Insaan Shayari
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Insaan Shayari

    शरीफ़ इंसान आख़िर क्यूँ इलेक्शन हार जाता है
    किताबों में तो ये लिक्खा था रावन हार जाता है
    Munawwar Rana
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    मैं तुझे खो के भी ज़िंदा हूँ ये देखा तू ने
    किस क़दर हौसला हारे हुए इंसान में है
    Abbas Tabish
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    हर आदमी में होते हैं दस बीस आदमी
    जिस को भी देखना हो कई बार देखना
    Nida Fazli
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    भूक से या वबास मरना है
    फ़ैसला आदमी को करना है
    Ishrat Afreen
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    देखें क़रीब से भी तो अच्छा दिखाई दे
    इक आदमी तो शहर में ऐसा दिखाई दे
    Zafar Gorakhpuri
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    बस्ती में अपनी हिन्दू मुसलमाँ जो बस गए
    इंसाँ की शक्ल देखने को हम तरस गए
    Kaifi Azmi
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    अब जो पत्थर है आदमी था कभी
    इस को कहते हैं इंतिज़ार मियाँ
    Afzal Khan
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    न जाने बाहर भी कितने आसेब मुंतज़िर हों
    अभी मैं अंदर के आदमी से डरा हुआ हूँ
    Aanis Moin
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    वो आदमी नहीं है मुकम्मल बयान है
    माथे पे उस के चोट का गहरा निशान है

    वो कर रहे हैं इश्क़ पे संजीदा गुफ़्तुगू
    मैं क्या बताऊँ मेरा कहीं और ध्यान है
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    Dushyant Kumar
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    जिस ने इस दौर के इंसान किए हैं पैदा
    वही मेरा भी ख़ुदा हो मुझे मंज़ूर नहीं
    Hafeez Jalandhari
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    जो मेरे साथ मोहब्बत में हुई आदमी एक दफा सोचेगा
    रात इस डर में गुजारी हम ने कोई देखेगा तो क्या सोचेगा
    Tehzeeb Hafi
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    इत्तिफ़ाक़ अपनी जगह ख़ुश-क़िस्मती अपनी जगह
    ख़ुद बनाता है जहाँ में आदमी अपनी जगह
    Anwar Shaoor
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    जान ले लो जान तुम मेरी यक़ीनन
    जान लेना तो मिरी फितरत नहीं है
    Shashank Shekhar Pathak
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    मन के हारे हुए इंसान को हुस्न-ए-शय से
    कोई मतलब नहीं कोई भी सरोकार नहीं
    Shekhar Mandal
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    शबो रोज़ की चाकरी ज़िन्दगी की
    मुयस्सर हुईं रोटियाँ दो घड़ी की

    नहीं काम आएँ जो इक दिन मशीनें
    ज़रूरत बने आदमी आदमी की

    कि कल शाम फ़ुरसत में आई उदासी
    बता दी मुझे क़ीमतें हर ख़ुशी की

    किया क्या अमन जी ने बाइस बरस में
    कभी जी लिया तो कभी ख़ुद-कुशी की

    ग़मों को ठिकाने लगाते लगाते
    घड़ी आ गई आदमी के ग़मी की

    ये सारी तपस्या का कारण यही है
    मिसालें बनें तो बनें सादगी की
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    Aman G Mishra
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    इंसान अपने आप में मजबूर है बहुत
    कोई नहीं है बे-वफ़ा अफ़्सोस मत करो
    Bashir Badr
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    उस को जो कुछ भी कहूँ अच्छा बुरा कुछ न करे
    यार मेरा है मगर काम मेरा कुछ न करे

    दूसरी बार भी पड़ जाए अगर कुछ करना
    आदमी पहली मोहब्बत के सिवा कुछ न करे
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    Abid Malik
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    बात ये है कि आदमी शाइ'र
    या तो होता है या नहीं होता
    Mahboob Khizan
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    बेचता यूँँ ही नहीं है आदमी ईमान को
    भूख ले जाती है ऐसे मोड़ पर इंसान को

    शबनमी होंठों की गर्मी दे न पाएगी सुकून
    पेट के भूगोल में उलझे हुए इंसान को
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    Adam Gondvi
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    यही है इबादत यही दीन-ओ-ईमाँ
    कि काम आए दुनिया में इंसाँ के इंसाँ
    Altaf Hussain Hali
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