Kismat Shayari
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Kismat Shayari

    हुस्न को भी कहाँ नसीब 'जिगर'
    वो जो इक शय मिरी निगाह में है
    Jigar Moradabadi
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    तदबीर के दस्त-ए-रंगीं से तक़दीर दरख़्शाँ होती है
    क़ुदरत भी मदद फ़रमाती है जब कोशिश-ए-इंसाँ होती है
    Hafeez Banarasi
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    ये किस ने कहा है मिरी तक़दीर बना दे
    आ अपने ही हाथों से मिटाने के लिए आ
    Hasrat Jaipuri
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    जुदा किसी से किसी का ग़रज़ हबीब न हो
    ये दाग़ वो है कि दुश्मन को भी नसीब न हो
    Nazeer Akbarabadi
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    आसान है किसी के लिए आँखें भारी करना
    लेकिन मुश्किल है उम्र भर वफ़ादारी करना

    दुनिया हर रोज़ निकलती है सुब्ह काम के लिए
    अपने नसीब में है शायद बेरोज़गारी करना
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    karan singh rajput
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    महरूम है मुक़द्दर में प्यार शख़्स के पर
    बस दरमियाँ सुजूद-ए-अल्लाह फ़ासले में
    Zain Aalamgir
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    नसीब अपना खुला नहीं है
    जो चाहिए था मिला नहीं है

    उसी पे अटका है फिर से जा कर
    कुशादा दिल है भरा नहीं है
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    Sumit Panchal
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    मुक़द्दर ने उसी से दूर कर डाला
    कि जो सब सेे ज़ियादा हम को प्यारा था
    karan singh rajput
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    मुआमला था महज़ मुक़द्दर का
    मेरा महबूब निकला पत्थर का
    Ashraf Ali
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    यही सोचता हूँ मैं हर पल मिरी जाँ
    कि मुझ सेे जुदा क्यूँँ है तक़दीर तेरी

    वो बिंदी, वो काजल, वो कानों में झुमके
    रुलाती है अक्सर वो तसवीर तेरी
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    Shashank Shekhar Pathak
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    मुक़ददर भी है कोई चीज मेरे दोस्त दुनिया में
    कि जिस सेे प्यार हो उस सेे ही शादी थोड़ी होती है
    karan singh rajput
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    पावों के नीचे छाले हैं, आँखों के अंदर पानी है
    किस्मत ने मारी है ठोकर, बदकिस्मत एक कहानी है
    Shreya Shivmurti
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    दुनिया मेरे नसीब में कुछ कम लिखी गई
    वरना ये तेरा हिज्र कभी काटता ना मैं
    Khalid Azad
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    मता-ए-जान दुआ माँगती है रो-रो कर
    मेरे इलाही 'शजर' को मेरा नसीब बना
    Shajar Abbas
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    अब तो दोनों के मुक़द्दर ही आज़माने हैं
    है बॉल आख़िरी और सात रन बनाने हैं
    Upendra Bajpai
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    अब तो ग़म को ढ़ोना होगा
    जो पाया है खोना होगा

    रोना लिक्खा है किस्मत में
    सो हम ने बस रोना होगा
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    Kaviraj " Madhukar"
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    शरफ़ मिला न कभी चाँद देखने का हमें
    वो ख़ुश-नसीब हैं, जो तुझ को देखते होंगे
    KARAN
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    तीन चीजें मेरी किस्मत में नहीं हैं
    अर्ज़, शोहरत और किसी की भी मुहब्बत
    A R Sahil "Aleeg"
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    वो तिरे नसीब की बारिशें किसी और छत पे बरस गईं
    दिल-ए-बे-ख़बर मिरी बात सुन उसे भूल जा उसे भूल जा
    Amjad Islam Amjad
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    मैं उन्हीं आबादियों में जी रहा होता कहीं
    तुम अगर हँसते नहीं उस दिन मेरी तक़दीर पर
    Zia Mazkoor
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