Dushman Shayari
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Dushman Shayari

    मौत ही इंसान की दुश्मन नहीं
    ज़िंदगी भी जान ले कर जाएगी
    Arsh Malsiyani
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    कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी
    सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
    Allama Iqbal
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    मेरे दुश्मन मैं कोई आख़िरी काफ़िर नहीं हूँ
    तुम्हें तो गिनतियाँ भी ठीक से आती नहीं हैं
    Saarthi Baidyanath
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    उसी से दुश्मनी करने लगा था
    जिसे मैं घर में लाना चाहता था
    Tiwari Jitendra
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    जान ए जिगर भी हम सेे ऐसे बात करता है
    जैसे कोई दुश्मन से दो-दो हाथ करता है
    Manish Nauhwar
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    मैं तो था इक मामूली किरदार कहानी का
    राजा तो था कोई और मियाँ उस रानी का

    चाह रक़ीब यहाँ रखते हैं अब उस के लब की
    मैं तो केवल भूखा था उस की पेशानी का
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    Sandeep dabral 'sendy'
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    इश्क़ करने की मनाही है यहाँ पर
    दुश्मनी करते है सीना तान कर के
    Umesh Maurya
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    ख़्वाहिशों का जनाज़ा उठा रक्खा है
    तेरा ग़म अब भी दिल से लगा रक्खा है

    ख़ुद से भी ख़ुद को ठुकराया है प्यार में
    ख़ुद को भी ख़ुद का दुश्मन बना रक्खा है
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    Faiz Ahmad
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    मैं दुश्मनी को रोज़ भुलाता चला गया
    अपनी ख़ुशी को ख़ूब बढ़ाता चला गया
    Meem Alif Shaz
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    लुत्फ़ आता है बहुत सोच के मुझ को कि रक़ीब
    रंगत-ए-लब को तेरी पान समझते होंगे
    Ameer Imam
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    सुना रक़ीब तवज्जोह न अब उन्हें देते
    इसी लिए वो हमारे क़रीब आए हैं
    Sandeep dabral 'sendy'
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    मुझ सेे तू प्यार कर लड़ाई भी
    मैं तेरा दोस्त भी हूँ, भाई भी

    वो मेरा यार है कि दुश्मन है
    दर्द भी देता है दवाई भी
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    Upendra Bajpai
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    शराफ़त ने मुझ को कहीं का न छोड़ा
    रक़ीब अपने ख़त मुझ सेे लिखवा रहे हैं
    Rajesh Reddy
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    तुम्हारे ख़त में नया इक सलाम किस का था
    न था रक़ीब तो आख़िर वो नाम किस का था
    Dagh Dehlvi
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    याद आई जब मुझे 'फ़रहत' से छोटी थी बहन
    मेरे दुश्मन की बहन ने मुझ को राखी बाँध दी
    Ehsan Saqib
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    दुश्मनी कर मगर उसूल के साथ
    मुझ पर इतनी सी मेहरबानी हो

    मेरे में'यार का तक़ाज़ा है
    मेरा दुश्मन भी ख़ानदानी हो
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    Akhtar Shumar
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    इज़हार-ए-इश्क़ उस से न करना था 'शेफ़्ता'
    ये क्या किया कि दोस्त को दुश्मन बना दिया
    Mustafa Khan Shefta
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    दुश्मन-ए-जाँ ही सही साथ तो इक उम्र का है
    दिल से अब दर्द की रुख़्सत नहीं देखी जाती
    Akhtar Saeed Khan
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    जब तुझे रिश्ते निभाने का हुनर आ जाएगा
    तेरा दुश्मन ख़ुद ही चल कर तेरे घर आ जाएगा
    Meraj Faizabadi
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    दोस्तों का क्या है वो तो यूँँ भी मिल जाते हैं मुफ़्त
    रोज़ इक सच बोल कर दुश्मन कमाने चाहिएँ
    Rajesh Reddy
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