Waqt Shayari - Time, life changes, and moments captured through poetic lines

Waqt shayari beautifully captures the essence of time and how it shapes our lives, relationships, and emotions. Whether it’s the fleeting lamha of happiness or the slow passing of difficult moments, these lines reflect how waqt changes everything. Explore heartfelt poetry that connects deeply with life’s journey and timeless feelings.

waqt shayari
जौन तुम्हें ये दौर मुबारक, दूर ग़म-ए-अय्याम से हो
एक पागल लड़की को भुला कर अब तो बड़े आराम से हो
Jaun Elia
159 Likes
samay shayari
हम को मिटा सके ये ज़माने में दम नहीं
हम से ज़माना ख़ुद है ज़माने से हम नहीं
Jigar Moradabadi
87 Likes
time shayari
चुपके चुपके रात दिन आँसू बहाना याद है
हम को अब तक आशिक़ी का वो ज़माना याद है
Hasrat Mohani
69 Likes
lamha shayari
वाक़िफ़ कहाँ ज़माना हमारी उड़ान से
वो और थे जो हार गए आसमान से
Faheem Jogapuri
85 Likes
pal shayari
ज़िंदगी भर तो कोई झूठ जिया है मैं ने
तू जो आ जाए तो ये आख़िरी पल सच हो जाए
Meraj Faizabadi
14 Likes
इसीलिए तो मैं रोया नहीं बिछड़ते समय
तुझे रवाना किया है जुदा नहीं किया है
Ali Zaryoun
183 Likes
मैं तुझ सेे मिलने समय से पहले पहुँच गया था
सो तेरे घर के क़रीब आ कर भटक रहा हूँ
Pallav Mishra
22 Likes
इस दौर-ए-सियासत का इतना सा फ़साना है
बस्ती भी जलानी है मातम भी मनाना है
Unknown
85 Likes
किसे फ़ुर्सत-ए-मह-ओ-साल है ये सवाल है
कोई वक़्त है भी कि जाल है ये सवाल है
Abbas Qamar
51 Likes
मैं रोज़ रात यही सोच कर तो सोता हूँ
कि कल से वक़्त निकालूँगा ज़िन्दगी के लिए
Swapnil Tiwari
34 Likes
दबे थे जो कहीं दिल में अचानक कल निकल आए
खुला जब एलबम तो कुछ पुराने पल निकल आए
Bhaskar Shukla
33 Likes
परों को खोल ज़माना उड़ान देखता है
ज़मीं पे बैठ के क्या आसमान देखता है
Shakeel Azmi
282 Likes
हम तोहफ़े में घड़ियाँ तो दे देते हैं
एक दूजे को वक़्त नहीं दे पाते हैं

आँखें ब्लैक एंड व्हाइट हैं तो फिर इन
में
रंग बिरंगे ख़्वाब कहाँ से आते हैं?
Read Full
Fareeha Naqvi
54 Likes
गिफ़्ट कर देता हूँ उस को मैं किताबें, लेकिन
उन को पढ़ लेने की मोहलत नहीं देता उस को
Harman Dinesh
24 Likes
उस वक़्त भी अक्सर तुझे हम ढूँढ़ने निकले
जिस धूप में मज़दूर भी छत पर नहीं जाते
Munawwar Rana
57 Likes
हमारी मौत पर बेशक ज़माना आएगा रोने
मगर ज़िंदा हैं जब तक चैन से जीने नहीं देगा
Astitwa Ankur
31 Likes
शोहरत की बुलंदी भी पल भर का तमाशा है
जिस डाल पे बैठे हो वो टूट भी सकती है
Bashir Badr
40 Likes
लंबा हिज्र गुज़ारा तब ये मिलने के पल चार मिले
जैसे एक बड़े हफ़्ते में छोटा सा इतवार मिले

माना थोड़ा मुश्किल है पर रोज़ दुआ में माँगा है
जो मुझ सेे भी ज़्यादा चाहे तुझ को ऐसा यार मिले
Read Full
Bhaskar Shukla
43 Likes
जान भी अब दिल पे वारी जाएगी
ये बला सर से उतारी जाएगी

एक पल तुझ बिन गुज़रना है कठिन
ज़िन्दगी कैसे गुज़ारी जाएगी
Read Full
Anjum Rehbar
38 Likes
बग़ैर चश्में के जो देख भी न पाता है
वो बेवक़ूफ़ मुझे देखना सिखाता है

अगर ये वक़्त डुबोएगा मेरी नाव को
तो इस सेे कह दो मुझे तैरना भी आता है
Read Full
Vikram Gaur Vairagi
42 Likes
गुज़रता ही नहीं वो एक लम्हा
इधर मैं हूँ कि बीता जा रहा हूँ
Madan Mohan Danish
28 Likes
वक़्त-ए-रुख़्सत आब-दीदा आप क्यूँँ हैं
जिस्म से तो जाँ हमारी जा रही है
Azm Shakri
26 Likes
तुम्हें देखे ज़माना हो गया है
नज़र महके ज़माना हो गया है

बिछड़के तुम सेे आँखें बुझ गई हैं
ये दिल धड़के ज़माना हो गया है
Read Full
Subhan Asad
32 Likes
जब भी उस कूचे में जाना पड़ता है
ज़ख़्मों पर तेज़ाब लगाना पड़ता है

उस के घर से दूर नहीं है मेरा घर
रस्ते में पर एक ज़माना पड़ता है
Read Full
Subhan Asad
24 Likes
अपना ज़माना आप बनाते हैं अहल-ए-दिल
हम वो नहीं कि जिन को ज़माना बना गया
Jigar Moradabadi
24 Likes
नए दौर के नए ख़्वाब हैं नए मौसमों के गुलाब हैं
ये मोहब्बतों के चराग़ हैं इन्हें नफ़रतों की हवा न दे
Bashir Badr
55 Likes
हम इश्क़ के मारों का इतना ही फ़साना है
रोने को नहीं कोई हँसने को ज़माना है
Jigar Moradabadi
39 Likes
उसी की तरह मुझे सारा ज़माना चाहे
वो मिरा होने से ज़्यादा मुझे पाना चाहे
Kumar Vishwas
62 Likes
या वो थे ख़फ़ा हम से या हम हैं ख़फ़ा उन से
कल उन का ज़माना था आज अपना ज़माना है
Jigar Moradabadi
15 Likes
शहर-ए-जाँ में वबाओं का इक दौर था
मैं अदा-ए-तनफ़्फ़ुस में कमज़ोर था
Pallav Mishra
24 Likes
मैं तुझ से मिलने समय से पहले पहुँच गया था
सो तेरे घर के क़रीब आ कर भटक रहा हूँ
Pallav Mishra
28 Likes
उम्र भर की बात बिगड़ी इक ज़रा सी बात में
एक लम्हा ज़िंदगी भर की कमाई खा गया
Nazeer Banarasi
30 Likes
दो तरफ़ था हुजूम सदियों का
एक लम्हा सा दरमियाँ मैं था
Ejaz Azmi
17 Likes
जो चराग़ सारे बुझा चुके उन्हें इंतिज़ार कहाँ रहा
ये सुकूँ का दौर-ए-शदीद है कोई बे-क़रार कहाँ रहा
Ada Jafarey
32 Likes
उन्हें सदियों न भूलेगा ज़माना
यहाँ जो हादसे कल हो गए हैं
Nasir Kazmi
26 Likes
जो वक़्त-ए-ख़त्ना मैं चीख़ा तो नाई ने कहा हँस कर
मुसलमानी में ताक़त ख़ून ही बहने से आती है
Akbar Allahabadi
21 Likes
इस दौर-ए-मुंसिफ़ी में ज़रूरी नहीं 'वसीम'
जिस शख़्स की ख़ता हो उसी को सज़ा मिले
Waseem Barelvi
33 Likes
ये कह दिया है मिरे आँसुओं ने तंग आ कर
हमें ब-वक़्त-ए-ज़रूरत निकालिए साहब
Afzal Khan
22 Likes
दिल है परेशाँ उन की ख़ातिर
पल भर को आराम नहीं है
Anwar Taban
28 Likes
तू उस निगाह से पी वक़्त-ए-मय-कशी 'ताबाँ'
की जिस निगाह पे क़ुर्बान पारसाई हो
Anwar Taban
14 Likes
आग का क्या है पल दो पल में लगती है
बुझते बुझते एक ज़माना लगता है
Kaif Bhopali
36 Likes
हाए क्या दौर-ए-ज़िंदगी गुज़रा
वाक़िए हो गए कहानी से
Gulzar Dehlvi
21 Likes
साल के आख़िरी दिन उस ने दिया वक़्त हमें
अब तो ये साल कई साल नहीं गुज़रेगा
Shariq Kaifi
71 Likes
इक लफ़्ज़-ए-मोहब्बत का अदना ये फ़साना है
सिमटे तो दिल-ए-आशिक़ फैले तो ज़माना है
Jigar Moradabadi
30 Likes
था इंतिज़ार मनाएँगे मिल के दीवाली
न तुम ही लौट के आए न वक़्त-ए-शाम हुआ
Aanis Moin
23 Likes
जिस ने इस दौर के इंसान किए हैं पैदा
वही मेरा भी ख़ुदा हो मुझे मंज़ूर नहीं
Hafeez Jalandhari
25 Likes
नहीं इताब-ए-ज़माना ख़िताब के क़ाबिल
तिरा जवाब यही है कि मुस्कुराए जा
Hafeez Jalandhari
21 Likes
इश्क़ को जब हुस्न से नज़रें मिलाना आ गया
ख़ुद-ब-ख़ुद घबरा के क़दमों में ज़माना आ गया
Asad Bhopali
32 Likes
कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी
सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
352 Likes
मैं ने इक उम्र से बटुए में सँभाली हुई है
वही तस्वीर जो इक पल नहीं देखी जाती
Jawwad Sheikh
59 Likes
ये हुनर जो आ जाए, आप का ज़माना है
पाँव किस के छूने हैं, सर कहाँ झुकाना है
Astitwa Ankur
48 Likes
मैं उस सेे दूर था तो शोर था साजिश है, साजिश है
उसे बाहों में खुलकर कस लिया दो पल तो हंगामा
Kumar Vishwas
72 Likes
ग़म-ए-ज़माना ने मजबूर कर दिया वर्ना
ये आरज़ू थी कि बस तेरी आरज़ू करते
Akhtar Shirani
24 Likes
कोई अटका हुआ है पल शायद
वक़्त में पड़ गया है बल शायद

दिल अगर है तो दर्द भी होगा
इस का कोई नहीं है हल शायद
Read Full
Gulzar
60 Likes
उस से मिले ज़माना हुआ लेकिन आज भी
दिल से दुआ निकलती है ख़ुश हो जहाँ भी हो
Mohammad Alvi
29 Likes
तुम्हारे ख़त को जलने में ज़रा सा वक़्त बाकी है
ये दिल बाहर निकलने में ज़रा सा वक़्त बाकी है

तुम्हारा फ़ैसला है पास रुकना या नहीं रुकना
मेरी क़िस्मत बदलने में ज़रा सा वक़्त बाकी है
Read Full
Tanoj Dadhich
18 Likes
पूरी काइ‌नात में एक क़ातिल बीमारी की हवा हो गई
वक़्त ने कैसा सितम ढाया कि दूरियाँ ही दवा हो गईं
Unknown
40 Likes
ये तो बढ़ती ही चली जाती है मीआद-ए-सितम
ज़ुज़ हरीफ़ान-ए-सितम किस को पुकारा जाए

वक़्त ने एक ही नुक्ता तो किया है ता'लीम
हाकिम-ए-वक़त को मसनद से उतारा जाए
Read Full
Jaun Elia
47 Likes
जमाना भूल पाएगा नहीं अपनी मुहब्बत
छपेंगे क्लास दसवीं में सभी क़िस्से हमारे
Shubham Seth
32 Likes
सोचने बैठें तो इस दुनिया में
एक लम्हा न गुज़ारा जाए
Mohammad Alvi
26 Likes
हम पे कर ध्यान अरे चाँद को तकने वाले
चाँद के पास तो मोहलत है सहर होने तक
Rehman Faris
40 Likes
इक पल में इक सदी का मज़ा हम से पूछिए
दो दिन की ज़िंदगी का मज़ा हम से पूछिए

भूले हैं रफ़्ता रफ़्ता उन्हें मुद्दतों में हम
क़िस्तों में ख़ुद-कुशी का मज़ा हम से पूछिए
Read Full
Khumar Barabankvi
38 Likes
मौत आए तो कुछ पल पहले पता चले
फ़ोन लगाना है मुझ को इक लड़की को
Tanoj Dadhich
18 Likes
एक भी उम्मीद की चिट्ठी इधर आती नहीं
हो न हो अपने समय का डाकिया बीमार है
Kunwar Bechain
51 Likes
ये भी तो जब्र-ए-वक़्त है तू मुझे याद भी नहीं
जैसे सँभल गए हो तुम वैसे सँभल गया हूँ मैं
Noon Meem Danish
30 Likes
ज़माना इश्क़ के मारों को मात क्या देगा
दिलों के खेल में ये जीत हार कुछ भी नहीं
Akhtar Saeed Khan
31 Likes
कान्हा होंगे लोग वहाँ के राधा होंगी बालाएँ
प्यार की बंसी बजती होगी हर समय हर ठाओं रे
Ghaus Siwani
21 Likes
श्याम गोकुल न जाना कि राधा का जी अब न बंसी की तानों पे लहराएगा
किस को फ़ुर्सत ग़म-ए-ज़िंदगी से यहाँ कौन बे-वक़्त के राग सुन पाएगा
Abid Hashri
25 Likes
अव्वल अव्वल ईजाद हुआ इश्क़ ख़ुदा से
फिर उस के बा'द इस जहाँ में रस्सियाँ बनी

स्कैच को बनाते वक़्त हम उदास थे बहुत
सो शकल हमारी देख कर उदासियाँ बनी
Read Full
Nawaaz
37 Likes
घूमता रहता है हर वक़्त मेरी आँखों में
एक चेहरा जो कई साल से देखा भी नहीं
Riyaz Tariq
35 Likes
किसे है वक़्त मोहब्बत में दर-ब-दर भटके
मैं उस के शहर गया था किसी ज़रूरत से
Riyaz Tariq
32 Likes
ग़ुबार-ए-वक़्त में अब किस को खो रही हूँ मैं
ये बारिशों का है मौसम कि रो रही हूँ मैं
Shahnaz Parveen Sahar
38 Likes
अब नाम नहीं काम का क़ाएल है ज़माना
अब नाम किसी शख़्स का रावन न मिलेगा
Anwar Jalalpuri
28 Likes
न कोई रंज का लम्हा किसी के पास आए
ख़ुदा करे कि नया साल सब को रास आए
Faryad Aazar
30 Likes
इक पल का क़ुर्ब एक बरस का फिर इंतिज़ार
आई है जनवरी तो दिसम्बर चला गया
Rukhsaar Nazimabadi
22 Likes
एक लम्हा लौट कर आया नहीं
ये बरस भी राएगाँ रुख़्सत हुआ
Inam Nadeem
18 Likes
वक़्त देता था वो मिलने का तभी रक्खी थी
दोस्त इक दौर था मैं ने भी घड़ी रक्खी थी

रास्ता ख़त्म मकानों के तजावुज़ से हुआ
मैं ने जब नक़्शा बनाया था गली रक्खी थी
Read Full
Nadir Ariz
43 Likes
वक़्त देता था वो मिलने का तभी रक्खी थी
दोस्त इक दौर था मैं ने भी घड़ी रक्खी थी
Nadir Ariz
53 Likes
तुम्हीं से प्यार मुझ को इस लिए है
ज़माना आज़मा कर आ गया हूँ
Divy Kamaldhwaj
46 Likes
ये मोहब्बत का फ़साना भी बदल जाएगा
वक़्त के साथ ज़माना भी बदल जाएगा
Waseem Barelvi
45 Likes
हमें हर वक़्त ये एहसास दामन-गीर रहता है
पड़े हैं ढेर सारे काम और मोहलत ज़रा सी है
Khurshid Talab
15 Likes
वो थे जवाब के साहिल पे मुंतज़िर लेकिन
समय की नाव में मेरा सवाल डूब गया
Bekal Utsahi
25 Likes
मिलने की तरह मुझ सेे वो पल भर नहीं मिलता
दिल उस से मिला जिस सेे मुक़द्दर नहीं मिलता
Naseer Turabi
73 Likes
जैसे तुम ने वक़्त को हाथ में रोका हो
सच तो ये है तुम आँखों का धोख़ा हो
Tehzeeb Hafi
142 Likes
ये रख रखाव कभी ख़त्म होने वाला नहीं
बिछड़ते वक़्त भी तुझ को गुलाब दूँगा मैं
Khurram Afaq
56 Likes
सुनो हर-वक़्त इतना याद भी मत कीजिए हम को
कहीं ऐसा न हो की हिचकियों में जाँ निकल जाए
Sandeep dabral 'sendy'
जब मसअले न हल हो सकें बात-चीत से
फिर जंग ही लड़ो कि ज़माना ख़राब है
shaan manral
तुम्हारी बेरुख़ी के ठीक पीछे
हमारा इश्क़ भी तो पल रहा है
Umesh Maurya
23 Likes
ये दौर बेहिसी का फ़रेबी का दौर है
इस दौर में ये साहिब-ए-किरदार क्या करें
Shajar Abbas
अब आ भी जाओ के सुकूंँ मिले मुझे
अगर जो जाना था तो क्यूँँंँ मिले मुझे

ज़माना हो न हो रकी़ब बीच में
तू अब कभी मिले तो यूँंँ मिले मुझे
Read Full
Faiz Ahmad
इस लिए डाल के आते हैं कुएँ में नेकी
जब बुरा वक़्त पड़ेगा तो निकल आएगी
''Akbar Rizvi"
10 Likes
चाहे हो आसमान पे चाहे ज़मीं पे हो
वहशत का रक़्स हम ही करेंगे कहीं पे हो

दिल पर तुम्हारे नाम की तख़्ती लगी न थी
फिर भी ज़माना जान गया तुम यहीं पे हो
Read Full
Nirmal Nadeem
ख़ालीपन में काम हमारा फ़िक्र तुम्हारी ज़िक्र तुम्हारा
गुज़रा वक़्त इसी में सारा फ़िक्र तुम्हारी ज़िक्र तुम्हारा

ग़ालिब ने क्या ख़ूब कहा था इश्क़ निकम्मा कर डालेगा
इस धंधे में सिर्फ़ ख़सारा फ़िक्र तुम्हारी ज़िक्र तुम्हारा
Read Full
Saurabh Mehta 'Alfaaz'
किसी को मार देने का सलीक़ा ये भी है 'तन्हा'
उसे बस प्यार में डालो, उसी पल छोड़ दो तन्हा
Tanha
भरोसा मुझ पे रक्खो और कुछ पल
रुका हूँ, मैं अभी हारा नहीं हूँ
Divy Kamaldhwaj
36 Likes
ज़माना ज़ुल्म करता है ख़ुशी से
कभी तुझ को कभी मुझ को सताए
Meem Alif Shaz
जहाँ तक मुझ सेे मतलब है जहाँ को
वही तक मुझ को पूछा जा रहा है

ज़माने पर भरोसा करने वालों
भरोसे का ज़माना जा रहा है
Read Full
Naeem Akhtar Khadimi
67 Likes
जिन की दर्द-भरी बातों से एक ज़माना राम हुआ
'क़ासिर' ऐसे फ़न-कारों की क़िस्मत में बन-बास रहा
Ghulam Mohammad Qasir
15 Likes
मेरी इक तस्वीर देखी तुम ने पल भर प्यार से
और वो तस्वीर उस पल और प्यारी हो गई
Sanskriti Shree
थी इक वक़्त अब शा'इरी बस बची है
यक़ीं करना मुझ
में मुहब्बत नहीं है
Read Full
Parul Singh "Noor"
39 Likes
समझना है अगर मुझ को तो बस इतना समझना
ग़मों के दौर में भी तुम मुझे अपना समझना
Avtar Singh Jasser
अहबाब मेरा कितना ज़ियादा बदल गया
तू पूछता है मुझ से भला क्या बदल गया

अब तू तड़ाक करता है वो बात बात पर
अब उस के बात चीत का लहजा बदल गया

क़ुर्बत में उस के अच्छे से अच्छे बदल गए
जो मैं भी उस के पास जा बैठा बदल गया

पहले तो साथ रहने की हामी बहुत भरी
फिर एक रोज़ उस का इरादा बदल गया

लैला बदल गई तो गई साथ साथ ही
मजनूँ बदल गया ये ज़माना बदल गया

तस्वीर अर्से बा'द बदलती है सब्र रख
ऐसा नहीं न होता कि सोचा बदल गया
Read Full
shaan manral
वक़्त पर फ़ैसला नहीं करते,
और फिर 'काश!..काश!' करते हो।
Tanoj Dadhich
42 Likes
सोचता हूँ वक़्त की तस्वीर जब मुझ सेे बनेगी
तो भला उस की कलाई पर घड़ी कैसी लगेगी

चाय उस से पूछ तो सकता हूँ मैं भी दोस्त,लेकिन
सोचता हूँ कौन सा वो कहने भर से चल पड़ेगी
Read Full
Abhishar Geeta Shukla
31 Likes
उसे लगता रहा बस वक़्त काटा जा रहा है पर
मुझे बातों ही बातों में मुहब्बत हो गई उस सेे
Ravi 'VEER'
वो ज़माना गुज़र गया कब का
था जो दीवाना मर गया कब का
Javed Akhtar
117 Likes
हुस्न कुछ और नहीं छत की हरी काई है
वक़्त-बे-वक़्त जहाँ पाँव फिसल जाता है
Ashu Mishra
52 Likes
एक था वक़्त जब आँखों में था ख़्वाबों का हुजूम
अब तो इक ख़्वाब टटोले से नहीं मिलता है
Dipendra Singh 'Raaz'