Sach Shayari - Dil se nikli sachchai aur haqeeqat ki gehri lines

Sach shayari reflects raw truth and unfiltered emotions that often remain hidden behind words. It brings forward haqeeqat, whether it is about love, life, or relationships. These lines connect deeply with readers who value honesty and real feelings over illusions.

sach shayari
माँ बाप और उस्ताद सब हैं ख़ुदा की रहमत
है रोक-टोक उन की हक़ में तुम्हारे नेमत
Altaf Hussain Hali
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sachai shayari
अज़ीज़-तर मुझे रखता है वो रग-ए-जाँ से
ये बात सच है मेरा बाप कम नहीं माँ से
Tahir Shaheer
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haq shayari
तू कहानी ही के पर्दे में भली लगती है
ज़िन्दगी तेरी हक़ीक़त नहीं देखी जाती
Akhtar Saeed Khan
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haqeeqat shayari
ज़िंदगी भर तो कोई झूठ जिया है मैं ने
तू जो आ जाए तो ये आख़िरी पल सच हो जाए
Meraj Faizabadi
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sachcha shayari
जाने कब चुभ जाए आँखों में कोई बे-रहम सच
आइना भी देखने वालो सँभल कर देखना
Meraj Faizabadi
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ये आग वाग का दरिया तो खेल था हम को
जो सच कहें तो बड़ा इम्तिहान आँसू हैं
Abhishek shukla
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हिम्मत से सच कहो तो बुरा मानते हैं लोग
रो-रो के बात कहने की आदत नहीं रही
Dushyant Kumar
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धोखा है इक फ़रेब है मंज़िल का हर ख़याल
सच पूछिए तो सारा सफ़र वापसी का है
Rajesh Reddy
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ये सच है नफ़रतों की आग ने सब कुछ जला डाला
मगर उम्मीद की ठण्डी हवाएँ रोज़ आती हैं
Munawwar Rana
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रातें किसी याद में कटती हैं और दिन दफ़्तर खा जाता है
दिल जीने पर माएल होता है तो मौत का डर खा जाता है

सच पूछो तो 'तहज़ीब हाफ़ी' मैं ऐसे दोस्त से आज़िज़ हूँ
मिलता है तो बात नहीं करता और फोन पे सर खा जाता है
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Tehzeeb Hafi
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चले जाओ भी अब जी लेंगे पर
सच कहो मजबूरी है क्या

मुझे ये कहानी कुछ और लिखनी थी
तुम्हारे हिसाब से पूरी है क्या
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Zubair Ali Tabish
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सदाक़त हो तो दिल सीनों से खिंचने लगते हैं वाइज़
हक़ीक़त ख़ुद को मनवा लेती है मानी नहीं जाती
Jigar Moradabadi
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कैसे कह दूँ कि मुझे छोड़ दिया है उस ने
बात तो सच है मगर बात है रुस्वाई की
Parveen Shakir
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मैं सच कहूँगी मगर फिर भी हार जाऊँगी
वो झूट बोलेगा और ला-जवाब कर देगा
Parveen Shakir
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हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन
दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है
Mirza Ghalib
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इतना सच बोल कि होंटों का तबस्सुम न बुझे
रौशनी ख़त्म न कर आगे अँधेरा होगा
Nida Fazli
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सच बोलने के तौर-तरीक़े नहीं रहे
पत्थर बहुत हैं शहर में शीशे नहीं रहे
Nawaz Deobandi
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झूट वाले कहीं से कहीं बढ़ गए
और मैं था कि सच बोलता रह गया
Waseem Barelvi
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अगर सच इतना ज़ालिम है तो हम से झूट ही बोलो
हमें आता है पतझड़ के दिनों गुल-बार हो जाना
Ada Jafarey
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ये सच है कि पाँवों ने बहुत कष्ट उठाए
पर पाँव किसी तरह राहों पे तो आए
Dushyant Kumar
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निगाह-ए-गर्म क्रिसमस में भी रही हम पर
हमारे हक़ में दिसम्बर भी माह-ए-जून हुआ
Akbar Allahabadi
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मैं ख़ुद भी यार तुझे भूलने के हक़ में हूँ
मगर जो बीच में कम-बख़्त शा'इरी है ना
Afzal Khan
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सच घटे या बढ़े तो सच न रहे
झूट की कोई इंतिहा ही नहीं
Krishna Bihari Noor
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खुला है झूठ का बाज़ार आओ सच बोलें
न हो बला से ख़रीदार आओ सच बोलें
Qateel Shifai
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा

हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में
अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
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Santosh S Singh
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हर हक़ीक़त है एक हुस्न 'हफ़ीज़'
और हर हुस्न इक हक़ीक़त है
Hafeez Banarasi
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झूठों ने झूठों से कहा है सच बोलो
सरकारी एलान हुआ है सच बोलो

घर के अंदर तो झूठों की एक मंडी है
दरवाज़े पर लिखा हुआ है सच बोलो
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Rahat Indori
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सच तो ये है 'मजाज़' की दुनिया
हुस्न और इश्क़ के सिवा क्या है
Asrar Ul Haq Majaz
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किसी बे-वफ़ा से बिछड़ के तू मुझे मिल गया भी तो क्या हुआ
मेरे हक़ में वो भी बुरा हुआ मेरे हक़ में ये भी बुरा हुआ
Mumtaz Naseem
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होंठ जो कहते है सब कुछ झूठ है
आँख सच कहती है उस की बात सुन
Siddharth Saaz
जो ज़रा ठीक से किरदार निगारी हो जाए
ये कहानी तो हक़ीक़त पे भी तारी हो जाए

तेरे हामी है सो उठ कर भी नहीं जा सकते
जाने किस वक़्त यहाँ राय-शुमारी हो जाए
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Khurram Afaq
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क़ुबूल है जिन्हें ग़म भी तेरी ख़ुशी के लिए
वो जी रहे हैं हक़ीक़त में ज़िन्दगी के लिए
Nasir Kazmi
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ये नहीं है कि वो एहसान बहुत करता है
अपने एहसान का एलान बहुत करता है

आप इस बात को सच ही न समझ लीजिएगा
वो मेरी जान मेरी जान बहुत करता है
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Jawwad Sheikh
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बस एक लम्हे के सच झूट के एवज़ 'फ़रहत'
तमाम उम्र का इल्ज़ाम ले गया मुझ से
Farhat Abbas Shah
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जब राह झूठ की चुनी तो लिफ़्ट भी मिली
और सच की राह में मिले पैरों के बस निशाँ
Tanoj Dadhich
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हमारी ज़िंदगी में क्या नया है
वही होता है जो, वो हो रहा है

ज़रा दुनिया का अपनी हाल देखो
ज़रा सोचो कोई सच-मुच ख़ुदा है?
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Shaad Imran
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तुम मिरी ज़िंदगी हो ये सच है
ज़िंदगी का मगर भरोसा क्या
Bashir Badr
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मैं मारा जाऊँगा पहले किसी फ़साने में
फिर इस के ब'अद हक़ीक़त में मारा जाऊँगा

मैं चुप रहा तो मुझे मार देगा मेरा ज़मीर
गवाही दी तो अदालत में मारा जाऊँगा
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Rana Saeed Doshi
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सच बताओ कि सच यही है क्या
साँस लेना ही ज़िंदगी है क्या

कुछ नया काम कर नई लड़की
इश्क़ करना है बावली है क्या
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Vikram Gaur Vairagi
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ये मैं ने कब कहा कि मेरे हक़ में फ़ैसला करे
अगर वो मुझ से ख़ुश नहीं है तो मुझे जुदा करे

मैं उस के साथ जिस तरह गुज़ारता हूँ ज़िंदगी
उसे तो चाहिए कि मेरा शुक्रिया अदा करे
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Tehzeeb Hafi
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किसी के झूठ से पर्दा हटाकर
हमारा सच बहुत रोया था उस दिन
Shadab Asghar
ओ सखी मन उस का तो तन भी उसी का
हक़ है उस को ग़ैर ये आँगन न चू
में
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Neeraj Neer
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तो डर रहे हैं आप कहीं हक़ न माँग ले
या'नी कि सब को खौफ़ है औरत के नाम से
Abhishar Geeta Shukla
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वो कहते हैं मैं ज़िंदगानी हूँ तेरी
ये सच है तो उन का भरोसा नहीं है
Aasi Ghazipuri
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जैसे तुम ने वक़्त को हाथ में रोका हो
सच तो ये है तुम आँखों का धोख़ा हो
Tehzeeb Hafi
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मुझे उस सेे मुहब्बत सच बड़ी महँगी पड़ेगी
अकेलेपन से उस ने इश्क़ ऐसा कर लिया है
Anukriti 'Tabassum'
किसी उम्मीद का ये इस्तिआरा जान पड़ता है
कि तन्हा ही सही सच झूट से अब रोज़ लड़ता है
Tarun Pandey
सच कहें तो वो कहानी बीच में दम तोड़ देगी
जिस कहानी को सभी किरदार छोड़े जा रहे हैं
Anurag Pandey
ये हक़ीक़त है, मज़हका नहीं है
वो बहुत दूर है, जुदा नहीं है

तेरे होंटों पे रक़्स करता है
राज़ जो अब तलक खुला नहीं है

जान ए जांँ तेरे हुस्न के आगे
ये जो शीशा है, आइना नहीं है

क्यूँ शराबोर हो पसीने में
मैं ने बोसा अभी लिया नहीं है

उस का पिंदार भी वहीं का वहीं
मेरे लब पर भी इल्तेजा नहीं है

जो भी होना था हो चुका काज़िम
अब किसी से हमें गिला नहीं है
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Kazim Rizvi
कम अज़ कम इक ज़माना चाहता हूँ
कि तुम को भूल जाना चाहता हूँ

ख़ुदारा मुझ को तन्हा छोड़ दीजे
मैं खुल कर मुस्कुराना चाहता हूँ

सरासर आप हूँ मद्दे मुक़ाबिल
ख़ुदी ख़ुद को हराना चाहता हूँ

मेरे हक़ में उरूस-ए-शब है मक़्तल
सो उस से लब मिलाना चाहता हूँ

ये आलम है, कि अपने ही लहू में
सरासर डूब जाना चाहता हूँ

सुना है तोड़ते हो दिल सभों का
सो तुम से दिल लगाना चाहता हूँ

उसी बज़्म-ए-तरब की आरज़ू है
वही मंज़र पुराना चाहता हूँ

नज़र से तीर फैंको हो, सो मैं भी
जिगर पर तीर खाना चाहता हूँ

चराग़ों को पयाम-ए-ख़ामुशी दे
तेरे नज़दीक आना चाहता हूँ
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Kazim Rizvi
ज़माने ने ग़लत को सच कहा है
ज़माने की ख़राबी है हमीं से
Meem Alif Shaz
इतने अफ़सुर्दा नहीं हैं हम कि कर लें ख़ुद-कुशी
और न इतने ख़ुश कि सच में मरने की ख़्वाहिश न हो
Charagh Sharma
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बस एक मैं था जिस सेे सच मुच में दिलबरी की
वरना हर आदमी से उस ने दो नंबरी की

जिस बात में भी हम ने ख़ुद को अकेला रक्खा
बाग़ात में भी हम ने जोड़ों की मुख़बरी की
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Muzdum Khan
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बे-वफ़ा शख़्स तेरे होंठों पे ये लफ़्ज़-ए-वफ़ा
सच बताऊँ मुझे बिल्कुल नहीं अच्छा लगता
Shajar Abbas
नहीं थकते मुझे इल्ज़ाम देते
भला कब तक ये बेरहमी करोगे

अगर सच बोलने मैं लग गया तो
ग़लत फ़हमी ग़लत फ़हमी करोगे
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Gopesh "Tanha"
सज़ा सच बोलने की ये मिली है
सभी ने कर लिया हम से किनारा
Meem Alif Shaz
तुम मिरे साथ हो ये सच तो नहीं है लेकिन
मैं अगर झूट न बोलूँ तो अकेला हो जाऊँ
Ahmad Kamal Parvazi
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मुतअस्सिर हैं यहाँ सब लोग जाने क्या समझते हैं
नहीं जो यार शबनम भी उसे दरिया समझते हैं

हक़ीक़त सारी तेरी मैं बता तो दूँ सर-ए-महफ़िल
मगर ये लोग सारे जो तुझे अच्छा समझते हैं
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Nirvesh Navodayan
तू तो सच में ही झूठा निकला यारा
तू तो कहता था हम मिलते रहेंगे
Vicky Kumar Rajak
या'नी तुम वो हो वाक़ई हद है
मैं तो सच-मुच सभी को भूल गया
Jaun Elia
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मुझे चाह थी किसी और की, प मुझे मिला कोई और है
मेरी ज़िन्दगी का है और सच, मेरे ख़्वाब सा कोई और है

तू क़रीब था मेरे जिस्म के, बड़ा दूर था मेरी रूह से
तू मेरे लिए मेरे हमनशीं कोई और था कोई और है
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Avtar Singh Jasser
दोस्त अपना हक़ अदा करने लगे
बेवफ़ाई हमनवा करने लगे

मेरे घर से एक चिंगारी उठी
पेड़ पत्ते सब हवा करने लगे
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Santosh S Singh
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उस के वालिद नवाब हैं भाई
उस को हक़ है हमें भुलाने का
Deepak Sharma Deep
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वक़्त, वफ़ा, हक़, आँसू, शिकवे जाने क्या क्या माँग रहे थे
एक सहूलत के रिश्ते से हम ही ज़्यादा माँग रहे थे

उस की आँखें उस की बातें उस के लब वो चेहरा उस का
हम उस की हर एक अदास अपना हिस्सा माँग रहे थे
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Shikha Pachouly
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ख़ुशरंग नज़र आता है जाज़िब नहीं लगता
माहौल मेरे दिल से मुख़ातिब नहीं लगता

मैं भी नहीं हर शे'र में मौजूद ये सच है
ग़ालिब भी हर इक शे'र में ग़ालिब नहीं लगता
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Obaid Azam Azmi
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क्या ग़लत-फ़हमी में रह जाने का सदमा कुछ नहीं
वो मुझे समझा तो सकता था कि ऐसा कुछ नहीं
इश्क़ से बच कर भी बंदा कुछ नहीं होता मगर
ये भी सच है इश्क़ में बंदे का बचता कुछ नहीं
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Tehzeeb Hafi
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मुक़ाबिल फ़ासलों से ही मोहब्बत डूब जाएगी
सुनोगी झूठी बातें तुम हक़ीक़त डूब जाएगी

चलेगी तब तलक जब तक तिरी परछाईं देखेगी
तिरा जब हुस्न देखेगी सियासत डूब जाएगी
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Anurag Pandey
वो हक़ीक़त को किस तरह समझे
वहम ने जिस की परवरिश की हो
Kaif Uddin Khan
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मुझे आज़ाद कर दो एक दिन सब सच बता कर
तुम्हारे और उस के दरमियाँ क्या चल रहा है
Tehzeeb Hafi
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मुझ को भी ज़िद करने का हक़ दो साहब
मेरे भीतर भी इक बच्चा रहता है
Atul K Rai
मेरा क़ातिल ही मेरा मुंसिफ़ है
क्या मिरे हक़ में फ़ैसला देगा
Sudarshan Fakir
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हमेशा इक दूसरे के हक़ में दुआ करेंगे ये तय हुआ था
मिलें या बिछड़ें मगर तुम्हीं से वफ़ा करेंगे ये तय हुआ था
Shabeena Adeeb
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न खाओ क़स
में वग़ैरा न अश्क ज़ाया' करो
तुम्हें पता है मेरी जान हक़-पज़ीर हूँ मैं
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Amaan Haider
पूछती है सच बताएँ, गर किसी से इश्क़ है
सच तो ये है, हाँ मुझे अब हर किसी से इश्क़ है

फिर रहा है बेटी के रिश्ते के ख़ातिर क्यूँ वो बाप
पूछ लेता काश, ऐ दुख़्तर, किसी से इश्क़ है
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Adnan Ali SHAGAF
रंग और नस्ल ज़ात और मज़हब जो भी है आदमी से कमतर है
इस हक़ीक़त को तुम भी मेरी तरह मान जाओ तो कोई बात बने
Sahir Ludhianvi
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भले ही जान-लेवा हो सियासत को ग़लत कहना
मगर फिर भी ये सच ईमान वाले लोग कहते हैं
Amaan Pathan
सच की डगर पे जब भी रक्खे क़दम किसी ने
पहले तो देखी ग़ुर्बत फिर तख़्त-ओ-ताज देखा
Amaan Pathan
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अब तो अमान होने लगा है यक़ीन ये
उस के ही हक़ में आएगा मुंसिफ़ का फ़ैसला
Amaan Pathan
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झूटी ता'रीफ़ों के पीछे भागते रहते हो दिन भर
अभी अगर मैं सच कह दूँगा वो तुम को चुभ जाएगा
Amaan Pathan
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ख़ैर सच तो है सच मगर ऐ झूठ
मैं ने तेरा भी ए'तिबार किया
Firaq Gorakhpuri
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पाना या खोना तो उसे क़िस्मत की बात थी
हम को तो दिल लगाने का हक़ भी न मिल सका
Harsh saxena
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चाँद ला सका नहीं कभी सनम है सच मगर
ला रहा हूँ मैं तुम्हारी ख़ातिर आफ़ताब अब
Amaan Pathan
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जो दिया सच की आग से रौशन
वो तो दरिया से भी बुझा ही नहीं
Amaan Pathan
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यही ज़िन्दगी मुसीबत यही ज़िन्दगी मसर्रत
यही ज़िन्दगी हक़ीक़त यही ज़िन्दगी फ़साना

कभी मैं हूँ तुझ सेे नालाँ कभी मुझ सेे तू परेशाँ
कभी मैं तिरा हदफ़ हूँ कभी तू मिरा निशाना
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Moin Ahsan Jazbi
कितने आशिक़ सँभल गए हैं मेरा फ़साना सुन सुन कर
मेरे हक़ में जैसी भी हो काम की है नाकामी भी
Qaisar Shameem
ज़बाँ तक जो न आए वो मोहब्बत और होती है
फ़साना और होता है हक़ीक़त और होती है
Wamiq Jaunpuri
मिरी रूह की हक़ीक़त मिरे आँसुओं से पूछो
मिरा मज्लिसी तबस्सुम मिरा तर्जुमाँ नहीं है
Mustafa Zaidi
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अदाकारी बहुत दुख दे रही है
मैं सच-मुच मुस्कुराना चाहता हूँ
Fahmi Badayuni
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कहते कहते कुछ बदल देता है क्यूँँ बातों का रुख़
क्यूँँ ख़ुद अपने आप के भी साथ वो सच्चा नहीं
Bashar Nawaz
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आसमानों से फ़रिश्ते जो उतारे जाएँ
वो भी इस दौर में सच बोलें तो मारे जाएँ
Ummeed Fazli
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अपने अंदर हँसता हूँ मैं और बहुत शरमाता हूँ
ख़ून भी थूका सच-मुच थूका और ये सब चालाकी थी
Jaun Elia
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हमें अपने घर से चले हुए सर-ए-राह उम्र गुज़र गई
कोई जुस्तुजू का सिला मिला न सफ़र का हक़ ही अदा हुआ
Iqbal Azeem
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चाहे जीतनी भले ही देरी हो
इक़ दुआ है कभी तो पूरी हो

काश हम तुम से हक़ से कह पाते
जान ए जॉ तुम तो सिर्फ़ मेरी हो
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Shadab Asghar
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ये समझ के माना है सच तुम्हारी बातों को
इतने ख़ूब-सूरत लब झूट कैसे बोलेंगे
Shahzad Ahmad
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तुम्हारे सामने सच बोलने से रुक गए हैं
हमें बताओ तुम्हें और क्या पसंद नहीं
Sanaullah Zaheer
उन को डर है कि कोई राज़ न खुल जाए कहीं
और मुझ में वो तलब है कि कोई सच न दबे
Haresh Vanza
अगर तौफ़ीक़ हो सच बोलने की
तो अपनी भी तरफ़-दारी न करना
Raees Rampuri
दोस्तों का क्या है वो तो यूँँ भी मिल जाते हैं मुफ़्त
रोज़ इक सच बोल कर दुश्मन कमाने चाहिएँ
Rajesh Reddy
वाक़िआ' कुछ भी हो सच कहने में रुस्वाई है
क्यूँँ न ख़ामोश रहूँ अहल-ए-नज़र कहलाऊँ
Shahzad Ahmad
शे'र अच्छे भी कहो सच भी कहो कम भी कहो
दर्द की दौलत-ए-नायाब को रुस्वा न करो
Abdul Ahad Saaz
मैं बिखर गया तो सँवर गया मेरे मुंसिफ़ो को ये दुख रहा
वही फ़ैसला मेरे हक़ में था जो मेरे ख़िलाफ़ किया गया
Shahid Zaki
धोका है इक फ़रेब है मंज़िल का हर ख़याल
सच पूछिए तो सारा सफ़र वापसी का है
Rajesh Reddy
तुम्हारे सामने सच बोलने से रुक गए हैं
हमें बताओ तुम्हें और क्या पसंद नहीं
Sanaullah Zaheer
मुझे अब आ गए हैं नफ़रतों के बीज बोने
सो मेरा हक़ ये बनता है कि सरदारी करूँँगा
Abdurrahman Wasif
बंद आँखों में सुनहरे ख़्वाब ठहरे थे मगर
ख़्वाब जब पहुँचे हक़ीक़त तक तो आँखें खुल गईं
Malika Naseem
सच बोलने दे ज़ालिम न कर ऐसा सलूक मुझ सेे
मेरे ख़्वाब सब हैं टूटे कहीं दिल टूट न जाए
Parwez Akhtar
मेरे साथ मेरे तमाम दोस्तों को भी ब्लॉक कर दिया
सच बताओ इतनी नफरत है या मेरी मोहब्बत का ख़ौफ़
Piyush
हक़ीक़त कुछ नहीं है सब फ़साने थे फ़साने हैं
उसी पे प्यार आता है उसी से धोखे खाने हैं
Shubham Seth