वास्ते सहरा ओ आशियाना क्या
Azhar Iqbal
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ऐ मिरी ज़ात के सुकूँ आ जा
थम न जाए कहीं जुनूँ आ जा

इस से पहले कि मैं अज़िय्यत में
अपनी आँखों को नोच लूँ आ जा
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Fareeha Naqvi
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पहले कहता है जुनूँ उस का गिरेबान पकड़
फिर मेरा दिल मुझे कहता है इधर कान पकड़

ऐसी वहशत भी न हो घर के दरो बाम कहें
कोई आवाज़ ही ले आ कोई मेहमान पकड़
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Azbar Safeer
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जिन हौसलों से मेरा जुनूँ मुतमइन न था
वो हौसले ज़माने के मेआ'र हो गए
Ali Jawwad Zaidi
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आप जिस चीज़ को कहते हैं कि बेहोशी है
वो दिमाग़ों में ज़रा देर की ख़ामोशी है

सूखते पेड़ से पंछी का जुदा हो जाना
ख़ुद-परस्ती नहीं एहसान-फ़रामोशी है
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Ashu Mishra
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तेरे बग़ैर ख़ुदा की क़सम सुकून नहीं
सफ़ेद बाल हुए हैं हमारा ख़ून नहीं

न हम ही लौंडे लपाड़ी न कच्ची उम्र का वो
ये सोचा समझा हुआ इश्क़ है जुनून नहीं
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Shamim Abbas
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बर्क़-ए-फ़ना भी खाए जहाँ ठोकरें 'फ़िराक़'
राह-ए-वफ़ा में आते हैं ऐसे मक़ाम भी
Firaq Gorakhpuri
बचा लिया मुझे ग़र्क़ाब होने से उस ने
जुनून ए इश्क़ है लाया नदी के पार मुझे
Amaan Pathan
इक बार तुझे अक़्ल ने चाहा था भुलाना
सौ बार जुनूँ ने तिरी तस्वीर दिखा दी
Mahir ul Qadri
ये काएनात मेरे सामने है मिस्ल-ए-बिसात
कहीं जुनूँ में उलट दूँ न इस जहान को मैं
Akhtar Usman
अक़्ल पे बेहोशी का पर्दा डाल रखा है
नाहक़ ही तेरा‌ दर्द सँभाल रखा है

है खोटा जो बाज़ार-ए-इश्क़ में हम ने
सिक्का तेरे नाम का उछाल रखा है
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Sushrut Tiwari
ये सच है शौक़ भी पहले जुनून होता था
मगर जुनून भी अब शौक़ बन गया देखो
Saarthi Baidyanath
देखना है अगर जुनून-ए-इश्क़
लहरों पे नाचते सफ़ीने देख
Chandan Sharma
उतर न पाएगा ता उम्र इन के सर से जुनूँ
ये नौजवान अगर देख लेंगे आँखें तेरी
Shajar Abbas
दिवाने पन की अपने भी कोई सीमा नहीं यारो
जुनूँ में ख़ुद ही ख़ुद से ख़ुद का ही सर फोड़ लेते हैं
Ajeetendra Aazi Tamaam
इश्क़ की अब, इंतिहा क्या? इब्तिदा क्या?
शय ये ला-हासिल व ला-फ़ानी जुनूँ है
A R Sahil "Aleeg"
परों को खोल कर मस्ती में जब उड़ते हैं दीवाने
उड़ानों से मुकम्मल आसमाँ पर राज करते हैं
Ajeetendra Aazi Tamaam
ख़ुदा से तो कभी दुनिया, कभी ख़ुदस लड़ा हूँ मैं
जुनूँ-ए-इश्क़ में मत पूछ, दिल कितनों के तोड़े हैं
A R Sahil "Aleeg"
मेरी तलाश में तू वक़्त मत गँवा अपना
वो गुमशुदा हूँ मैं जो ख़ुद को ख़ुद नहीं मिलता
Shajar Abbas
हर एक बात पे करते हो क़त्ल-ए-आम की बातें
तुम्हीं बताओ अब अंज़ाम-ए-गर्मी-ए-जुनूँ क्या है
Ajeetendra Aazi Tamaam
आरज़ू-ए-ज़िन्दगी ले आई इतनी दूर अब
देखना है ये जुनूँ मेरा कहाँ तक जाता है
Mahesh Natakwala
आप को इल्म भी है इस का ज़रा
आप क्या क्या जुनूँ में बकते हैं

आप को हक़ है रूठ जाने का
आप चाहें तो रूठ सकते हैं
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Shajar Abbas
हल्के हल्के ही से तेरा जुनून निकलेगा
फिर भी आई याद अब आँखों से ख़ून निकलेगा
Shadab khan
आवाज़-ए-क़ैस सुन के सभी आशिक़-ए-जहाँ
दश्त-ए-जुनूँ की सिम्त को आमादा हो गए
Shajar Abbas
रात में यूँँ सुकून का होना
बात में यूँँ जुनून का होना
Seema Mahapatra
है वक़्त का कोई तक़ाज़ा या जुनूँ बाक़ी मेरा
मैं लिख रहा हूँ जिस्म पर जब तक है ख़ूँ बाक़ी मेरा
Ashkrit Tiwari
क़ुर्बान क्या करेंगे भला इस हयात पर
अपना पराया करते हैं जो बात बात पर

हर हादसे से लड़ने का पैदा करें जुनून
क़ाबू नहीं है अपना किसी हादसात पर
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Prashant Sitapuri
एक मुद्दत से गुमशुदा हूँ मैं
तुम को मिल जाऊँ तो ख़बर करना
Upendra Bajpai
मेरे जीवन में अब मस्ती नहीं है,
मेरा अब कोई भी बेस्टी नहीं है
Nirbhay Nishchhal
सुपुर्द-ए-खाक़ कर के इस जुनून-ए-शायरी को अब
ये सोचा है मुहब्बत से किनारा कर लिया जाए
Sagheer Lucky
खा गया इश्क़ मौज मस्ती के दिन
यार लानत है इस जवानी पे
Amaan mirza
गामज़न हूँ जुनूँ की राहों पर
अपनी दानिश-वरी तमाम हुई
Sumit Panchal
इमदाद करने दश्त-ए-जुनूँ से मैं आऊँगा
क़ुव्वत के साथ आशिक़ों आवाज़ दो मुझे
Shajar Abbas
क़ैस की तर्ज़ पे हम रक़्स-कुनाँ होते हुए
इश्क़-ए-महबूब में लो दश्त-ए-जुनूँ जाते हैं
Shajar Abbas
दीवाना दरे यार पे मस्ती में रहेगा
हो जितना सदा आदमी पस्ती में रहेगा
Syed Tanzeel Ashraf Qadri
मुफ़लिसी ने जुनून छीना है
और तुम ने सुकून छीना है
Meem Alif Shaz
फ़िक्र-ए-काबा न बुत परस्ती है
मेरी अपनी ही मौज मस्ती है
Monis faraz
मुर्दा है इश्क़ जज़्ब-ओ-जुनूँ भी हैं पास-पास
पाने की अब तो उस को तमन्ना भी क्या करें
A R Sahil "Aleeg"
इश्क़ का ही नशा वो करते हैं
हर सितम को सहा वो करते हैं

ये जुनूँ है या कुफ़्र है उन का
बे-वफ़ा से वफ़ा वो करते हैं
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A R Sahil "Aleeg"
सजदे करो लाखों मगर मालूम है ना इश्क़ है
गर मिल गए तो ठीक वरना जानलेवा इश्क़ है

संगम के पानी की तरह तुम सेे मेरा दिल मिल गया
ये जान कर भी सोचती हो क्या भरोसा इश्क़ है

पूछा किसी ने माँ से चुप कब से है तेरा लाडला
कहने लगी जिस दिन मुझे इसने कहा था इश्क़ है

मन्नत से शायद अपको जन्नत तो मिल भी सकती है
पर वो मिलेगा जब उसे एहसास होगा इश्क़ है

शिद्दत जुनूँ दीवानगी काफ़ी नहीं हैं इश्क़ में
करना पड़ेगा सब्र 'मोहित' मोक्ष पाना इश्क़ है
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Kanha Mohit
सुनो माधव अभी इतनी शराफत जानलेवा है
किसी पे दिल लुटाने की ये आदत जानलेवा है

करो मस्ती भले लेकिन कभी मत सीरियस होना
मुहब्बत सोच कर करना मुहब्बत जानलेवा है
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Murari Mandal
बेहोशी के आलम अब तक तारी हैं
हम ने उस पर इतनी साँसे वारी हैं
Navneet Vatsal Sahil
गया था इश्क़ में लैला के क़ैस दश्त-ए-जुनूँ
तिरा ये इश्क़ मुझे ले गया सलीब तलक
Shajar Abbas
अपने बारे में लोग कहते हैं
सर जी मस्ती में मस्त रहते हैं
Sanjay shajar
गुमशुदा हो गया चैन दिल का मेरा
इस कदर है चला मुझ पे जादू तेरा
Poet Mohit Chauhan
मेरे आगे है दरिया सी मोहब्बत
समुंदर सा ही हूँ रखता जुनूँ मैं
Rohit tewatia 'Ishq'
जुनून-ए-इश्क़ में ये बेख़ुदी का आलम है
ख़ुद अपने शहर में अपना मकान भूल गए
Shadab Shabbiri
कैसे हम इश्क़ में गुमशुदा हो गए
जिस को चाहा उसी से जुदा हो गए

अब करें किस से हम वस्ल की इल्तिजा
वो किसी और के अब ख़ुदा हो गए
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Ashok Sagar
हम को क्या क्या नहीं फ़ुसूँ हासिल
अक्ल के साथ है जुनूँ हासिल
Sumit Panchal
निभाने में कसर बाक़ी न छोड़ी याद तो होगा
मोहब्बत के जुनूँ में जो ख़म-ए-गेसू सँवारे थे
Rohan Hamirpuriya
नई है मुहब्बत नया है जुनूँ
है उस को झिझक साथ चलते हुए
Rohan Hamirpuriya
कैसा जुनून है ये कहाँ आ गई हूँ मैं
वो रास्ता कहाँ है जिधर से चली हूँ मैं
shampa andaliib
था जुनूँ दिल में असर जाने तक
दिल की दिल में रही नक़्स आने तक
Sanjay Bhat
रात दिन अब मुझे सुकून नहीं
पहले जैसा कोई जुनून नहीं

मैं तो शाइ'र भी दर्द लिख के बना
दर्द ही है रगों में ख़ून नहीं
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Bhuwan Singh
हमें तुम सेे शिकायत तो नहीं बस
तुम्हें यकदम से छोड़ा जा रहा है

किसी की याद क़ाबिज़ है नहीं तो
जुनूँ में सर को फोड़ा जा रहा है
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Shamsul Hasan ShamS
दिल था कभी तेरे लिए यूँँ गुमशुदा
तब इश्क़ में मदहोश थे बरसों हमीं
Vinod Ganeshpure
मस्ती में बहता दरिया हूँ
अंबर मुझ को देखा करता
Shivangi Shivi
वो जवानी थी तुझे हम भी जुनूँ से चाहते थे
अब तुझे दुनिया मगर हम मुख़्तसर ही देखते हैं
Meem Alif Shaz
किसी को उस नज़र से देखना भी इक ख़ता माना
जुनून-ए-इश्क़ में महबूब को हम ने ख़ुदा माना
Raj Tiwari
अब ख़त्म होने को है जुनून-ए-सफ़र मिरा
दिखने लगा है दूर से ही मुझ को घर मिरा

मैं रखना चाहता हूँ तुझे याद भी सदा
तू लौटा देना ज़ख़्म मुझे वक़्त-पर मिरा
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Harsh Kumar Bhatnagar
है तुझ सेे ही अक़ीदत है धुन ये मस्ती मेरी
तेरे बिन क्या है ये ज़िंदगी ये हस्ती मेरी
Adarsh Anand Amola
सब जुनूँ बूद सक़ाफ़त तक ही
कुछ नहीं नाज़ वफ़ा वहशत में
Kunu
हम हैं उस दौर के आशिक़ कि जहाँ अहल-ए-जुनूँ
दिल में दीदार की हसरत लिए मर जाते थे
Shakir Dehlvi
मैं इश्क़ इश्क़ करता फिरता गली गली
घर से मिरे पढ़ाई का कहके निकला हूँ

ये उम्र मौज मस्ती की है नई नई
फिर भी शराब पीने मैं छिप के निकला हूँ
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Bhanwar Mandan
दिल पे हालत जुनूँ की तारी है
सर में सौदा सवार रहता है
Sumit Panchal
चंद मख़्सूस दरख़्तों से मुहब्बत का जुनून
कुछ परिंदों को कहीं का नहीं रहने देता
divya 'sabaa'
नज़र में ठहरी हुई है मस्ती दिलों में ख़्वाहिश नई नई है
ज़मीं पे गिरते हैं चाँद तारे फ़लक की साज़िश नई नई है
Arman Habib
पार इस हद्दे-जुनूँ को अपने हर पल हम करेंगे
या तो पागल हम बनेंगे या तो पागल हम करेंगे
Dipanshu Shams
जुनून-ए-इश्क़ ने कैसा किया उस पर असर देखो
क़दम भी चूमता है मेरा वो सर चूमने वाला
Divu
ग़ज़ल में ज़ख़्म खिलते थे क़लम था एक ख़ूँ कोई
हुनर भी मेरे अश्कों का समझता था जुनूँ कोई
Amit Nandan Dev
कहीं पर ग़म-ज़दा हो तुम कहीं पर ग़म-ज़दा हैं हम
कहीं पर गुमशुदा हो तुम कहीं पर गुमशुदा हैं हम

बिछड़ कर यार हम को तो अभी तक मर ही जाना था
मगर शादीशुदा हो तुम मगर शादीशुदा हैं हम
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Gulshan Panwar
जब मुकम्मल नहीं राह यूँँ फिर सुकूँ कैसा है
अब नहीं पास वो पाने का ये जुनूँ कैसा है
Naviii dar b dar
जुनून-ए-उल्फ़त अगर हो ज़िंदा तो रोक लो तुम नसीब अपना
तुम्हारे हाथों की अब लकीरें तुम्हारे हाथों से जा रही है
Kartik Bhalerao
अच्छे अच्छे राख हुए हैं किस की ठहरी हस्ती है
मौज उड़ाओ क्यूँ घबराना जीवन ही इक मस्ती है
Neet Bhawna Jaiswal
न हारा है इश्क़ और न दुनिया थकी है
दिया जल रहा है हवा चल रही है
Khumar Barabankvi
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जहाँ पंखा चल रहा है वहीं रस्सी भी पड़ी है
मुझे फिर ख़याल आया, अभी ज़िन्दगी पड़ी है
Zubair Ali Tabish
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रास्ता जब इश्क़ का मौजूद है
फिर किसी की क्यूँँ इबादत कीजिए?

ख़ुद-कुशी करना बहुत आसान है
कुछ बड़ा करने की हिम्मत कीजिए
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Bhaskar Shukla
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आज हम दोनों को फ़ुर्सत है, चलो इश्क़ करें
इश्क़ दोनों की ज़रूरत है, चलो इश्क़ करें
Rahat Indori
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कबूतर इश्क़ का उतरे तो कैसे?
तुम्हारी छत पे निगरानी बहुत है

इरादा कर लिया गर ख़ुद-कुशी का
तो ख़ुद की आँख का पानी बहुत है
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Kumar Vishwas
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धोखा है इक फ़रेब है मंज़िल का हर ख़याल
सच पूछिए तो सारा सफ़र वापसी का है
Rajesh Reddy
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मैं इश्क़ कर रहा हूँ मगर सोचता भी हूँ
पिछले बरस जो हो चुका अब के बरस न हो
Ashu Mishra
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ख़याल में भी उसे बे-रिदा नहीं किया है
ये ज़ुल्म मुझ सेे नहीं हो सका नहीं किया है
Ali Zaryoun
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तू जो हर रोज़ नए हुस्न पे मर जाता है
तू बताएगा मुझे इश्क़ है क्या जाने दे
Ali Zaryoun
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औरों का बताया हुआ रस्ता नहीं चुनते
जो इश्क़ चुना करते हैं, दुनिया नहीं चुनते
Bhaskar Shukla
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आज तो बे-सबब उदास है जी
इश्क़ होता तो कोई बात भी थी
Nasir Kazmi
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हज़ार इश्क़ करो लेकिन इतना ध्यान रहे
कि तुम को पहली मोहब्बत की बद-दुआ न लगे
Abbas Tabish
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बात करनी मुझे मुश्किल कभी ऐसी तो न थी
जैसी अब है तेरी महफ़िल कभी ऐसी तो न थी
Bahadur Shah Zafar
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मैं क्या बताऊँ वो कितना क़रीब है मेरे
मेरा ख़याल भी उस को सुनाई देता है

वो जिस ने आँख अता की है देखने के लिए
उसी को छोड़ के सब कुछ दिखाई देता है
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Zubair Ali Tabish
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चुप रहते हैं चुप रहने दो राज़ बताओ खोले क्या
बात वफ़ा की तुम करती हो बोलो हम कुछ बोले क्या

उल्फ़त तो अफ़साना है तुम करती खूब सियासत हो
हम भी हैं मक़बूल बहुत अब बोल किसी के होलें क्या
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Anand Raj Singh
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किताब-ए-इश्क़ में हर आह एक आयत है
पर आँसुओं को हुरूफ़‌‌‌‌-ए-मुक़त्तिआ'त समझ
Umair Najmi
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इस दिल की ईंट ईंट तेरे बा'द हिल गई
तू चल दिया तो इश्क़ की बुनियाद हिल गई
Charagh Sharma
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परेशाँ है वो झूटा इश्क़ कर के
वफ़ा करने की नौबत आ गई है
Fahmi Badayuni
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