Gussa Shayari - Express your anger and hidden frustration through powerful poetic lines.

Anger is often a mask for deep hurt. Our collection of Gussa Shayari captures those intense moments of frustration and resentment that words alone cannot explain.

gussa shayari
मैं आ रहा हूँ अभी चूम कर बदन उस का
सुना था आग पे बोसा रक़म नहीं होता
Shanawar Ishaq
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krodh shayari
वो आग बुझी तो हमें मौसम ने झिंझोड़ा
वर्ना यही लगता था कि सर्दी नहीं आई
Khurram Afaq
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narazgi shayari
इक बर्फ़ सी जमी रहे दीवार-ओ-बाम पर
इक आग मेरे कमरे के अंदर लगी रहे
Salim Saleem
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khafa shayari
बैठे बैठे फेंक दिया है आतिश-दान में क्या क्या कुछ
मौसम इतना सर्द नहीं था जितनी आग जला ली है
Zulfiqar aadil
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ये आग वाग का दरिया तो खेल था हम को
जो सच कहें तो बड़ा इम्तिहान आँसू हैं
Abhishek shukla
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ये सच है नफ़रतों की आग ने सब कुछ जला डाला
मगर उम्मीद की ठण्डी हवाएँ रोज़ आती हैं
Munawwar Rana
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पराई आग पे रोटी नहीं बनाऊँगा
मैं भीग जाऊँगा छतरी नहीं बनाऊँगा
Tehzeeb Hafi
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चुप-चाप अपनी आग में जलते रहो 'फ़राज़'
दुनिया तो अर्ज़-ए-हाल से बे-आबरू करे
Ahmad Faraz
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ये इश्क़ नहीं आसाँ इतना ही समझ लीजे
इक आग का दरिया है और डूब के जाना है
Jigar Moradabadi
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गुदाज़-ए-इश्क़ नहीं कम जो मैं जवाँ न रहा
वही है आग मगर आग में धुआँ न रहा
Jigar Moradabadi
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आग थे इब्तिदा-ए-इश्क़ में हम
अब जो हैं ख़ाक इंतिहा है ये
Meer Taqi Meer
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शब की हवा से हार गई मेरे दिल की आग
यख़-बस्ता शहर में कोई रद्द-ओ-बदल न था
Qaisar-ul-Jafri
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क्या हो गया इसे कि तुझे देखती नहीं
जी चाहता है आग लगा दूँ नज़र को मैं
Ismail Merathi
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वो बुझ गया तो चला उस की अहमियत का पता
कि उस की आग से कितने चराग़ जलते थे
Shakeel Azmi
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क्या बैठ जाएँ आन के नज़दीक आप के
बस रात काटनी है हमें आग ताप के

कहिए तो आप को भी पहन कर मैं देख लूँ
मा'शूक़ यूँँ तो हैं ही नहीं मेरी नाप के
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Farhat Ehsaas
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आँसू पोंछ के हँस देता है
आग में आग लगाने वाला
Arzoo Lakhnavi
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आग अपने ही लगा सकते हैं
ग़ैर तो सिर्फ़ हवा देते हैं
Mohammad Alvi
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जो यहाँ ख़ुद ही लगा रक्खी है चारों जानिब
एक दिन हम ने इसी आग में जल जाना है
Zafar Iqbal
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पेड़ का दुख तो कोई पूछने वाला ही न था
अपनी ही आग में जलता हुआ साया देखा
Jameel Malik
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समझ के आग लगाना हमारे घर में तुम
हमारे घर के बराबर तुम्हारा भी घर है
Hafeez Banarasi
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आग का क्या है पल दो पल में लगती है
बुझते बुझते एक ज़माना लगता है
Kaif Bhopali
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कितनी उजलत में मिटा डाला गया
आग में सब कुछ जला डाला गया
Manish Shukla
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समझ के आग लगाना हमारे घर में तुम
हमारे घर के बराबर तुम्हारा भी घर है
Hafeez Banarasi
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उस से कहना की धुआँ देखने लाएक़ होगा
आग पहने हुए मैं जाऊँगा पानी की तरफ़
Abhishek shukla
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ये मज़ा था दिल-लगी का कि बराबर आग लगती
न तुझे क़रार होता न मुझे क़रार होता
Dagh Dehlvi
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आप दस्ताने पहनकर छू रहे हैं आग को
आप के भी ख़ून का रंग हो गया है साँवला
Dushyant Kumar
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हो न हो एक ही तस्वीर के दो पहलू हैं
रक़्स करता हुआ तू आग में जलता हुआ मैं
Shahid Zaki
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उस के दिल की आग ठंडी पड़ गई
मुझ को शोहरत मिल गई इल्ज़ाम से
Siraj Faisal Khan
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उन के लहजे में आग है साहब
ये तो हम हैं जो भीग जाते हैं
Atul K Rai
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मैं ने हाथों से बुझाई है दहकती हुई आग
अपने बच्चे के खिलौने को बचाने के लिए
Shakeel Jamali
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मेरे रश्क-ए-क़मर तू ने पहली नज़र जब नज़र से मिलाई मज़ा आ गया
बर्क़ सी गिर गई काम ही कर गई आग ऐसी लगाई मज़ा आ गया
Fana Bulandshahri
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तारीकियों को आग लगे और दिया जले
ये रात बैन करती रहे और दिया जले

उस की ज़बाँ में इतना असर है कि निस्फ़ शब
वो रौशनी की बात करे और दिया जले
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Tehzeeb Hafi
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यूँँ ही हमेशा उलझती रही है ज़ुल्म से ख़ल्क़
न उन की रस्म नई है, न अपनी रीत नई

यूँँ ही हमेशा खिलाए हैं हम ने आग में फूल
न उन की हार नई है, न अपनी जीत नई
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Faiz Ahmad Faiz
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ये इश्क़ आग है और वो बदन शरारा है
ये सर्द बर्फ़ सा लड़का पिघलने वाला है
Shadab Asghar
मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही
हो कहीं भी आग लेकिन आग जलनी चाहिए
Dushyant Kumar
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मैं आ रहा हूँ अभी चूम कर बदन उस का
सुना था आग पे बोसा रक़म नहीं होता
Shanawar Ishaq
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कभी इश्क़ करो और फिर देखो इस आग में जलते रहने से
कभी दिल पर आँच नहीं आती कभी रंग ख़राब नहीं होता
Saleem Kausar
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आग उगलती रातों में इक शीतलता सी छायी थी
गर्मी की छुट्टी में फिर वो मामा के घर आई थी
Shubham Seth
जो रहे थे खफ़ा-खफ़ा हम सेे
कह गए हम को बे-वफ़ा हम सेे

राह तकते रहे थे फिर भी वो
नईं मिले आख़िरी दफ़ा हम सेे
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Shivam Mishra
जो ग़ुस्सा आ गया तो क्या ही कर लेंगे
ज़बाँ ये मेरी गाली भी नहीं देती
Irshad Siddique "Shibu"
दिल की ख़ातिर एक रिश्ते को बचाने के लिए
आग मैं ने ही लगा ली ख़ुद मिरे घरबार में
Shashank Shekhar Pathak
पुराने ख़तों को जला देने से गर
मुहब्बत जले आग मैं भी लगाऊँ
Bhoomi Srivastava
वो तो सारी आग है चाहे जहाँ से चूम लो,
हाँ मगर माथे पे बोसे का मज़ा कुछ और है
Alankrat Srivastava
क्या हुआ जो मुझे हम-उम्र मोहब्बत न मिली
मेरी ख़्वाहिश भी यही थी कि बड़ी आग लगे
Muzdum Khan
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मैं क्या करूँँ मेरी बेगम सुहाग ढूँढ़े है
मेरे बुझे हुए चूल्हे में आग ढूँढ़े है

वो दिन गए कि उड़ाते थे फ़ाख़्ताएँ हम
सपेरा चूहे के इक बिल में नाग ढूँढ़े है
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Paplu Lucknawi
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आज भी वो वो ही है और अदा भी वो ही है
बे-वफ़ा भी वो ही है और ख़फ़ा भी वो ही है
Aatish Indori
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अपने बदन की तुम भी हिफ़ाज़त न कर सके
हम ने भी ख़ूब ग़ैर के चूल्हे से आग ली
Harsh saxena
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लगा आग पानी को दौड़े है तू
ये गर्मी तेरी इस शरारत के बा'द
Meer Taqi Meer
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ज़माना चाहे जो आज कर ले नहीं रुकेंगे क़दम हमारे
जिस आग से आफ़ताब रौशन वो आग दिल में धधक रही है
Amaan Pathan
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मैं जो आग दिल में लिए जी रहा था
वो आग आज इन आँसुओं से बुझी है
Amaan Pathan
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इक ख़्वाब ने आँखें खोली हैं क्या मोड़ आया है कहानी में
वो भीग रही है बारिश में और आग लगी है पानी में
Gulzar
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जो दिया सच की आग से रौशन
वो तो दरिया से भी बुझा ही नहीं
Amaan Pathan
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अब उसी आग में जलते हैं जिसे
अपने दामन से हवा दी हम ने
Ghulam Mohammad Qasir
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आग तेरी है न मेरी आग को मत दे हवा
राख मेरा घर हुआ तो तेरा घर देखेगा कौन
Zafar Gorakhpuri
बाग़बाँ ने आग दी जब आशियाने को मिरे
जिन पे तकिया था वही पत्ते हवा देने लगे
Saqib lakhanavi
न पूछ हाल मिरा चोब-ए-ख़ुश्क-ए-सहरा हूँ
लगा के आग मुझे कारवाँ रवाना हुआ
Haidar Ali Aatish
आग अपने ही लगा सकते हैं
ग़ैर तो सिर्फ़ हवा देते हैं
Mohammad Alvi
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जब ख़ुश हुए तो बातों ही बातों में रो पड़े
और ग़म की आग में जले हँसते हँसाते हम
Haresh Vanza
खफा हम किसी से नहीं बस जरा वक़्त की कमी है
आसमान में उड़ने का ख़्वाब है और पैरों तले ज़मीं है
Shashank Tripathi
मुझ
में जो गुम है कहीं वो हिस्सा नहीं देखा मेरा
तुम ने प्यार देखा है अभी ग़ुस्सा नहीं देखा मेरा
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karan singh rajput
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मेरे रहते छू न दे कमबख्त कोई हवा
ये आग मेरे बा'द भी जलती रहे
Praveen Bhardwaj
मिल चुके हैं ख़ाक में
और वो बेख़बर है कब से

अब निकल चुकी है ’जान’
और ’जान’ खफा है कब से
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Animesh Choubey
इश्क़ का मो'जिज़ा बताऊँ मैं
आग बारिश की तरह लगती है
Saarthi Baidyanath
एक दफ़ा सबने रोक लिया था मुझ को वर्ना तो
मेरे हाँथो से दुनिया को आग लगाई जाती
Prashant Sitapuri
ठीक हैं ख़फ़ा होना जुदा होना ठीक नहीं है
इश्क़ होना ठीक हैं ख़ुदा होना ठीक नहीं है
Praveen Bhardwaj
उम्र भर मुझ को रखा धूप में जिस रस्ते ने
याद क्यूँ उस का सफ़र और वो छाले रक्खूँ

ख़त जो लिख कर के रखा पर न तुम्हें दे पाया
अब उसे आग लगा दूँ या सँभाले रक्खूँ
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Aditya
दिल नहीं लग रहा है मेरा कही
तुम अभी भी ख़फ़ा हो क्या मुझ सेे
Ved prakash Pandey
कभी कभी तो जी करता है आग लगा दूँ दुनिया को
कभी कभी दुनिया को जलते देख के रोने लगता हूँ
Gaurav Singh
बेवजह मुझ सेे फिर ख़फ़ा क्यूँ है
ये कहानी ही हर दफ़ा क्यूँ है

कुछ भी मजबूरी तो नहीं दिखती
मैं क्या जानूं वो बे-वफ़ा क्यूँ है
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Sandeep Thakur
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क्या विवशता थी वो सोचो क्या समय आया था वो भी
राम जी सीता से बोले आग पर चलना पड़ेगा
Gaurav Singh
आप हैं आग सिफ़त लफ़्ज़ मेरे मोम सिफ़त
मोम से आग का पुतला मैं बनाऊं कैसे
Ramnath Shodharthi
हर तरफ़ आग है और आग लगाने वाले
लगता है बुझ गए लोग आग बुझाने वाले
Ramnath Shodharthi
बा'द में जांच भी कर लीजिएगा पानी की
पहले जो आग लगी है वो बुझाई जाए
Ramnath Shodharthi
झूठे नक़ली मुद्दों पर आ मिट्टी डालें
घर-घर में आज आग लगी है पानी डालें
Saarthi Baidyanath
डगर मुश्किल मगर है हौसले पुरज़ोर सीने में
रगों में रक्त है उबला मचा है शोर सीने में

सफ़र में मुश्किलें क्या ख़ाक रोकेगी मेरा रस्ता
नज़र में मंज़िलें और आग है घनघोर सीने में
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Ravi 'VEER'
झूठा है सच्चा भी तो हो सकता है
चश्मा है गन्दा भी तो हो सकता है

बारिश केवल बादल की मज़बूरी है?
बादल का ग़ुस्सा भी तो हो सकता है
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Atul K Rai
शाम होते ही घर जाना पड़ता है
एक दिन सब को मर जाना पड़ता है

ख़्वाब में वो मुझ पर ग़ुस्सा करती है
सो हमें सच में डर जाना पड़ता है
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Rudransh Trigunayat
आग इतनी भड़क गई कैसे
गाँव तक ये सड़क गई कैसे
Aashish kargeti 'Kash'
तुम पहली लड़की हो जिसे मुझ पे
ग़ुस्सा करना अच्छा लगता है
Saahir
अंदर थी मेरे आग ही बस आग पहले कभी
जिस को बुझाने में, मैं सिगरेट का धुआँ बन गया
BR SUDHAKAR
दिल की धड़कन को मुझ को सुना दीजिए
आग चाहत की दिल में लगा दीजिए

जाम आँखों में रखने से क्या फ़ाइदा
आप नज़रों से मुझ को पिला दीजिए
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Puneet Mishra Akshat
कोई भी काम ऐसा क्यूँँ करें हम
भला ग़ैरों पे ग़ुस्सा क्यूँँ करें हम
Abhishek Bhadauria 'Abhi'
सीने में जो दबी आग है ना उसे
मैं बढ़ाता रहा आँख के पानी से
Saahir
मेरा ग़ुस्सा शांत अब तक ना हुआ
और उस को फ़िक्र है सामान की
Sayeed Khan
ये तो तय समझो कि उसे छू लेने के बा'द
मेरे लुग़त में आग का मतलब पानी होगा
Intzar Akhtar
काम ही आग लगाना हो यहाँ पर जिन का
कैसे समझेंगे भला आग बुझाने का दुख
Naveen "Bashaarat"
ज़माना भी कितनी जफ़ा कर रहा है
लगी आग दिल में हवा कर रहा है

थे वादे भी टूटे ज़माने की ख़ातिर
ज़माना ही हम को जुदा कर रहा है
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Vinamrachayan
साँप और नेवले की कहानी हुई ज़िन्दगी अब मेरी
रब ख़फ़ा, सब ख़फ़ा, मर भी सकता नहीं जी भी पाता नहीं
A R Sahil "Aleeg"
बशर्ते आग लग जाए मेरे ख़ाली मकाँ में फिर
उजाला गर न हो यादों का तेरी इस मकाँ में तो
Dipendra Singh 'Raaz'
नए इस साल में क्या ही नया है
तिरा ग़ुस्सा वही नख़रे वही हैं
Sarvjeet Singh
रहा है इस साल भी रब ख़फ़ा मुझ सेे, मैं भी रब से
न बदला अपनी दुआ मैं, न रब ने अपना इरादा
A R Sahil "Aleeg"
तू ख़फ़ा है और मेरा आजकल
दोस्तों से राब्ता होता नहीं
Dileep Kumar
किसी ने रख दिया हो आग पर जलता हुआ मुझ को
मचलता है मेरा दिल इस तरह कुछ चाय के ख़ातिर
Aves Sayyad
ग़ुस्सा भी माँ का प्यार से तो कम नहीं
मैं मर-मिटूँगा इतनी प्यारी चीख पर
Sabir Hussain
आग लग जाएगी पानी में लगा कर देख लो
आज़माना है अगर तो आज़मा कर देख लो

है नहीं मुमकिन मुकर जाऊँ कभी वादे से मैं
ज़हर भी चाहो अगर तो तुम पिला कर देख लो
Read Full
Shashank Shekhar Pathak
हमें अब याद आते हैं हमारी आँख के आँसू
बदन में आग लगती है यहाँ बरसात जलते हैं
Raunak Karn