Haalaat Shayari - Life situations, struggles, and changing circumstances in poetic words

Haalaat shayari beautifully captures the ups and downs of life and the emotions tied to changing circumstances. Whether it’s majboori, waqt ka khel, or unexpected turns, these verses reflect how situations shape our feelings and thoughts. Explore heartfelt lines that express real-life struggles and truths.

किसे फ़ुर्सत-ए-मह-ओ-साल है ये सवाल है
कोई वक़्त है भी कि जाल है ये सवाल है
Abbas Qamar
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मैं रोज़ रात यही सोच कर तो सोता हूँ
कि कल से वक़्त निकालूँगा ज़िन्दगी के लिए
Swapnil Tiwari
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ये भी अच्छा हुआ मौत ने आ कर हम को बचा लिया
वरना हालत ऐसी थी, हम शाइ'र भी हो सकते थे
Bhaskar Shukla
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हम तोहफ़े में घड़ियाँ तो दे देते हैं
एक दूजे को वक़्त नहीं दे पाते हैं

आँखें ब्लैक एंड व्हाइट हैं तो फिर इन
में
रंग बिरंगे ख़्वाब कहाँ से आते हैं?
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Fareeha Naqvi
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उस वक़्त भी अक्सर तुझे हम ढूँढ़ने निकले
जिस धूप में मज़दूर भी छत पर नहीं जाते
Munawwar Rana
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तुम्हारे बा'द ये दुख भी तो सहना पड़ रहा है
किसी के साथ मजबूरी में रहना पड़ रहा है
Ali Zaryoun
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हालत जो हमारी है तुम्हारी तो नहीं है
ऐसा है तो फिर ये कोई यारी तो नहीं है
Ali Zaryoun
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अब जो कोई पूछे भी तो उस से क्या शरह-ए-हालात करें
दिल ठहरे तो दर्द सुनाएँ दर्द थमें तो बात करें
Faiz Ahmad Faiz
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चले जाओ भी अब जी लेंगे पर
सच कहो मजबूरी है क्या

मुझे ये कहानी कुछ और लिखनी थी
तुम्हारे हिसाब से पूरी है क्या
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Zubair Ali Tabish
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एक ही तो हवस रही है हमें
अपनी हालत तबाह की जाए
Jaun Elia
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बग़ैर चश्में के जो देख भी न पाता है
वो बेवक़ूफ़ मुझे देखना सिखाता है

अगर ये वक़्त डुबोएगा मेरी नाव को
तो इस सेे कह दो मुझे तैरना भी आता है
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Vikram Gaur Vairagi
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हालत-ए-हाल से बेगाना बना रक्खा है
ख़ुद को माज़ी का निहाँ-ख़ाना बना रक्खा है
Abbas Qamar
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वक़्त-ए-रुख़्सत आब-दीदा आप क्यूँँ हैं
जिस्म से तो जाँ हमारी जा रही है
Azm Shakri
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अजीब हालत है जिस्म-ओ-जाँ की हज़ार पहलू बदल रहा हूँ
वो मेरे अंदर उतर गया है मैं ख़ुद से बाहर निकल रहा हूँ
Azm Shakri
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जो वक़्त-ए-ख़त्ना मैं चीख़ा तो नाई ने कहा हँस कर
मुसलमानी में ताक़त ख़ून ही बहने से आती है
Akbar Allahabadi
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ये कह दिया है मिरे आँसुओं ने तंग आ कर
हमें ब-वक़्त-ए-ज़रूरत निकालिए साहब
Afzal Khan
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तू उस निगाह से पी वक़्त-ए-मय-कशी 'ताबाँ'
की जिस निगाह पे क़ुर्बान पारसाई हो
Anwar Taban
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हाल ये है कि अपनी हालत पर
ग़ौर करने से बच रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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हँस के फ़रमाते हैं वो देख के हालत मेरी
क्यूँँ तुम आसान समझते थे मोहब्बत मेरी
Ameer Minai
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साल के आख़िरी दिन उस ने दिया वक़्त हमें
अब तो ये साल कई साल नहीं गुज़रेगा
Shariq Kaifi
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था इंतिज़ार मनाएँगे मिल के दीवाली
न तुम ही लौट के आए न वक़्त-ए-शाम हुआ
Aanis Moin
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बार बार उस के दर पे जाता हूँ
हालत अब इज़्तिराब की सी है
Meer Taqi Meer
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तुम्हारे ख़त को जलने में ज़रा सा वक़्त बाकी है
ये दिल बाहर निकलने में ज़रा सा वक़्त बाकी है

तुम्हारा फ़ैसला है पास रुकना या नहीं रुकना
मेरी क़िस्मत बदलने में ज़रा सा वक़्त बाकी है
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Tanoj Dadhich
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पूरी काइ‌नात में एक क़ातिल बीमारी की हवा हो गई
वक़्त ने कैसा सितम ढाया कि दूरियाँ ही दवा हो गईं
Unknown
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ये तो बढ़ती ही चली जाती है मीआद-ए-सितम
ज़ुज़ हरीफ़ान-ए-सितम किस को पुकारा जाए

वक़्त ने एक ही नुक्ता तो किया है ता'लीम
हाकिम-ए-वक़त को मसनद से उतारा जाए
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Jaun Elia
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मिल के होती थी कभी ईद भी दीवाली भी
अब ये हालत है कि डर डर के गले मिलते हैं
Unknown
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ये भी तो जब्र-ए-वक़्त है तू मुझे याद भी नहीं
जैसे सँभल गए हो तुम वैसे सँभल गया हूँ मैं
Noon Meem Danish
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श्याम गोकुल न जाना कि राधा का जी अब न बंसी की तानों पे लहराएगा
किस को फ़ुर्सत ग़म-ए-ज़िंदगी से यहाँ कौन बे-वक़्त के राग सुन पाएगा
Abid Hashri
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अव्वल अव्वल ईजाद हुआ इश्क़ ख़ुदा से
फिर उस के बा'द इस जहाँ में रस्सियाँ बनी

स्कैच को बनाते वक़्त हम उदास थे बहुत
सो शकल हमारी देख कर उदासियाँ बनी
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Nawaaz
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घूमता रहता है हर वक़्त मेरी आँखों में
एक चेहरा जो कई साल से देखा भी नहीं
Riyaz Tariq
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किसे है वक़्त मोहब्बत में दर-ब-दर भटके
मैं उस के शहर गया था किसी ज़रूरत से
Riyaz Tariq
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ग़ुबार-ए-वक़्त में अब किस को खो रही हूँ मैं
ये बारिशों का है मौसम कि रो रही हूँ मैं
Shahnaz Parveen Sahar
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वक़्त देता था वो मिलने का तभी रक्खी थी
दोस्त इक दौर था मैं ने भी घड़ी रक्खी थी

रास्ता ख़त्म मकानों के तजावुज़ से हुआ
मैं ने जब नक़्शा बनाया था गली रक्खी थी
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Nadir Ariz
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वक़्त देता था वो मिलने का तभी रक्खी थी
दोस्त इक दौर था मैं ने भी घड़ी रक्खी थी
Nadir Ariz
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मजबूरी में रक़ीब ही बनना पड़ा मुझे
महबूब रहके मेरी जो इज़्ज़त नहीं हुई
Sabahat Urooj
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जैसे तुम ने वक़्त को हाथ में रोका हो
सच तो ये है तुम आँखों का धोख़ा हो
Tehzeeb Hafi
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ये रख रखाव कभी ख़त्म होने वाला नहीं
बिछड़ते वक़्त भी तुझ को गुलाब दूँगा मैं
Khurram Afaq
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सुनो हर-वक़्त इतना याद भी मत कीजिए हम को
कहीं ऐसा न हो की हिचकियों में जाँ निकल जाए
Sandeep dabral 'sendy'
बद-हवा सेी है बे-ख़याली है
क्या ये हालत भी कोई हालत है

ज़िंदगी से है जंग शाम-ओ-सहर
मौत से शिकवा है शिकायत है
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Chandan Sharma
इस लिए डाल के आते हैं कुएँ में नेकी
जब बुरा वक़्त पड़ेगा तो निकल आएगी
''Akbar Rizvi"
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ख़ालीपन में काम हमारा फ़िक्र तुम्हारी ज़िक्र तुम्हारा
गुज़रा वक़्त इसी में सारा फ़िक्र तुम्हारी ज़िक्र तुम्हारा

ग़ालिब ने क्या ख़ूब कहा था इश्क़ निकम्मा कर डालेगा
इस धंधे में सिर्फ़ ख़सारा फ़िक्र तुम्हारी ज़िक्र तुम्हारा
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Saurabh Mehta 'Alfaaz'
उस को भी उस की बाँहों में सोना होगा
सोना ही है रिश्तों की भी मजबूरी है
Umesh Maurya
थी इक वक़्त अब शा'इरी बस बची है
यक़ीं करना मुझ
में मुहब्बत नहीं है
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Parul Singh "Noor"
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वक़्त पर फ़ैसला नहीं करते,
और फिर 'काश!..काश!' करते हो।
Tanoj Dadhich
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सोचता हूँ वक़्त की तस्वीर जब मुझ सेे बनेगी
तो भला उस की कलाई पर घड़ी कैसी लगेगी

चाय उस से पूछ तो सकता हूँ मैं भी दोस्त,लेकिन
सोचता हूँ कौन सा वो कहने भर से चल पड़ेगी
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Abhishar Geeta Shukla
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उसे लगता रहा बस वक़्त काटा जा रहा है पर
मुझे बातों ही बातों में मुहब्बत हो गई उस सेे
Ravi 'VEER'
हुस्न कुछ और नहीं छत की हरी काई है
वक़्त-बे-वक़्त जहाँ पाँव फिसल जाता है
Ashu Mishra
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एक था वक़्त जब आँखों में था ख़्वाबों का हुजूम
अब तो इक ख़्वाब टटोले से नहीं मिलता है
Dipendra Singh 'Raaz'
अपनी हालत का ख़ुद एहसास नहीं है मुझ को
मैं ने औरों से सुना है कि परेशान हूँ मैं
Aasi Uldani
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बिछड़ते वक़्त भी हिम्मत नहीं जुटा पाया
कभी भी उस को गले से नहीं लगा पाया

किसी को चाहते रहने की सज़ा पाई है
मैं चार साल में लड़की नहीं पटा पाया
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Shadab Asghar
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हम वो हैं जो नइँ डरते वक़्त के इम्तिहान से
वो परिंदे और थे जो डर गए आसमान से
Madhav
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उस ने छोड़ा है मुझे छोड़ते हैं जैसे लोग
बाढ़ के वक़्त सभी ग़ैर ज़रूरी सामान
Vishnu virat
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हम सेे मिलिए नशे की हालत में
बिन पिए होश ही नहीं रहता
Harsh Kumar
मैं तो उस वक़्त से डरता हूँ कि वो पूछ न ले
ये अगर ज़ब्त का आँसू है तो टपका कैसे
Ahmad Nadeem Qasmi
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गिरते पड़ते हुए हर शख़्स सँभल जाता है
मसअला कुछ भी हो हल उस का निकल जाता है

यूँँ न घबरा मेरे मन वक़्त की चालाकी से
वक़्त कैसा भी हो इक दिन वो बदल जाता है
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Daqiiq Jabaalii
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हालत तो ज़रा देख दिवाने की तेरे बा'द
ये साँस भी लेता है ये ज़िंदा भी नहीं है
Amaan Pathan
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हम तुम में कल दूरी भी हो सकती है
वज्ह कोई मजबूरी भी हो सकती है
Bedil Haidri
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ये मरना जीना भी शायद मजबूरी की दो लहरें हैं
कुछ सोच के मरना चाहा था कुछ सोच के जीना चाहा है
Sahar Ansari
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अगर तुम देर से सोते हो अफ़सर बन नहीं सकते
अगर तुम वक़्त पे सोते हो शाइ'र बन नहीं सकते
Tanoj Dadhich
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हमें भी वक़्त ने पत्थर सिफ़त बना डाला
हमीं थे मोम की सूरत पिघलने वाले लोग

सितम तो ये कि हमारी सफ़ों में शामिल हैं
चराग़ बुझते ही ख़ेमा बदलने वाले लोग
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Iqbal Ashhar
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वक़्त बदलेगा तो इस बार मैं पूछूँगा उसे
तुम बदलते हो तो क्यूँँ लोग बदल जाते हैं
Khalil Ur Rehman Qamar
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ग़ैरों से तो फ़ुर्सत तुम्हें दिन रात नहीं है
हाँ मेरे लिए वक़्त-ए-मुलाक़ात नहीं है
Lala Madhav Ram Jauhar
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झुक के मिलना मेरी आदत नहीं मजबूरी है
मैं ने अहबाब के एहसान उठाए हुए हैं
Sarwar Khan Sarwar
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लोग खाते हैं तरस मुझ पे तो हैरत कैसी
अपनी हालत पे मुझे ख़ुद भी तरस आता है
Vikas Sahaj
कुछ वक़्त ने तोड़ा है भरम और कुछ उस ने
मैं तो ये समझता था कोई बात है मुझ में
Ashu Mishra
मेरी इस हालत पे हँसने वाले ऐ शख़्स
एक दिन दुनिया तुझे भी आज़माए

तुझ को भी मजबूर कर दे तेरे अपने
दिल दुखाने की तू भी क़ीमत चुकाए
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Haresh Vanza
मेरे लिए ये कोई नया सानिहा नहीं
इक वक़्त बा'द हर किसी ने छोड़ा है मुझे
Haresh Vanza
नहीं नहीं मैं बहुत ख़ुश रहा हूँ तेरे बग़ैर
यक़ीन कर कि ये हालत अभी अभी हुई है
Irfan Sattar
मुस्कुराए हम उस से मिलते वक़्त
रो न पड़ते अगर ख़ुशी होती
Jaun Elia
कहीं मैं देर से पहुँचूँ तो याद आता है
कहीं मैं वक़्त से पहले भी जाया करता था
Kabir Athar
थोड़ा वक़्त और गुजारों साथ में
अभी बहुत सी गजलें मेरी, पूरी होनी बाकी हैं
Anurudh kumar shastri
वक़्त बेवक़्त जब भी दिल करे तो आ जाना
जबसे गए हो तुम कभी कुंडी नहीं डाली
Aryan Goswami
जब कभी नींद हमें वक़्त पे आने लगे है
तो डर के तेरी याद को आवाज़ लगा देते हैं
Parwez Akhtar
आप मेरे साथ वक़्त गुज़ारना चाहते है?
माफ कीजिएगा मैं वैसा आदमी नहीं हूँ
karan singh rajput
ये दौर बुरा है तो कल अच्छा भी आएगा
इस वक़्त ज़माने को उम्मीद ये रखनी है
Prashant Sitapuri
वक़्त गुज़रा नहीं यहाँ, समझो
है गुज़ारा गया यहाँ हम सेे
Zain Aalamgir
वक़्त ठहरा नवाब का नाती
अपनी मर्ज़ी चलाता रहता है
Saarthi Baidyanath
तकलीफ़ में है वो भी मुझे देख के तन्हा
मजबूरी उस की ये है कुछ कर नहीं सकती
Aryan Goswami
मिला है जो भी उस सेे और अच्छा मिल गया होता
मुझे उस वक़्त गर तेरा वसीला मिल गया होता

यही ग़लती रही झगड़े का कोई हल नहीं ढूँढ़ा
अगर हम ढूँढ़ते तो कोई रस्ता मिल गया होता
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Prashant Sitapuri
हाल ए दिल तो अब तक कहा ही नहीं
ये ग़लत है कि उस ने सुना ही नहीं
Vivek Vistar
हम सरीखे शाइरों का इश्क़ ठुकराए कोई
हुस्न पाया है तो अब यूँँ भी न इतराए कोई

क्लास से बाहर निकलता था घड़ी मैं देख कर
ठीक ऐसे वक़्त पर जब आके टकराए कोई
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Rituraj kumar
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वक़्त का ये हसीं सितम तो नहीं
ज़िन्दगी का ग़लत कदम तो नहीं

बीतता जा रहा जो तुम्हारे बिना
क्या पता आठवाँ जनम तो नहीं
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Rishabh Katariya
ये भी कैसी मजबूरी है
दोनों के बीच में दूरी है

तय है उस का नेता बनना
जिस के हाथ में छूरी है
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Kush Pandey ' Saarang '
तू अपनी बुराई पे यूँँ नाज़ मत कर
बुरा से बुरा वक़्त काटा है मैं ने
Prashant Sitapuri
वक़्त रहते तुझे बताना था
हम को तेरे क़रीब आना था
Govind kumar
गली हर इक मोहब्बत की अँधेरी हो नहीं सकती
सिवा मज़हब के मजबूरी तो तेरी हो नहीं सकती

किया था इश्क़ मैं ने जब तभी ये जानता था मैं
तू लड़की है 'अलीगढ़' की तू मेरी हो नहीं सकती
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Shashank Shekhar Pathak
उस की जो दी घड़ी पहनना छोड़ा हैं
वक़्त जैसे गुज़रना तो भुल ही गया
Amol
वक़्त सारा सर्कसों में जा रहा है
दिन हमारा दफ़्तरों में जा रहा है
Saarthi Baidyanath
कई मर्ज़ जो कभी लाइलाज लगते थे
सही वक़्त है उन का इलाज करने का
Saarthi Baidyanath
क्या कहूँ अपनी हालत पे दोस्त
शे'र तक मेरे मर जाते है
Shivam Shaw
बात कुछ भी ना हुई हम दोनो में और
वक़्त सारा यूँँहीं गुज़रा बैठे - बैठे
karan singh rajput
कुछ तो पढ़ने के लिए और कुछ पढ़ाने के लिए
इस तरह से वक़्त ने सारी किताबें बाँट दीं
Saarthi Baidyanath
ब-मुश्किल वक़्त तो कट जाएगा तेरे बा'द भी हमदम
ज़रा सोचो मगर इस ज़िन्दगी का हाल क्या होगा
Aman Kumar Shaw "Haif"
मुमकिन नहीं हर वक़्त मेहरबान रहे ज़िंदगी
कुछ लम्हें जीने का तजुर्बा भी सिखाते हैं
Arpit shukla
कहने को जब बात ज़रूरी होती है
उस दम दिल की नामंजूरी होती है

दिल की धरती बंजर है जाने कब से
जाने क्यूँँ बरसात अधूरी होती है

इक दूजे के आँसू पोंछ नहीं सकते
मजबूरी आख़िर मजबूरी होती है
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Saarthi Baidyanath
अपनी कहानी फिर कभी पूरी सही
मुझ सेे बिछड़ना तेरी मजबूरी सही
karan singh rajput
घर के लिए जो वक़्त बचा कर रखा था मैं
यूँँ मुफ़लिसी हुई कि उसे बेंचना पड़ा
Ashraf Ali
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और जब कुछ नहीं हुआ हम सेे
अपनी हालत ख़राब कर बैठे
Harun Umar
तुम्हारे तख़य्युल का ही वक़्त है
तुम्हारी ही यादों की ये चाय है
Kailash Singh Rathore " baaz
छोड़ के वीरान कर दे
लग गले हैरान कर दे

जोड़ ने में वक़्त ना ले
तोड़ के आसान कर दे
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Shreyansh Goyal
नैन खारे लिए हम को जीना पड़ा
दर्द सारे लिए हम को जीना पड़ा

वक़्त के साथ जीना कठिन था मगर
बस तुम्हारे लिए हम को जीना पड़ा
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Naimish trivedi
वक़्त के साथ गुज़ारा करना
दिल को तुम जीतके हारा करना
Tiwari Jitendra
गर हो मजबूरी जो लड़कों की तो, ठहरी बेवफ़ाई
कर दे लड़की बे-वफ़ाई गर जो, मजबूरी है भाई
A R Sahil "Aleeg"
हो के तुझ सेे जुदा ये हालत है
ख़ुद को ख़ुद में तलाश करता हूँ
Shajar Abbas
इस की तो आदत है , इक ज़ख़्म भरता नहीं, और
ये वक़्त, दर पर ले आता है, बारात ज़ख़्मों की
A R Sahil "Aleeg"
मोहब्बत ने सिखाया है
मोहब्बत वक़्त ज़ाया' है

मगर ये दिल न जाने क्यूँ
गुलाबें फिर ले आया है
Read Full
SIDDHARTH SHARMA
तुझे बदनाम करने की निय्यत रखता नहीं था मैं ,लेकिन
ये मजबूरी थी मेरी, बज्म में जो नाम बोला है तेरा
A R Sahil "Aleeg"
'वेदांत' उस को कॉल तुम करना नहीं
उस शख़्स का वक़्त-ए-पढ़ाई है अभी
Vedant Trivedi