Dhokha Shayari - Broken trust, betrayal, and dard bhari feelings in words

Dhokha shayari reflects the pain of broken trust, betrayal, and emotional wounds left behind. Whether it’s love, friendship, or life, these lines capture the silent heartbreak and the feeling of being deceived. Perfect for expressing inner dard, sharing your story, or finding comfort in words.

dhokha shayari
वो झूठ बोल रहा था बड़े सलीक़े से
मैं ए'तिबार न करता तो और क्या करता
Waseem Barelvi
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bewafa shayari
झूट पर उस के भरोसा कर लिया
धूप इतनी थी कि साया कर लिया
Shariq Kaifi
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bewafai shayari
तिरे वादे पर जिए हम तो ये जान झूट जाना
कि ख़ुशी से मर न जाते अगर ए'तिबार होता
Mirza Ghalib
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fareb shayari
हर एक काम है धोका हर एक काम है खेल
कि ज़िंदगी में तमाशा बहुत ज़रूरी है
Khaleel Mamoon
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dhoka shayari
ज़िंदगी भर तो कोई झूठ जिया है मैं ने
तू जो आ जाए तो ये आख़िरी पल सच हो जाए
Meraj Faizabadi
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उसे भी धोका मिलेगा यक़ीन है मुझ को
भरोसा वो भी किसी पर तो कर रहा होगा
Aqib Jawed
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मैं पहले झूठ पर हकलाया उस सेे
फिर उस के बा'द माहिर हो गया था
Shadab Javed
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सँभलता हूँ तो ये लगता है जैसे
तुम्हारे साथ धोखा कर रहा हूँ
Shariq Kaifi
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धोखा है इक फ़रेब है मंज़िल का हर ख़याल
सच पूछिए तो सारा सफ़र वापसी का है
Rajesh Reddy
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मैं इस लिए भी तेरे फ़न की क़द्र करता हूँ
तू झूठ बोल के आँसू निकाल लेता है
Ahmad Kamal Parvazi
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मैं ने बोला था याद मत आना
झूठ बोला था याद आओ मुझे
Ali Zaryoun
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उस की टीस नहीं जाती है सारी उम्र
पहला धोखा पहला धोखा होता है
Shariq Kaifi
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ज़रा सा झूठ ही कह दो मेरे बिन तुम अधूरे हो
तुम्हारा क्या बिगड़ता है ज़रा सी बात कहने में
Parveen Shakir
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ख़्वाबों को आँखों से मिन्हा करती है
नींद हमेशा मुझ सेे धोखा करती है

उस लड़की से बस अब इतना रिश्ता है
मिल जाए तो बात वग़ैरा करती है
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Tehzeeb Hafi
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मैं सच कहूँगी मगर फिर भी हार जाऊँगी
वो झूट बोलेगा और ला-जवाब कर देगा
Parveen Shakir
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वो नशा है के ज़बाँ अक़्ल से करती है फ़रेब
तू मिरी बात के मफ़्हूम पे जाता है कहाँ
Pallav Mishra
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फ़रेब-ए-साक़ी-ए-महफ़िल न पूछिए 'मजरूह'
शराब एक है बदले हुए हैं पैमाने
Majrooh Sultanpuri
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झूट वाले कहीं से कहीं बढ़ गए
और मैं था कि सच बोलता रह गया
Waseem Barelvi
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अगर सच इतना ज़ालिम है तो हम से झूट ही बोलो
हमें आता है पतझड़ के दिनों गुल-बार हो जाना
Ada Jafarey
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दिल-ओ-नज़र को अभी तक वो दे रहे हैं फ़रेब
तसव्वुरात-ए-कुहन के क़दीम बुत-ख़ाने
Ali Sardar Jafri
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किस काम की ऐसी सच्चाई जो तोड़ दे उम्मीदें दिल की
थोड़ी सी तसल्ली हो तो गई माना कि वो बोल के झूट गया
Arzoo Lakhnavi
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सच घटे या बढ़े तो सच न रहे
झूट की कोई इंतिहा ही नहीं
Krishna Bihari Noor
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खुला है झूठ का बाज़ार आओ सच बोलें
न हो बला से ख़रीदार आओ सच बोलें
Qateel Shifai
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चाहे सोने के फ़्रेम में जड़ दो
आइना झूट बोलता ही नहीं
Krishna Bihari Noor
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ये सारा जिस्म झुक कर बोझ से दोहरा हुआ होगा
मैं सजदे में नहीं था आप को धोखा हुआ होगा
Dushyant Kumar
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वो आफ़ताब लाने का देकर हमें फ़रेब
हम सेे हमारी रात के जुगनू भी ले गया
Rajesh Reddy
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होंठ जो कहते है सब कुछ झूठ है
आँख सच कहती है उस की बात सुन
Siddharth Saaz
हम ने जिस मासूम परी को अपने दिल की जाँ बोला था
उस ने हम को धोखा देकर और किसी को हाँ बोला था

सारे वादे भूल गई तुम कोई बात नहीं जानेमन
लेकिन ये कैसे भूली तुम मेरी माँ को माँ बोला था
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Tanoj Dadhich
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बस एक लम्हे के सच झूट के एवज़ 'फ़रहत'
तमाम उम्र का इल्ज़ाम ले गया मुझ से
Farhat Abbas Shah
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यक़ीन उस ने दोबारा बना लिया लेकिन
वो मेरे ज़ेहन से धोखा नहीं निकाल सका
Vikram Gaur Vairagi
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जब राह झूठ की चुनी तो लिफ़्ट भी मिली
और सच की राह में मिले पैरों के बस निशाँ
Tanoj Dadhich
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ये कहते हो तिरे जाने से दिल को चैन आएगा
तो जाता हूँ, ख़ुदा हाफ़िज़! मगर तुम झूठ कहते हो
Zubair Ali Tabish
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आगे चल कर जिस सेे शादी करनी हो
पहले दिन से झूठ नहीं कहते उस सेे
Tanoj Dadhich
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मेरे ब'अद वफ़ा का धोका और किसी से मत करना
गाली देगी दुनिया तुझ को सर मेरा झुक जाएगा
Qateel Shifai
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मेहनत तो करता हूँ फिर भी घर ख़ाली है बाबूजी
मिट्टी के कुछ दीपक ले लो दीवाली है बाबूजी

मिट्टी बेच रहा हूँ जिस
में कोई जाल फ़रेब नहीं
सोना चाँदी दूध मिठाई सब जा'ली है बाबूजी
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Gyan Prakash Akul
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दुनिया ने तेरी याद से बेगाना कर दिया
तुझ से भी दिल-फ़रेब हैं ग़म रोज़गार के
Faiz Ahmad Faiz
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तुम इन लबों की हँसी और ख़ुशी पे मत जाना
ये रोज़ रोज़ हमें भी फ़रेब देते हैं
Shadab Asghar
किसी के झूठ से पर्दा हटाकर
हमारा सच बहुत रोया था उस दिन
Shadab Asghar
ऐसा बदला हूँ तिरे शहर का पानी पी कर
झूट बोलूँ तो नदामत नहीं होती मुझ को
Shahid Zaki
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वो बहुत चालाक है लेकिन अगर हिम्मत करें
पहला पहला झूट है उस को यक़ीं आ जाएगा
Zafar Iqbal
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तुम को हम ही झूठ लगेंगे लेकिन दरिया झूठा है
पहले हम को चाँद मिला था फिर दरिया को चाँद मिला
Abhishar Geeta Shukla
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ऐ मुझ को फ़रेब देने वाले
मैं तुझ पे यक़ीन कर चुका हूँ
Athar Nafees
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इश्क़ में धोखा खाने वाले बिल्कुल भी मायूस न हो
इस रस्ते में थोड़ा आगे मयख़ाना भी आता है
Darpan
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जैसे तुम ने वक़्त को हाथ में रोका हो
सच तो ये है तुम आँखों का धोख़ा हो
Tehzeeb Hafi
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तुम्हारी ख़ानदानी रस्म रस्म-ए-बेवफ़ाई है
हमीं पागल थे जो तुम पर भरोसा कर लिया हम ने
Shajar Abbas
हम भी तुम को धोखा दें ये ठीक नहीं
आँख के बदले आँख कहाँ तक जायज़ है
Gaurav Singh
मोहब्बत जब तलक होती नहीं है
मोहब्बत झूठ लगती है सभी को
Umesh Maurya
किसी उम्मीद का ये इस्तिआरा जान पड़ता है
कि तन्हा ही सही सच झूट से अब रोज़ लड़ता है
Tarun Pandey
नज़ारे झूठ लगते हैं किनारे झूठ लगते है
अभी तेरे बिना ये चाँद तारे झूठ लगते हैं
Umesh Maurya
तुम मिरे साथ हो ये सच तो नहीं है लेकिन
मैं अगर झूट न बोलूँ तो अकेला हो जाऊँ
Ahmad Kamal Parvazi
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फ़रेब दे के उसे जीतना गवारा नहीं
अगर वो दिल से हमारा नहीं हमारा नहीं
Azhar Nawaz
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वो आफ़ताब लाने का देकर हमें फ़रेब
हम सेे हमारी रात के जुगनू भी ले गया
Rajesh Reddy
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आज भी वो वो ही है और अदा भी वो ही है
बे-वफ़ा भी वो ही है और ख़फ़ा भी वो ही है
Aatish Indori
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कोई वा'दा न देंगे दान में क्या
झूट तक अब नहीं ज़बान में क्या
Tufail chaturvedi
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खुला फ़रेब-ए-मोहब्बत दिखाई देता है
अजब कमाल है उस बे-वफ़ा के लहजे में
Iftikhar Arif
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मैं भटकता ही रहा दश्त-ए-शनासाई में
कोई उतरा ही नहीं रूह की गहराई में

क्या मिलाया है बता जाम-ए-पज़ीराई में
ख़ूब नश्शा है तेरी हौसला-अफ़जाई में

तेरी यादों की सुई, प्रेम का धागा मेरा
काम आए हैं बहुत ज़ख़्मों की तुरपाई में

डस रही है ये सियह-रात की नागिन मुझ को
भर रही ज़हर-ए-ख़मोशी, रग-ए-तन्हाई में

सुर्मा-ए-मक्र-ओ-फ़रेब आँखों में जब से है लगा
तब से है ख़ूब इज़ाफ़ा हद-ए-बीनाई में

फ़िक्र-ओ-फ़न, रंग-ए-तग़ज़्ज़ुल, न ग़ज़ल की ख़ुशबू
बस लगा रहता हूँ मैं क़ाफ़िया-पैमाई में

सीख पानी से हुनर काम 'अनीस' आएगा
दौड़ कर ख़ुद ही चला आता है गहराई में
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Anis shah anis
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फ़रेब दे गया इस सादगी से वो मुझ को
कि जुर्म सारा ही मजबूरियों के सर आया
Harsh saxena
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ख़ैर सच तो है सच मगर ऐ झूठ
मैं ने तेरा भी ए'तिबार किया
Firaq Gorakhpuri
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तिरे वा'दों पे कहाँ तक मिरा दिल फ़रेब खाए
कोई ऐसा कर बहाना मिरी आस टूट जाए
Fana Nizami Kanpuri
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दोपहर तक बिक गया बाज़ार में इक-एक झूठ
शाम तक बैठे रहे हम अपनी सच्चाई लिए
Vijendra Singh Parwaaz
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कभी तुझ सेे मिलेंगे तो कहेंगे झूठ तुझ सेे हम
न तेरी फ़िक्र करते हैं न तुझ को याद करते हैं
Sapna Moolchandani
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झूट रौशन है कि सच्चाई नहीं जानते हैं
लोग अब वहम-ओ-गुमाँ को ही यक़ीं जानते हैं
Sultan Akhtar
मुद्दतों में आज दिल ने फ़ैसला आख़िर दिया
ख़ूब-सूरत ही सही लेकिन ये दुनिया झूट है
Akhtar Shumar
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ओहदे से निकलें किस तरह आशिक़
एक अदा उस की है हज़ार-फ़रेब
Meer Taqi Meer
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हर फ़रेब-ए-ग़म-ए-दुनिया से ख़बरदार तो है
तेरा दीवाना किसी काम में हुशियार तो है
Firaq Gorakhpuri
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नफ़रत धोका बुग़्ज़ तअ'स्सुब झूट दिखावा ख़ुद-ग़रज़ी
कैसे कैसे ज़हर भरे हैं इंसाँ की शिरयानों में
Hina Rizvi
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आदमी जान के खाता है मोहब्बत में फ़रेब
ख़ुद-फ़रेबी ही मोहब्बत का सिला हो जैसे
Iqbal Azeem
ये समझ के माना है सच तुम्हारी बातों को
इतने ख़ूब-सूरत लब झूट कैसे बोलेंगे
Shahzad Ahmad
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धोका है इक फ़रेब है मंज़िल का हर ख़याल
सच पूछिए तो सारा सफ़र वापसी का है
Rajesh Reddy
याद कर के जब भी मुझ को सोचना तुम
मेरी आँख की बारिश को ख़ुद ही पोंछना तुम

मैं सवाल-ए-हक़ करूँँगा लाज़िमी है
मैं ग़लत हूँ झूठ कह कर रोकना तुम
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Amit Joshi anhad
हर बार ये कहता हूँ मैं उस को भुला दूँगा
हर बार मगर मैं उस सेे झूठ ही कहता हूँ
Prashant Sitapuri
उस के सिर पे हाथ रखा है
झूठ नहीं बोलेंगे हम अब
Pawan
सभी क़स
में सभी वादे सभी कुछ झूठ था जानाँ
वहाँ पे तुम भी ज़िंदा हो यहाँ पे मैं भी ज़िंदा हूँ
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Dipendra Singh 'Raaz'
झूठ मक्कारी फ़रेबी और जाने क्या से क्या
आज  कल  इंसान में बाकी  यही  दस्तूर  है

भूल कर अपनी हदें ख़ुद को समझते हैं ख़ुदा
आदमी  को  आदमी   रहना  कहाँ  मंज़ूर  है
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Aditya
उस की लुगत में सब्र का मतलब क्या होगा
मेरी लुगत में सब्र का मतलब धोखा है
Shivam chaubey
उस की ख़ुशी में, है ख़ुशी मेरी
बस इसी झूठ का सहारा है
Aryan Goswami
तेरे ख़्वाबों ने मुझे चैन से सोने न दिया
दूर नींदों से कहीं रात गुजारी मैं ने

लौट कर आए जो घर शाम थके हारे तब
झूट की इक हँसी चेहरे से उतारी मैं ने
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Aditya
उस की बातों पर मुस्काता हूँ
पहले भी ऐसे झूठ सुने हैं
Pawan
झूठ है सब, ज़हीन धोका है
इस नज़र का यक़ीन धोका है

टूट जाएगा दिल तो समझोगे
ये मुहब्बत हसीन धोका है
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Sandeep Thakur
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देर से ही आ गया हम को दुनिया का चलन
झूठ भी कहते नहीं और सदाकत छोड़ दी
Ali Mohammed Shaikh
इश्क़ में कितना ग़म मिलता है
तुम समझे थे कम मिलता है

इश्क़ का रस्ता है ही ऐसा
धोखा कदम कदम मिलता है
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Vikash sharma
आज पहली दफ़ा लगा मुझ को
वो ज़रा बे-वफ़ा लगा मुझ को

बस बिना बात ही बिगड़ता था
बेवजह ही ख़फ़ा लगा मुझ को
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Sandeep Thakur
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हम अपना सच बताने से गुरेज़ां हैं यहाँ और
वो अपना झूट दुनिया को बताये फिर रहा है
Saarthi Baidyanath
जिस-जिस ने पूछा हाल मिरा
तिस-तिस से मैं ने झूठ कहा
Satpreet Singh
लोग कहते हैं सच अपाहिज है
झूठ जैसा वो दौड़ता ही नहीं
Saarthi Baidyanath
दिलासे पे कहाँ तक जी सकोगे
दिलासा झूठ का इक रूप है बस
Kush Pandey ' Saarang '
झूठ थोड़ा, बेईमानी! फन सभी बारीक हैं
सच सभी हम जानते हैं! आप जो हैं ठीक है
Dileep kumar mishra
परेशाँ हो के उस के दर पे जब इंसान जाता था
ख़ुदा तब और था शायद जो सबकी मान जाता था

तू पहला शख़्स है जिस सेे कि धोखा खा गया वरना
मैं चेहरा देख कर इंसान को पहचान जाता था
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Rituraj kumar
कंगन दिए काजल दिए फिर और दे झुमका दिया
आँसू दिए सद
में दिए फिर दे हमें धोखा दिया
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Rudransh Trigunayat
रोता हूँ तो भी ये हँसता ही दिखाता है कि देखो
झूठ कितना बोलता है हम सेे आईना हमारा
karan singh rajput
था सब मेरे उन झूठ में "तुम सेे मोहब्बत" आख़िरी
पर उस सेे मिलने पर मेरा पहला रहा सच भी यही
Zain Aalamgir
इश्क़ में झूठ अगर न बोलो तो
लगता है दाल में नमक कम है
Ramnath Shodharthi
झूठे लोग तो हर भाषा में झूठ ही बोलेंगे
चाहे हिन्दी उर्दू हो या फिर अँग्रेज़ी हो
Saarthi Baidyanath
दुश्मनों को भी हम धोखा नहीं देने वाले
अगर करेंगे क़त्ल तो भी बता कर करेंगे
Praveen Bhardwaj
है आदमी उलझा हुआ
कुछ सच सही कुछ झूठ भी
Meem Alif Shaz
यहाँ तो आदमी तन्हा नहीं लेकिन
उसी के झूठ ने तन्हा किया उस को
Meem Alif Shaz
जिन लोगों पर मैं विश्वास जताता हूँ
उन लोगों से ही धोखा खा जाता हूँ

मैं ने लोगों के चेहरे पढ़ रक्खे हैं
फिर भी उन की बातों में आ जाता हूँ
Read Full
Aman G Mishra
हमारे क़त्ल की साजिश में अकरबा थे सभी
था कौन-कौन ये शामिल बयान कैसे करूँँ

फ़रेब-ओ-रंज तेरे बे-वफ़ाई और सितम
ये पूछता है मेरा दिल बयान कैसे करूँँ
Read Full
Shajar Abbas
अगर मौका मिला तो एक दिन अख़बार देखेंगे
सियाही में है कितनी झूठ की मिक़दार, देखेंगे
Prashant Sitapuri
ये हक़ीक़त है मेरी जान नहीं ला सकता
मैं तेरे झूठ पर ईमान नहीं ला सकता

लोग पूछेंगे सबब चाक गिरेबानी का
बज़्म में चाक गिरेबान नहीं ला सकता
Read Full
Shajar Abbas
इश्क़ इकलौती वो मज़हब है जिस के उम्मती यहाँ
बे-वफ़ा की भी इबादत करते है ता-दम-ए-पसीं
A R Sahil "Aleeg"
उस ने मुझ को फ़ोन किया था जब इक दिन
मैं ने माँ से झूठ कहा था पहली बार
Sanskar Shrivastav
कोई किसी से झूठ नहीं बोलता
सब चाहते हैं काम हो जाए मेरा
Sayeed Khan
मैं अपने एक दोस्त को ये कहते थक गया
ऐ दोस्त हिज्र ठीक है धोखा सही नहीं
Prashant Sitapuri
ये दुनिया बे-वफ़ा है
अकेले सीख जीना
A R Sahil "Aleeg"
झूठ कह दे ख़्वाब में तू आएगी
इस बहाने नींद तो आ जाएगी
Prince Jhankra
मरीज़-ए- इश्क़ से उस का हाल मत पूछा करो तुम
तबस्सुम लब-कुशा लहजा, झूठ होगा ठीक ही हूँ
A R Sahil "Aleeg"
तकलीफ़ होती है और दर्द भी दिल में
ये झूठ है ,मर्द रोता नहीं दोस्त
A R Sahil "Aleeg"